Bihar News: बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भूमि मापी की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और नागरिक अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार के सात निश्चय-3 (2025–30) के तहत “Ease of Living” के लक्ष्य को साकार करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भूमि मापी की नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था 26 जनवरी 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी होगी। इसे मापी महाअभियान के रूप में 31 मार्च तक चलाया जाएगा। यह व्यवस्था बिहार काश्तकारी नियमावली, 1885 के नियम 23 (2)(ì)के तहत की गई है।
उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि भूमि मापी की नई व्यवस्था राज्य सरकार के सात निश्चय-3 के तहत नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और भरोसेमंद सेवाएं देने की दिशा में एक ठोस कदम है। अब लोगों को महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। अविवादित भूमि की मापी सात दिन और विवादित मामलों की मापी 11 दिन की तय समय-सीमा में पूरी होगी।
उन्होंने कहा कि, पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक विवादों पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा। इससे राज्य में भूमि विवाद के मामलों में उत्तरोत्तर कमी दर्ज हो सकेगी। उन्होंने आगे कहा कि मापी महाअभियान के माध्यम से लंबित मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि रैयतों को न्याय समय पर मिले और राजस्व प्रशासन में जनता का विश्वास और मजबूत हो।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल के माध्यम से जारी निर्देश के अनुसार अब भूमि मापी के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन किए जाएंगे। आवेदन के समय आवेदक को यह स्पष्ट करना होगा कि भूमि अविवादित है या विवादित। यदि भूमि विवादित पाई जाती है तो अंचलाधिकारी द्वारा विवाद की प्रकृति को परिभाषित किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत अविवादित मामलों में आवेदन के साथ ही मापी शुल्क का भुगतान करना होगा। ग्रामीण क्षेत्र में यह शुल्क 500 रुपये प्रति खेसरा और शहरी क्षेत्र में 1000 रुपये प्रति खेसरा निर्धारित किया गया है। तत्काल मापी के मामलों में यह राशि दोगुनी होगी। अविवादित मामलों में उपलब्ध चौहद्दीदारों को स्वतः नोटिस निर्गत कर सात दिनों के भीतर मापी पूरी की जाएगी।
वहीं, विवादित मामलों में अंचलाधिकारी आवेदन प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर मापी की तिथि और अमीन का निर्धारण करेंगे। यह तिथि सात दिनों के भीतर की होगी तथा सभी चौहद्दीदारों को सिस्टम के माध्यम से नोटिस भेजा जाएगा। विवादित भूमि की मापी अधिकतम 11 दिनों में पूरी की जाएगी। दोनों ही प्रकार के मामलों में मापी के उपरांत अमीन द्वारा प्रतिवेदन ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य होगा, जो आवेदन की तिथि से 14वें दिन तक पोर्टल पर उपलब्ध कराना होगा।
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