नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं (एक्टिविस्ट्स) की कथित अवैध हिरासत से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने अपना विस्तृत जवाब दाखिल किया है। पुलिस ने हलफनामा दायर कर कहा कि अपहरण, अवैध हिरासत, यातना और यौन उत्पीड़न जैसे सभी आरोप पूरी तरह झूठे, मनगढ़ंत और निराधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपों के पीछे कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और पुलिस ने सभी प्रक्रियाओं का पालन किया है।

पुलिस ने बताया कि यह जांच एक लापता महिला और कथित माओवादी/नक्सली विचारधारा से जुड़े संभावित अपराध से संबंधित थी। इसके तहत पूछताछ के लिए संबंधित व्यक्तियों को शामिल किया गया। हालांकि, इस पूरे मामले की जानकारी तब सामने आई जब कई कार्यकर्ताओं के परिजनों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और आरोप लगाया कि उनके रिश्तेदारों को बिना कानूनी आधार के हिरासत में रखा गया।

दिल्ली पुलिस पर लगाया आरोप

दिल्ली में छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं (एक्टिविस्ट्स) की कथित अवैध हिरासत के मामले में उनके परिजनों ने हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस (Habeas Corpus) याचिकाएं दायर की हैं। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि दिल्ली पुलिस ने छात्रों को बिना कानूनी आधार के हिरासत में रखा और उन्हें प्रताड़ित किया। इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट की बेंच कर रही है, जिसमें जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा शामिल हैं। दिल्ली पुलिस ने अपनी तरफ से हलफनामा दाखिल कर सभी आरोपों को झूठा, मनगढ़ंत और निराधार बताया है और कहा है कि हिरासत संबंधित पूछताछ एक गंभीर लापता महिला और कथित माओवादी/नक्सली विचारधारा से जुड़े मामले का हिस्सा थी।

‘लापता लड़की और नक्सली कनेक्शन की हो रही जांच’

पुलिस ने बताया कि 8 जुलाई 2025 को एक शिकायतकर्ता ने दर्ज कराई कि उसकी बेटी 3 जुलाई से दिल्ली के बेर सराय स्थित घर से लापता है। शिकायतकर्ता ने यह भी अंदेशा जताया कि उसकी बेटी नागरिक अधिकारों से जुड़े अभियानों में सक्रिय थी और संभवतः माओवादी या नक्सली विचारधारा से जुड़े लोगों के संपर्क में आ गई है। इस आधार पर 15 जुलाई 2025 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 127(3) और 61 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि इस जांच के सिलसिले में संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की गई।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को अवैध रूप से हिरासत में नहीं रखा गया। उनके अनुसार, संबंधित लोगों को 12, 13 और 14 मार्च 2026 को कानूनी प्रक्रिया के तहत पूछताछ के लिए बुलाया गया था। पुलिस ने बताया कि 13 मार्च को मॉरिस नगर स्थित एक कमरे से कुछ लोगों को स्पेशल सेल ऑफिस लाया गया। हालांकि, सभी को पूछताछ के बाद हर दिन छोड़ दिया गया और आगे की जांच में शामिल होने के लिए उन्हें नोटिस/निर्देश जारी किए गए। पुलिस ने अदालत को यह भी सूचित किया कि पूछताछ के दौरान सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और किसी के साथ किसी प्रकार का दुरुपयोग या अनियमितता नहीं हुई।

हाईकोर्ट ने खराब CCTV कैमरों पर जताई नाराजगी

दिल्ली हाईकोर्ट ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने विशेष रूप से सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के काम न करने को लेकर नाराजगी जताई और कहा, “अगर जरूरत के समय कैमरे काम ही नहीं करेंगे तो उन्हें लगाने का क्या मतलब है?” हाईकोर्ट ने पुलिस और संबंधित अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सभी सुरक्षा उपकरण सही ढंग से काम करें, ताकि नागरिकों की सुरक्षा और कानूनी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

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