विशेष : ज़रूरतमंदों और नि:शक्तजनों को शासन के निर्देश पर प्रशासन पहुँचा रहा राशन, बस्तर के ग्रामीण अंचलों में सोशल डिस्टेनसिंग के साथ दाल, चावल और सब्जी का वितरण …

रायपुर। कोरोना वायरस के संक्रमण से भले बस्तर अछूता हो, लेकिन लॉकडाउन के सबसे बड़ी चुनौती बस्तर के लिए है. बस्तर के ग्रामीण अँचल के आदिवासियों की जीविका साधन है हाट-बाज़ार, जंगल और जंगल से उपलब्ध होनी सामग्रियाँ. लेकिन लॉकडाउन जहाँ सारी व्यवस्थाएं ठप है. शहर-गाँव जहाँ बंद है, जहाँ हाट-बाज़ार बंद है वहाँ आदिवासियों की जरूरतों की पूर्ति कैसे होगी ?


यह सवाल लाजिमी था. लेकिन इन चुनौतियों को भूपेश सरकार बेहतर तरीके से समझ रही थी. सरकार को पता है कि बस्तर के लोगों की जरूरत ऐसे कठिन में समय में क्या होगी ? उन्हें किस तरह संकट के इस घड़ी में मदद पहुँचानी है. लिहाजा सरकार ने बस्तर पर भी अपना पूरा फोकस किया है. जबकि संक्रमण का प्रभाव बस्तर में नहीं था. बावजूद इसके सरकार ने बस्तर को पूरी तरह से सुरक्षित रखने वहाँ भी बाहरी आवाजाही पर पूरी तरह से प्रतिबंद लगाया है. क्योंकि बस्तर की सीमाएं पड़ोसी राज्य आंध्र, तेलंगाना, उड़ीसा और महाराष्ट्र से जुड़ती है. इन इलाकों में संक्रमण का प्रभाव ही ज्यादा था. इन स्तिथियों के बीच मुख्यमंत्री अधिकारियों से स्पष्ट कह दिया था कि सीमाएं पूरी तरह से सील रखना है. अब जब कड़ाई से लॉकडाउन का पालन कराना जरूरी था, तो सरकार के लिए ये भी जरूरी था कि आदिवासियों तक जरूरत की सभी चीजें पहुँचाई जाए. जिससे आदिवासियों को कोरोना संकट के बीच किसी चीज की कमी न हो. विशेषकर राशन से संबधित. मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ-साथ अधिकारियों के साथ लगातार समीक्षा कर स्थितियों पर बारिकियों से नज़र रख रहे थे.

मुख्यमंत्री ने बस्तर संभाग के सभी कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए. आदिवासियों तक जरूरत की सामग्रियाँ पहुँचाई. राशन में सारा समान होना चाहिए. किसी चीज की कोई कमी नहीं रहनी चाहिए. पंचायतों के माध्यम से चावल, दाल, तेल, नमक, सब्जी सहित अन्य घरेलु समान बस्तरवासियों को दी जाए. लेकिन मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सोशल डिस्टेंस का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए.

मुख्यमंत्री के निर्देश पर बस्तर संभाग में संकट से निपटने प्रशासनिक अधिकारियों ने मोर्चा संभाला. संभागायुक्त से लेकर कलेक्टरों ने खुद जिम्मेदारी ली. सामग्रियों के वितरण में स्वयं उच्च अधिकारी निगरानी रखने लगे. पंचायत स्तर पर सरपंच, उप-सरपंच, पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, मितानिनों को विशेष तौर पर जिम्मेदारियाँ सौंपी गई. कहाँ गया कि सभी आदिवासियों तक राशन का वितरण सुनिश्चित किया जाए. विशेष तौर पर निःशक्तजनों तक चावल, दाल, सब्जी, आदि का वितरण किया जाए.

मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार बस्तर के आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों में राशन सामग्री के साथ गाड़ियाँ पहुँचने लगी. पंचायतों के माध्यम से ग्रामीणों को चावस, दाल, सब्जी सहित अन्य समानों का वितरण शुरू हुआ. जैसे कि इन तस्वीरों में आप देख पा रहे हैं. इस दौरान कोरोना से बचने सोशल डिस्टेंस का विशेष रूप से ध्यान रखा जा रहा है. ग्रामीण एक बाद एक कतारबद्ध होकर एक से डेढ़ मीटर की दूरी पर खड़ा होकर राशन ले रहे थे. वहीं आदिवासी साफ-सफाई के लिए विशेष तौर पर जागरुक भी किया जा रहा. बस्तर जिले के ग्राम पंचायत मांदर, बडाजी, मटनार, सुआचोंडा, ढोंढरेपाल, नेंगानार सहित अन्य ग्रामों में भी इस प्रकार की सुविधा उपलब्ध कराकर लोगो को राहत पहुचाई जा रही है.

इसके साथ ही गरीब लोग जिनके पास राशन कार्ड नहीं है और न ही राशन की व्यवस्था है, ऐसे जरूरतमंद लोगों को जिला प्रशासन द्वारा निःशुल्क चांवल, दाल, आंटा, तेल, नमक, आलू-प्याज, शक्कर के साथ ही सब्जी इत्यादि के लिए नकद राशि दी जा रही है. उत्तर बस्तर में दो दिनों के भीतर जिले के 220 परिवारों के लिए लगभग 21 क्विंटल चांवल, 03 क्विंटल दाल के अलावा 29 किलो आंटा, 02 किलो तेल, 07 किलो नमक, 19 किलो आलू-प्याज तथा 03 किलो शक्कर और 35 हजार 200 रूपये नकद राशि का वितरण किया गया है ताकि कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे. जरूरतमंद व्यक्तियों को निःशुल्क राशन उपलब्ध कराने के लिए जनसहयोग लिया जा रहा है, साथ ही शासकीय एजेंसी एवं अधिकारी कर्मचारियों द्वारा सहायता राशि प्रदान की जा रही है.

फसल कटाई के दौरान विशेष सावधानी और सुरक्षा बरतने के निर्देश

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत फसल कटाई प्रयोगो का सम्पादन भी राष्ट्रीय महत्व का कार्य है. अतः इस परिप्रेक्ष्य में योजनांतर्गत फसल कटाई प्रयोगो का प्रदर्शन कुछ शर्तो के साथ शासन द्वारा अनुमति प्रदान कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये गए है.

जारी आदेश में कहा गया है कि फसल कटाई यथासंभव मशीन चलित उपकरणों से की जाए. हस्त चलित कटाई उपकरण काम में लेने पर उपकरणों को दिन में कम से कम 3 बार साबुन के पानी से कीटाणु रहित करें. फसल कटाई में सोशल डिसटेंसिंग का सख्ती से पालन किया जाए। खेत में फसल काटने, खाना खाते समय एक व्यक्ति से दूसरे के मध्य कम से कम 5 मीटर की दूरी रखी जाए। खाने के बर्तन अलग-अलग रखें तथा उनके प्रयोग के पश्चात साबुन के पानी से अच्छी तरह साफ करें.

एक व्यक्ति द्वारा काम लिए जाने वाले उपकरण को दूसरा व्यक्ति कदापि काम में न ले. कटाई करने वाले सभी व्यक्ति अपने-अपने उपकरण ही काम में ले. कटाई के दौरान बीच-बीच में अपने हाथों को साबुन के पानी से अच्छी तरह साफ करते रहें. कटाई कार्य अवधि में पहले दिन पहने कपड़े दूसरे दिन काम में न लें. काम में लिए कपड़ों को अच्छी तरह धोकर धूप में सुखाने के पश्चात ही पुनः उपयोग किया जाए, कटाई के दौरान सभी व्यक्ति अपनी-अपनी पानी की बोतल रखें.

कटाई करने वाले सभी व्यक्ति मास्क का प्रयोग करें. अगर किसी व्यक्ति को खांसी, जुखाम, बुखार, सर दर्द, बदन दर्द आदि के लक्षण हैं तो उसे फसल कटाई कार्य से अलग रखें तथा तत्काल अपने निकटतम स्वास्थ्यकर्मी को सूचित करें. खेत में पर्याप्त मात्रा में पानी व साबुन की उपलब्धता रखें. थ्रेसिंग कार्य के दौरान भी जारी दिशा-निर्देश के अनुसार सोशल डिस्टेंस, मास्क का प्रयोग, खाने व पानी पीने के बर्तनों का प्रयोग आदि सभी सावधानियों का पूर्ण गंभीरता से पालन करने को कहा गया है.

संभागीय कार्यालय में विशेष कंट्रोल रूम

वहीं कमिश्नर अमृत कुमार खलखो के द्वारा शासन के निर्देशानुसार कोरोना वायरस के नियंत्रण हेतु संभागीय कार्यालय में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है उपायुक्त बी.एस. सिदार को नोडल अधिकारी बनाया गया जिनका सम्पर्क नं 9977124830 है. संभागीय कंट्रोल रूम का नम्बर 07782-231488 है. कार्यालय में तीन शिफ्टों में कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जो संभाग के सभी जिलों के प्रभारी अधिकारियों, सीएमएचओ और ज्वाईट डायरेक्टर स्वास्थ्य से प्रतिदिन की कोरोना वायरस के बचाव और नियंत्रण के लिए किए जा रहे कार्यवाही की जानकारी एकत्र किया जाता है. कमिश्नर खलखो ने साथ ही सभी जिलों को शासन से प्राप्त निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने के भी निर्देश दिए है.

Related Articles

Back to top button
Close
Close
 
धन्यवाद, लल्लूराम डॉट कॉम के साथ सोशल मीडिया में भी जुड़ें। फेसबुक पर लाइक करें, ट्विटर पर फॉलो करें एवं हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें।