अगर आपको जंगली जानवरों से खास लगाव है और उनकी देखभाल में योगदान देना चाहते हैं, तो आपका यह सपना जल्द ही आंशिक रूप से पूरा हो सकता है। दिल्ली का नेशनल जूलॉजिकल पार्क (चिड़ियाघर) मार्च से आम लोगों के लिए जानवर गोद लेने (Adoption) की सुविधा शुरू करने जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, इस योजना के तहत लोग अपने जन्मदिन, शादी की सालगिरह या अन्य खास मौकों पर एक दिन के लिए किसी जानवर को गोद ले सकेंगे। इसका मतलब यह नहीं होगा कि जानवर घर ले जा सकेंगे, बल्कि उस दिन उसके भोजन, देखभाल और संरक्षण का खर्च वहन कर सकेंगे और प्रतीकात्मक रूप से उसके “अभिभावक” बन सकेंगे।

अब आपके मन में सवाल होगा कि जानवर गोद लेने के लिए क्या करना होगा और क्या इसके लिए भुगतान करना पड़ेगा? तो जवाब है जी हां, इसके लिए तय शुल्क देना होगा। दिल्ली के नेशनल जूलॉजिकल पार्क की इस योजना में गोद लेने की राशि जानवर के आकार, आहार और देखभाल के खर्च के अनुसार तय की गई है।

जानकारी के मुताबिक हिरण जैसे छोटे जानवर के लिए करीब 500 रुपये, बाघ जैसे बड़े जानवर के लिए करीब 50,000 रुपये तक शुल्क रखा गया है  इस राशि के जरिए उस दिन जानवर के भोजन और देखभाल का खर्च उठाया जाएगा। बदले में गोद लेने वाले व्यक्ति को प्रमाणपत्र या विशेष उल्लेख जैसी सुविधाएं भी मिल सकती हैं (नियमों के अनुसार)।यह पहल वन्यजीव संरक्षण में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने और जानवरों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है।

प्रस्ताव को इस महीने मंजूरी

दिल्ली के नेशनल जूलॉजिकल पार्क से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, कम अवधि (एक दिन) के लिए जानवर गोद लेने के प्रस्ताव को इस महीने के आखिर तक मंजूरी मिलने की उम्मीद है और इसे मार्च में लागू किया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि एक दिन के लिए गोद लेने का शुल्क हर जानवर की सालाना अडॉप्शन दर के आधार पर तय किया जाएगा। यानी जिस जानवर को साल भर के लिए गोद लेने का जितना शुल्क है, उसी अनुपात में एक दिन की फीस निर्धारित होगी।उदाहरण के तौर पर यदि किसी जानवर का सालाना गोद लेने का शुल्क 50,000 रुपये है, तो उसे एक दिन के लिए गोद लेने की फीस लगभग 500 रुपये रखी जाएगी  इस पहल से लोग खास मौकों पर वन्यजीव संरक्षण से जुड़ सकेंगे और चिड़ियाघर को भी जानवरों की देखभाल के लिए अतिरिक्त सहयोग मिलेगा।

किस जानवर के लिए कितना खर्च?

दिल्ली के नेशनल जूलॉजिकल पार्क की इस अनोखी योजना में अलग-अलग जानवरों के लिए गोद लेने की एक दिन की फीस उनकी सालाना लागत के आधार पर तय की गई है। जानकारी के मुताबिक  चित्तीदार हिरण- सालाना गोद लेने की लागत 18,000 रुपये, एक दिन के लिए करीब 500 रुपये, स्लॉथ बेयर (भालू)-  सालाना लागत 45,000 रुपये, एक दिन के लिए करीब 500 रुपये, बाघ- सालाना लागत लगभग 6 लाख रुपये, एक दिन के लिए करीब 50,000 रुपये चिड़ियाघर प्रशासन इस योजना को और सरल बनाने के लिए शॉर्ट-टर्म (कम अवधि) और ऑनलाइन गोद लेने के विकल्प भी शुरू करने जा रहा है। यह खास तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी होगा जो पूरे साल के लिए किसी जानवर को गोद लेने का वादा नहीं कर सकते, लेकिन किसी खास दिन या मौके पर योगदान देना चाहते हैं।

क्या होगा फायदा?

दिल्ली के नेशनल जूलॉजिकल पार्क की इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि अधिक से अधिक लोग इसमें हिस्सा लेंगे और वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन में आम जनता की भागीदारी मजबूत होगी। साथ ही, इससे चिड़ियाघर में आने वाले विजिटर्स की संख्या बढ़ने और अतिरिक्त राजस्व जुटाने में भी मदद मिल सकती है। इस योजना के तहत जानवर गोद लेने वाले व्यक्ति या परिवार को चिड़ियाघर द्वारा तय खर्च वहन करना होगा, जिसका उपयोग उस जानवर के भोजन, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की देखभाल पर किया जाएगा। योजना को आकर्षक बनाने के लिए चुने गए पैकेज के अनुसार गोद लेने वालों को यादगार के तौर पर प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट), तस्वीरें या स्मृति चिह्न भी दिए जाएंगे, ताकि वे इस अनुभव को हमेशा याद रख सकें।

लगेगी डिजिटल स्क्रीन

दिल्ली के नेशनल जूलॉजिकल पार्क की इस योजना को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए चिड़ियाघर के मुख्य प्रवेश द्वार पर एक डिजिटल स्क्रीन लगाने की भी तैयारी है। इस स्क्रीन पर गोद लेने के विकल्प, शुल्क और चिड़ियाघर में मौजूद जानवरों की जानकारी प्रदर्शित की जाएगी, ताकि आगंतुक आसानी से योजना को समझ सकें। आपको बता दें कि वर्ष 2022 में शुरू किए गए एनिमल एडॉप्शन प्रोग्राम का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देना और लोगों को वाइल्डलाइफ से जोड़ना था। फिलहाल चिड़ियाघर एक या दो साल के लिए जानवर गोद लेने की अनुमति देता है, जिसमें अब तक ज्यादातर कॉरपोरेट संस्थाएं ही आगे आई हैं।

मौजूदा प्रक्रिया लंबी और जटिल होने के कारण आम लोगों की भागीदारी कम रही अब तक केवल चार कंपनियों ने ही इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया है। इसी वजह से प्रशासन अब शॉर्ट-टर्म और आसान प्रक्रिया लागू करने की दिशा में कदम उठा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस पहल से जुड़ सकें। नई व्यवस्था लागू होने के बाद उम्मीद है कि आम नागरिक भी आसानी से किसी खास दिन या अवसर पर जानवर गोद लेकर वन्यजीव संरक्षण में योगदान दे सकेंगे।

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