कृषि, श्रम, लोककल्याण, नेतृत्व, जनहित की भावना और आदर्श शासन की कल्पना पर आधारित गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस की एक चौपाई- दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा॥ सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥ यानि,रामराज्य में किसी को भी शारीरिक, दैवीय या भौतिक कष्ट नहीं होता।राम राज्य में सभी लोग आपस में प्रेम से रहते हैं और अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। मध्यप्रदेश की मोहन सरकार में किसानों की समृद्धि और ग्रामीण विकास की योजनाएँ इसी आदर्श शासन की दिशा में एक सार्थक प्रयास हैं।

लंबे समय से भारत का “सोयाबीन स्टेट” और “कृषि प्रधान प्रदेश” कहे जाने वाले मध्यप्रदेश की बड़ी आबादी सीधे तौर पर खेती और उससे जुड़े कार्यों पर निर्भर करती है। इस स्थिति में किसानों की समृद्धि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सशक्त होना प्रदेश के विकास की आधारशिला माना जाता है।राज्य के किसानों के हित की सोचते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्ष 2026 को “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में घोषित किया है। अपने इस संकल्प को अमली जामा पहनाने के लिए राज्य के बड़वानी जिले के जनजातीय बहुल गांव नागलवाड़ी में आयोजित पहली कृषि कैबिनेट ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में एक नई परंपरा की शुरुआत की है। राजधानी भोपाल से दूर किसी ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र में पूरी कैबिनेट की बैठक आयोजित करना एक प्रशासनिक निर्णय के अलावा एक प्रतीकात्मक संदेश भी है कि सरकार अब सीधे किसानों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझना चाहती है।27,746 करोड़ रुपए की ऐतिहासिक वित्तीय स्वीकृति के साथ शुरू हुई इस कृषि यात्रा में आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश के किसानों के लिए कई बड़े फैसलों की राह खुलती नज़र आ रही है।

नागलवाड़ी में आयोजित होने वाली कृषि कैबिनेट की बैठक मोहन सरकार की सोच का प्रतिनिधित्व करती है। अब तक सरकार के बड़े फैसले प्रदेश कीराजधानी भोपाल में ही हुआ करते थे लेकिन डॉ. मोहन यादव ने इस परंपरा को तोड़ते हुए पूरे मंत्रिपरिषद को निमाड़ क्षेत्र के एक सुदूर ग्रामीण इलाके में ले जाकर बैठक आयोजित की।उनका यह निर्णय कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के प्रति सरकार की विशेष संवेदनशीलता दिखाई दी। जनजातीय क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता देने का संदेश जन-जन तक पहुँचा। किसान और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित हो पाया। स्थल के रूप में नागलवाड़ी का चयन भी विशेष महत्व का था। सतपुड़ा की सुरम्य वादियों में बसा नागलवाड़ी गांव 800 वर्ष पुराने भीलट देव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है जो निमाड़-मालवा क्षेत्र के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। कैबिनेट बैठक से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन और मंत्रियों ने यहां देव दर्शन कर प्रदेश के किसानों की सुख-समृद्धि की कामना की। एक तरफ आस्था,परंपरा और दूसरी तरफ आधुनिक कृषि विकास की योजनाएं यह अदभुत संगम प्रदेश को धनात्मक संदेशों से भरने वाला साबित हुआ।

27,746 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृति कृषि कैबिनेट बैठक की सबसे महत्वपूर्ण घोषणा रही। यह राशि कृषि क्षेत्र के विकास और किसानों के कल्याण के लिए आगामी वर्षों में खर्च की जाएगी।27,746 करोड़ रुपए की राशि कृषि के जिन प्रमुख क्षेत्रों के विकास के लिए निर्धारित की गई है वह है —कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, उद्यानिकी, सहकारिता और ग्रामीण कृषि अधोसंरचना। इन छह विभागों की प्रमुख 16 योजनाओं के माध्यम से यह राशि किसानों तक पहुंचा दी जाएँगी। मोहन सरकार के इस निर्णय का सबसे बड़ा उद्देश्य है किसानों की आय को बढ़ा कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना। आधुनिक खेती केवल पारंपरिक धान और गेहूं तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि इस समय किसान फलों, सब्जियों, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन और प्रोसेसिंग उद्योग से भी जुड़े हुए हैं। निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि सरकार की यह बहु-विभागीय योजना किसानों की आय के नए स्रोत तैयार करने में काफ़ी मददगार साबित हो सकती है।
नागलवाड़ी में आयोजित कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था किसान संवाद। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से साथ-साथ स्थानीय बुद्धिजीवियों से भी सीधे बातचीत की। प्रत्यक्ष होकर मुख्यमंत्री ने किसानों की समस्याएं सुनीं और उन्हें सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी दी। किसानों से उनका यह संवाद कई मायनों में महत्वपूर्ण था। इस संवाद से किसानों को अपनी समस्याएं सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का अवसर मिला। सरकार को भी जमीनी हकीकत समझने का अच्छा अवसर मिला। योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार के सार्थक सुझाव मिले। भारतीय लोकतंत्र की एक स्वस्थ परंपरा कि नीतियां केवल फाइलों में नहीं बल्कि लोगों की भागीदारी से बनें उसका भी पालन किया जा सका।
निमाड़ क्षेत्र मध्यप्रदेश का एक महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्र है। निमाड़ क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु कई प्रकार की फसलों के लिए उपयुक्त मानी जाती है।इस क्षेत्र में मुख्य रूप से उगाई जाने वाली केला,कपास,मिर्च,गन्ना,चना,तिल निमाड़ की खासियत है विविधता। खेती के आधुनिक दौर में यहां के किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि “मां नर्मदा का आंचल मिलने के कारण निमाड़ क्षेत्र अत्यंत सौभाग्यशाली है।नर्मदा के जल से उपलब्ध सिंचाई सुविधा से इस क्षेत्र का किसान एक से अधिक फसलें लेकर आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहे हैं।” आज पूरी दुनिया में खेती का तरीक़ा बहस का मुद्दा बनी हुई है। रासायनिक खाद और कीटनाशक मिट्टी की उर्वरता घटा रहे हैं। इस चुनौती का सामना करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की है।उन्होंने कहा कि “शुरुआत में उत्पादन थोड़ा कम हो सकता है लेकिन इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और लंबे समय में उत्पादन भी बेहतर होने लगेगा।” प्राकृतिक खेती से मिट्टी की सेहत में सुधार होता है,उत्पादन लागत में कमी आती है, पर्यावरण का संरक्षण होता है और स्वास्थ्यवर्धक खाद्यान्न का उत्पादन होता है। यदि मध्यप्रदेश बड़े स्तर पर प्राकृतिक खेती को अपनाता है तो निश्चित ही यह पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकता है।
इस कार्यक्रम के दौरान एक विशेष कृषि प्रदर्शनी भी लगाई गई थी जिसमें निमाड़ क्षेत्र की कृषि पद्धतियों, नई तकनीकों और सफल मॉडलों को प्रदर्शित किया गया था। कृषि प्रदर्शनी की प्रमुख थीम थीं प्राकृतिक खेती मॉडल, वोकल फॉर लोकल, केले का विकास मॉडल डॉलर चना मूल्य श्रृंखला, बड़वानी मिर्च प्लास्टर, तिल की उभरती हुई फसल,गन्ना उत्पादन मॉडल, मिशन सिकल सेल उन्मूलन, वन्य ग्राम समृद्धि अभियान, इस प्रदर्शनी ने किसानों को सीखने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। इससे किसानों को यह समझने का अवसर मिला कि आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके खेती को किस तरह लाभकारी बनाया जा सकता है।
मध्यप्रदेश का बड़वानी जिला और उसके आसपास का क्षेत्र मुख्य रूप से जनजातीय बहुल क्षेत्र है।लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा से कटे रहने वाले इन क्षेत्रों को अब मोहन सरकार प्राथमिकता दे रही है। नागलवाड़ी में कैबिनेट बैठक से प्रदेश की जनता को यह संदेश गया कि आदिवासी क्षेत्रों को विकास के केंद्र में रखा जाएगा, कृषि आधारित रोजगार बढ़ाए जाएंगे और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ कर “वोकल फॉर लोकल” की थीम को बाल दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में किसानों के कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। मध्यप्रदेश सरकार भी उसी दिशा में कार्य कर रही है।केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, किसान क्रेडिट कार्ड और प्राकृतिक खेती अभियान जैसी सभी योजनाएँ को प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है।राज्य और केंद्र के समन्वय से कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाने की कोशिश हो रही है।

आधुनिक कृषि केवल खेती तक सीमित नहीं है इसके साथ कई अन्य गतिविधियां भी जुड़ी होती हैं जैसे दुग्ध उत्पादन पशुपालन,खाद्य प्रसंस्करण,परिवहन और कृषि उपकरण उद्योग। 27,746 करोड़ रुपए की योजनाएं इन सभी क्षेत्रों को बढ़ावा देने वाली होंगी, इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार होगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। नागलवाड़ी कृषि कैबिनेट बैठक में दीर्घकालिक योजनाओं पर ध्यान दिया गया है। मध्यप्रदेश में अगले पांच वर्षों में कृषि क्षेत्र के विकास के लिए रोडमैप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य है किसानों की आय में स्थायी वृद्धि करना, कृषि उत्पादकता बढ़ाना, कृषि उत्पाद का बाजार तक पहुंच आसान बनाना और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना। यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन योजना के अनुसार हो पाया तो मध्यप्रदेश कृषि विकास में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है। प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नेतृत्व शैली देश में एक अलग पहचान बना रही है। वे प्रशासन को केवल कार्यालयों तक सीमित न रखते हुए कि उसे जनता के बीच ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। नागलवाड़ी कृषि कैबिनेट इसका एक बड़ा उदाहरण बन गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सोच में ग्रामीण विकास को प्राथमिकता, किसानों के साथ सीधा संवाद, आधुनिक तकनीक और परंपरा का संतुलन यही तीन बातें प्रमुख रूप से दिखाई देतीं हैं। यही कारण है कि नागलवाड़ी में आयोजित कृषि कैबिनेट बैठक को “डॉ. मोहन युग” की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। नागलवाड़ी में आयोजित कृषि कैबिनेट से यह स्पष्ट हो गया है कि मध्यप्रदेश सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। करोडों रुपए की योजनाएं, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, किसानों से सीधा संवाद और जनजातीय क्षेत्रों के विकास की प्रतिबद्धता ये सभी कदम मिलकर एक नई कृषि क्रांति का संकेत बन रहे हैं। कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश कृषि विकास के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है।यदि सरकार की तैयार की गई सभी योजनाएं इसी गति से आगे बढ़ती रहीं मध्यप्रदेश केवल कृषि प्रधान राज्य ही नहीं बल्कि कृषि समृद्धि का राष्ट्रीय मॉडल बनकर भी उभरेगा। नागलवाड़ी की धरती से आरम्भ हुई यह यात्रा वास्तव में “जय बलराम” के उस मंत्र को साकार करेगा जिसमें किसान की समृद्धि को ही प्रदेश और राष्ट्र की समृद्धि का आधार माना गया है।

संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम
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