दिल्ली सरकार ने राजधानी में सार्वजनिक परिवहन ढांचे को मजबूत करने के लिए भलस्वा लैंडफिल साइट को विकसित कर वहां नया इंटर-स्टेट बस टर्मिनल (ISBT) बनाने की योजना बनाई है। इस संबंध में परिवहन मंत्री पंकज सिंह की अध्यक्षता में परिवहन विभाग की एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में भलस्वा साइट को विकसित कर वहां नया इंटरस्टेट बस टर्मिनल बनाने का निर्णय लिया गया।
सरकार के अनुसार, लैंडफिल से रिक्लेम की जा रही करीब 20 एकड़ जमीन पर यह नया डीटीसी इंटर-स्टेट बस टर्मिनल विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित टर्मिनल के बनने से दिल्ली के उत्तरी हिस्से में इंटरस्टेट बस कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ यात्रियों को भी अधिक सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। भलस्वा दिल्ली के तीन प्रमुख लैंडफिल साइट्स में से एक है। अन्य दो प्रमुख साइट्स गाजीपुर लैंडफिल और ओखला लैंडफिल हैं। दिल्ली सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक भलस्वा लैंडफिल का पूरी तरह से रिक्लेमेशन करने का है। फिलहाल करीब 70 एकड़ में फैली इस साइट में से दिल्ली नगर निगम अब तक 10 एकड़ से भी कम जमीन ही रिक्लेम कर पाया है।
नए बस टर्मिनल की है जरूरत
अधिकारियों के मुताबिक, परियोजना शुरू करने से पहले इसकी व्यवहार्यता (फीजिबिलिटी) स्टडी कराई जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की योजना और परियोजना का स्वरूप तय किया जाएगा।
दिल्ली में मौजूद हैं तीन बड़े ISBT
फिलहाल दिल्ली में तीन प्रमुख बस टर्मिनल हैं कश्मीरी गेट आईएसबीटी, आनंद विहार आईएसबीटी और सराय काले खां आईएसबीटी। बढ़ती आबादी और ट्रैफिक के दबाव को देखते हुए राजधानी में नए बस टर्मिनल की जरूरत महसूस की जा रही है।
यूईआर-2 के पास नया डीटीसी डिपो बनाने पर भी विचार
बैठक में मंत्री ने यूईआर-2 कॉरिडोर के पास नया डीटीसी डिपो बनाने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश भी दिए। इसके अलावा बुराड़ी बस डिपो को अपग्रेड करने के लिए भी कहा गया है, ताकि इलेक्ट्रिक बसों के बढ़ते बेड़े को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके।
तीन बड़े लैंडफिल साइट्स में शामिल है भलस्वा
भलस्वा दिल्ली के तीन प्रमुख लैंडफिल साइट्स में से एक है। अन्य दो साइट्स गाजीपुर लैंडफिल और ओखला लैंडफिल हैं। सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक भलस्वा लैंडफिल का पूर्ण रिक्लेमेशन करना है।
2026 तक 7,500 इलेक्ट्रिक बसें
सरकार के अनुसार, दिल्ली में फिलहाल 4,000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं और इसी महीने 200 नई बसें और जोड़ी जाएंगी। सरकार का लक्ष्य 2026 के अंत तक इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाकर 7,500 करना है। परिवहन विभाग के मुताबिक, शहर के 44 बस डिपो में पहले ही ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा चुका है। वहीं पीएम ई-ड्राइव के फेज़-1 और फेज़-2 के तहत 36 और डिपो में चार्जिंग नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, जिससे इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार को और गति मिलने की उम्मीद है।
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