ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तानी एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया था. इस सिस्टम का नाम HQ-9P था. ये सिस्टम भारत की ओर से दागी गई मिसाइल्स और ड्रोन्स को ट्रैक करने और मार गिराने में नाकाम रहा था. और अब एक बार फिर इसकी नाकामी सामने आई है. ईरान के पास भी HQ-9 सीरीज के B वेरिएंट का एयर डिफेंस सिस्टम है. इसकी अनुमानित रेंज लगभग 250 किलोमीटर बताई जाती है. लेकिन ताज्जुब की बात है कि इजरायली और अमेरिकन जेट्स एक बार फिर अपने मकसद में कामयाब हो गए. और ईरान का एयर डिफेंस वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाया जैसा कि उम्मीद थी. यही वजह है कि ईरान ने अपने सबसे पॉपुलर नेता और सुप्रीम लीडर को खो दिया.

ईरान की सुरक्षा में लगा चीन का HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम अमेरिका और इजरायल के मिसाइलों का सामना नहीं कर पाया. चीन कई बार अपने इस डिफेंस सिस्टम की तारीफ कर चुका है.

अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर एयरस्ट्राइक कर तेहरान समेत कई शहरों में तबाही मचा दी. इस हमले के बाद ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम पर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर वे अपने ऊपर हुए हमले को क्यों नहीं रोक पाए. ईरान ने हाल ही में अपने डिफेंस को मजबूत करने के लिए चीन से HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था, जो मौजूदा जंग में नाकाम साबित हुआ. 

चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन ने HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम बनाया है. इसे रूसी S-300PMU और अमेरिकी पैट्रियट PAC-2 सिस्टम की तरह चीन ने स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम के रूप में विकसित किया है. इसका पहला परीक्षण साल 2006 में किया गया था. कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इसकी मारक क्षमता 260 किमी है और यह 50 किमी की ऊंचाई तक उड़कर हाई एल्टीट्यूड पर मौजूद मिसाइलों को मार गिरा सकती है. 

HQ-9B एक साथ 6-8 लक्ष्यों को निशाना बना सकता है और 100 टारगेट को ट्रैक कर सकता है. HQ-9B को बीजिंग, तिब्बत और दक्षिण चीन सागर क्षेत्रों में तैनात किया गया है, जो सभी चीन के रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण हैं.

ईरान ने तेल बदले चीन के साथ HQ-9B मिसाइल की डील की थी. 2025 के जंग के दौरान इजरायली मिसाइलों के खिलाफ रूसी S-300PMU-2 के खराब प्रदर्शन के बाद ईरान का यह एक बड़ा अपग्रेड था.

ईरान ने अपनी सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए बड़े भरोसे के साथ चीन से HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा था. लेकिन युद्ध के मैदान में यह फिसड्डी साबित हुआ. यह पहली बार नहीं है जब चीनी तकनीक फेल हुई हो. इससे पहले जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का जवाब देने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था, तब भी पाकिस्तान में तैनात यही सिस्टम भारतीय प्रहार को रोकने में नाकाम रहा था. ईरान में हुए इस ताजा विनाश के बाद अब रक्षा विशेषज्ञों ने चीनी हथियारों की गुणवत्ता और उनकी असली ताकत पर गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं.

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