73 साल बाद नक्सली इलाके में बनी सड़क महीने भर में ही उखड़ने लगी, ठेका कंपनी के साथ विभागीय अधिकारी लीपापोती में जुटे…

पवन दुर्गम, बीजापुर। ग्रामीणों के 73 साल के इंतजार के बाद धुर नक्सली इलाके में 8 करोड़ 36 लाख की लागत से बनाई गई 12.5 किमी की सड़क एक महीना भी पूरा नही कर सकी. आवापल्ली से उसूर तक बनने वाली सड़क लेकर ग्रामीणों की खुशी महीने भर में ही नाराजगी और गुस्से में तब्दील हो गई है. गुणवत्ताहीन सड़क सैकड़ों जगह से उखड़ने लगी है.

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दरअसल, आवापल्ली से उसूर तक पक्की सड़क की मांग बीते 73 सालों से उसूर सहित दर्जनों गांवों वाले कर रहे थे. पूर्ववर्ती भाजपा शासनकाल में 8 करोड़ 36 लाख की राशि स्वीकृत हुई. लेकिन काम कांग्रेस के सत्ता पर काबिज होने के बाद इसी साल जून के महीने में बारिश के दिनों में शुरू हुआ. लेकिन जिस तरह से सड़क का निर्माण किया जा रहा था, उससे ग्रामीण नाखुश थे. इस संबंध में कई बार जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और स्वयं ठेका कंपनी के इंजीनियरों से की, लेकिन ठेका कंपनी ने अपने हिसाब से काम जारी रखी.

नक्सल मांद में कदम-कदम पर IED और बुबीट्रूप्स के जोखिम के बावजूद जवान सड़क निर्माण के दौरान बारिश में जंगल मे तैनात रहे, जिसकी वजह से सड़क पूरी हो पाई, लेकिन जवानों के समर्पण पर जेबे गर्म करने वाले अपना खेल खेल गए. दर्जनों गांवो के लिए लाइफलाइन सड़क पर आज जगह-जगह से डामर उखड़कर मिट्टी ऊपर निकल आई है, जो गुणवत्ता की पोल खोल रही है. वहीं ग्रामीण इस सड़क को बेहतर बनाने की मांग के साथ कंपनी और विभाग पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीनिवास मुदलियार ने सड़क की गड़बड़ी पर विभाग, ठेकेदार और विधायक को जिम्मेदार ठहराया है, साथ ही मौके पर जाकर मुआयना कर सबूतों के साथ आरोप लगाने की दलील दी है. मुदलियार ने माना कि सड़क भाजपा शासनकाल मे स्वीकृत हुई थी, लेकिन कांग्रेस सरकार में पूरी राशि के बंदरबांट का खेल विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों के साथ मिलकर खेला जा रहा है.

भाजपा के आरोपों को कांग्रेस जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बलविंदर राठौर ( लालू ) ने सिरे से नकारते हुए अभी कार्य प्रगति पर होना बताया है. बारिश की वजह से कुछ स्थानों पर डामर और मिट्टी उखड़ने की खबरें हैं, जिस कांग्रेस के प्रतिनिधि और विधायक स्वयं नजर बनाए हुए हैं. मरम्मत का कार्य भी शुरू किया गया है. वहीं लोक निर्माण विभाग के विभागीय अधिकारियों की माने तो भारी वाहनों के चलने से यह हालात हुए हैं। 12-15 टन क्षमता वाली सड़कों पर 40- 50 टन के भारी वाहनों के चलने की वजह से सड़क तय मियाद से पहले उखड़ने लगी है. कंपनी मरम्मत कर रही है.

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