दिल्ली की तीस हजारी पॉक्सो अदालत ने 2019 में एक बाप-बेटे को 7 साल की बच्ची का अपहरण और
दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में दोषी ठहराया
. जिसमें आरोप लगाया गया था कि पिता ने बच्ची की
हत्या में उसकी मदद की थी। 27 वर्षीय राजेंद्र और उसके 57 वर्षीय पिता राम सरन के
खिलाफ मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बबीता पुनिया की अदालत में हुई.
कोर्ट ने कहा कि सभी साक्ष्यों से पता चलता है कि आरोपियों ने साझा इरादे से
पीड़िता की जघन्य हत्या की.

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तीस हजारी कोर्ट की एडिशनल सेशन जज बबीता पुनिया ने कहा कि दिल्ली पुलिस के सबूत और परिस्थितियां पूरे घटनाक्रम को जोड़ती हैं. अदालत ने कहा कि परिस्थितियों और अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों से पता चलता है कि राजेंद्र ने बच्ची को अपहरण करके अपनी हवस पूरी की. सीसीटीवी फुटेज में दोनों आरोपियों को स्कूटर चलाते हुए और प्लास्टिक का थैला पकड़े हुए देखा गया था.

वह व्यक्ति और उसका पिता क्रूर हत्या करने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है, जो उचित संदेह से परे था. दोषी राजेंद्र को पॉक्सो कानून के तहत रेप, हत्या और किडनैपिंग के अलावा आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 34 (सामान्य इरादा) के तहत दोषी ठहराया गया है, जबकि 57 वर्षीय सरन को आईपीसी की धारा 34 (सामान्य इरादा) के तहत दोषी ठहराया गया है.

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कोर्ट ने कहीं अहम बातें

तीस हजारी कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस की जांच के बाद पेश की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि पीड़िता की हत्या का कारण हवस था और उसके शव को पार्क में छिपाया गया था ताकि उसे कानूनी सजा से बचाया जा सके.

कोर्ट ने कहा कि आरोपी राजेंद्र ने चिप्स का लालच देकर नाबालिग पीड़िता को बहलाया-फुसलाया और अपने घर पर उसका उत्पीड़न किया. 9 फरवरी 2019 को लड़की लापता हो गई थी, और दो दिन बाद उसका शव एक पार्क में मिला था, कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी पिता-पुत्र ने बच्ची के शव को एक सूटकेस में रखकर स्कूटर पर ले जाकर दिल्ली विकास प्राधिकरण पार्क में फेंक दिया गया था.