कुंदन कुमार/पटना। बिहार विधान परिषद में गुरुवार को राजद के कद्दावर नेता और विधान पार्षद अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कानून-व्यवस्था और वंदे मातरम की अनिवार्यता को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उनके इस बयान ने सदन के भीतर और बाहर एक नई बहस छेड़ दी है।
थेथर कहावत से सरकार पर तंज
सिद्दीकी ने प्रदेश में बढ़ते अपराध के आंकड़ों को पेश करते हुए नीतीश सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिहार में हत्या, लूट और महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं चरम पर हैं, लेकिन सरकार के कान पर जूं नहीं रेंग रही। सरकार के अड़ियल रवैये पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने मिथिला की एक मशहूर कहावत सुनाई:
”थेथर रे थेथर केना रहय छी, लात जूता खाई छी भने रहय छी।”
उन्होंने कहा कि सदन में विपक्ष लगातार हंगामे के जरिए जनता की आवाज उठा रहा है, लेकिन सरकार ‘थेथर’ हो गई है। उसे न तो जनता की सुरक्षा की चिंता है और न ही वह सदन में सार्थक जवाब दे पा रही है।
वंदे मातरम और ‘सारे जहां से अच्छा’ पर विवाद
वंदे मातरम गाने की बाध्यता पर सिद्दीकी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे सत्ता पक्ष का थोपा हुआ एजेंडा करार देते हुए कहा कि हम सब ‘जन गण मन’ का सम्मान करते हैं और उसे गाते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अगर देशभक्ति साबित करने के लिए किसी अन्य गीत की जरूरत है, तो ‘सारे जहा से अच्छा हिंदुस्तान हमारा’ क्यों नहीं गाया जाता?
सिद्दीकी ने चुनौती भरे लहजे में कहा कि यदि उस गीत के सम्मान में सावधान की मुद्रा में खड़ा होना हो, तो हम तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे प्रतीकात्मक विषयों को अनिवार्य बना रही है।
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