नीरज काकोटिया, बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के खैरलांजी तहसील में रहने वाले प्रसन्नजीत रंगारी के परिवार में 7 साल के लंबे इंतजार के बाद खुशी की लहर दौड़ गई है। पाकिस्तान की जेल में बंद रहे प्रसन्नजीत को 31 जनवरी 2026 को रिहा कर दिया गया है। पाकिस्तान ने कुल 7 भारतीय कैदियों को आजाद किया, जिनमें 6 पंजाब के और एक मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से प्रसन्नजीत रंगारी शामिल हैं।
प्रसन्नजीत को पाकिस्तान में ‘सुनील अदे’ के नाम से कोट लखपत जेल में रखा गया था। 1 अक्टूबर 2019 को उन्हें बाटापुर से हिरासत में लिया गया था। रिहाई के बाद वे अटारी-वाघा बॉर्डर के जरिए भारत पहुंचे और फिलहाल अमृतसर में रेड क्रॉस भवन और गुरु नानक देव अस्पताल में हैं।
बहन की मेहनत रंग लाई
प्रसन्नजीत की बहन संघमित्रा ने 2021 में भाई के पाकिस्तान जेल में होने की जानकारी मिलने के बाद लगातार प्रयास किए। अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाए, नेताओं से मिलीं और सरकार से गुहार लगाई। उनकी अथक मेहनत आज रंग लाई है। फोन पर भाई की आवाज सुनकर संघमित्रा रो पड़ीं। परिवार में खुशी छाई हुई है, आंखें नम हैं, क्योंकि अब प्रसन्नजीत जल्द ही मां और बहन से मिलेंगे
कैसे हुआ लापता और पाकिस्तान पहुंचा?
प्रसन्नजीत साल 2017-18 में घर से लापता हुए थे। एक बार बिहार गए और लौट आए, लेकिन उसके बाद फिर गायब हो गए। परिवार ने लंबी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। उन्हें मृत मान लिया गया था। दिसंबर 2021 में अचानक फोन आया और पता चला कि उनका भाई पाकिस्तान की जेल में है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी के कारण वह भटकते हुए सीमा पार चला गया था।
अब सामने आई चुनौती
परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है और ज्यादा शिक्षित भी नहीं। वे अकेले अमृतसर नहीं जा पा रहे हैं। ऐसे में वे मदद की गुहार लगा रहे हैं कि कम से कम अमृतसर से प्रसन्नजीत को घर लाने में सहायता मिले। खैरलांजी पुलिस थाने से 1 फरवरी को इसकी जानकारी मिली थी।
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