Adani Enterprises NCD Issue 2026: अगर आप बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से ज्यादा रिटर्न चाहते हैं, तो अडानी ग्रुप के पब्लिक बॉन्ड इश्यू यानी NCDs (नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर) में निवेश कर सकते हैं. अडानी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज का यह इश्यू आज खुल रहा है. इसमें आप 19 जनवरी तक निवेश कर सकते हैं.

रिटेल निवेशकों यानी आम लोगों के लिए अच्छी खबर यह है कि कुल इश्यू का 35 प्रतिशत हिस्सा उनके लिए रिजर्व रखा गया है. यह कंपनी का तीसरा पब्लिक बॉन्ड इश्यू है. 2024 और 2025 में आए पिछले इश्यू को निवेशकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला था.

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Adani Enterprises NCD Issue 2026
Adani Enterprises NCD Issue 2026

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न्यूनतम निवेश ₹10,000, 2 से 5 साल के विकल्प

इन NCDs में निवेश करने के लिए न्यूनतम ₹10,000 लगाने होंगे. इसके बाद निवेश राशि को ₹1,000 के मल्टीपल में बढ़ाया जा सकता है. कंपनी ने निवेशकों को तीन टेन्योर दिए हैं, 24 महीने यानी 2 साल, 36 महीने यानी 3 साल और 60 महीने यानी 5 साल.

ब्याज भुगतान के लिए कुल 8 अलग-अलग सीरीज के विकल्प हैं, जिनमें तिमाही, सालाना और क्यूमुलेटिव यानी मैच्योरिटी पर एकमुश्त भुगतान शामिल है. इन बॉन्ड से मिलने वाला ब्याज आपकी आय में जोड़ा जाएगा और आपके टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा.

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बॉन्ड में निवेश करना शेयर खरीदने जितना आसान

डीमैट अकाउंट जरूरी है. आपके पास एक एक्टिव डीमैट अकाउंट होना चाहिए. आप Zerodha या Upstox जैसे ब्रोकर ऐप के NCD या बॉन्ड सेक्शन के जरिए आवेदन कर सकते हैं.

यह इश्यू पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर है. अगर 19 जनवरी से पहले कोटा भर जाता है, तो इश्यू समय से पहले बंद हो सकता है.

इस इश्यू का बेस साइज ₹500 करोड़ है. ओवर-सब्सक्रिप्शन की स्थिति में अतिरिक्त ₹500 करोड़ जुटाने का ग्रीन शू ऑप्शन भी रखा गया है.

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FD से बेहतर क्यों हैं ये बॉन्ड

अभी बड़े सरकारी बैंक 5 साल की FD पर करीब 7 से 7.50 प्रतिशत ब्याज दे रहे हैं, जबकि इस NCD इश्यू में निवेशकों को 8.90 प्रतिशत तक रिटर्न मिल सकता है.

CARE और ICRA जैसी रेटिंग एजेंसियों ने इन बॉन्ड्स को AA- रेटिंग दी है. इसका मतलब है कि डिफॉल्ट का जोखिम अपेक्षाकृत कम है और कंपनी समय पर ब्याज चुकाने में सक्षम मानी जाती है.

ये सिक्योर्ड NCDs हैं. यानी अगर किसी कारण से कंपनी पर संकट आता है, तो उसकी संपत्तियों को बेचकर सबसे पहले बॉन्डधारकों को भुगतान किया जाएगा.

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निवेश से पहले इन जोखिमों को समझें

अगर भविष्य में कंपनी की वित्तीय स्थिति कमजोर होती है और रेटिंग घटती है, तो बॉन्ड की कीमत पर असर पड़ सकता है.

हालांकि ये बॉन्ड स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होंगे, लेकिन मैच्योरिटी से पहले इन्हें बेचना कभी-कभी खरीदारों की कमी के कारण मुश्किल हो सकता है.

अडानी ग्रुप से जुड़ा कोई भी बड़ा विवाद या नकारात्मक खबर बॉन्ड की कीमतों को प्रभावित कर सकती है.

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एक्सपर्ट की सलाह

किसी एक कंपनी या ग्रुप में पूरा पैसा निवेश न करें. अपने कुल निवेश पोर्टफोलियो का सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत ही कॉर्पोरेट बॉन्ड में लगाना बेहतर माना जाता है.

पिछला इश्यू 3 घंटे में हुआ था फुल सब्सक्राइब

जुलाई 2025 में आया कंपनी का दूसरा NCD इश्यू पहले ही दिन सिर्फ 3 घंटे में पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था. ग्रुप CFO जुगेशिंदर रॉबी सिंह ने कहा था कि यह तीसरा NCD इश्यू रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक और अहम कदम है.

कंपनी ने साफ किया है कि इस इश्यू से जुटाई गई राशि का कम से कम 75 प्रतिशत हिस्सा मौजूदा कर्ज चुकाने या प्री-पेमेंट में इस्तेमाल किया जाएगा. बाकी 25 प्रतिशत राशि जनरल कॉर्पोरेट जरूरतों के लिए उपयोग की जाएगी.

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