प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक हत्या के मामले में 100 साल के आरोपी को रिहा कर दिया. न्यायाधीश चंद्र धारी सिंह और न्यायाधीश संजीव कुमार की डिवीजन बेंच ने फैसला सुनाते हुए यह कहा कि अपील का लंबे समय तक लंबित रहना और आरोपी धनी राम की लंबी उम्र को देखते हुए राहत देना प्रासंगिक है.

दरअसल, 1982 में हमीरपुर में हत्या की इस वारदात को अंजाम दिया गया था. हत्या जमीन से जुड़े एक विवाद को लेकर हुई थी. जिसमें 3 लोग मैकू, सत्ती दीन और धनी राम आरोपी बनाए गए थे. हत्याकांड के बाद मैकू फरार हो गया था, जबकि हमीरपुर सत्र न्यायालय ने 2 साल बाद 1984 में सत्ती दीन और धनी राम को उम्रकैद की सजा सुना दी थी.

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उच्च न्यायालय ने यह निर्देश दिया कि उसकी जमानत बॉन्ड को खत्म कर दिया जाए और यह भी कहा कि आरोपी को बरी करने का फैसला मामले की खूबियों पर आधारित है, खासकर अभियोजन पक्ष के आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में नाकामी को देखते हुए.

फैसला सुनाते समय डिवीजन बेंच ने ये भी कहा कि दशकों से आरोपी द्वारा झेली गई चिंता, अनिश्चितता और सामाजिक नतीजों को आकलन करते समय इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए कि अब इस केस में न्याय क्या मांगता है. धनी राम के वकील ने सुनवाई के दौरान कोर्ट से कहा कि अपीलकर्ता की उम्र करीब 100 साल है और उसने केवल मैकू को पीड़ित पर गोली चलाने के लिए उकसाया था.