देश में पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं या कुछ दिनों के भीतर होने वाले हैं. अब इस चुनावी मौसम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को लेकर फेक न्यूज़ की बाढ़ आ गई है. आरएसएस से जुड़ी कई फ़र्ज़ी ख़बरें सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही हैं. सोशल मीडिया पर कई बार एआई से बनाए गए फर्जी वीडियो वायरल किए जाते हैं. इसके अलावा आरएसएस के लेटर हेड का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया पर कोई भी बयान प्रचारित किया जाता है. आरएसएस नेताओं के अनुसार इनके पीछे उद्देश्य मतदाताओं को भ्रमित करना और कुछ राजनीतिक दलों को लाभ पहुंचाना हो सकता है. आरएसएस के पदाधिकारियों ने इसको लेकर लोगों से निवेदन किया है कि बिना ठीक से जांचे-परखे और क्रॉस चेक किए किसी बात पर भरोसा ना करें.

आरएसएस की ओर से जारी की गई फेक न्यूज की लिस्ट

ऐसी फर्जी खबरों से परेशान संघ ने अब विस्तार से इन फ़ेक न्यूज़ की लिस्ट जारी की है. आरएसएस की ओर से जारी इन फ़र्ज़ी ख़बरों की सूची में उन खबरों को शामिल किया गया है जिन्हें पिछले कुछ दिनों में उसके प्रमुख पदाधिकारियों और केंद्र के वरिष्ठ मंत्रियों तथा अधिकारियों के नाम से फैलाई गई हैं. आरएसएस के एक नेता के अनुसार इस क़वायद का मक़सद यह है कि लोग इनके जाल में न फंसें और सतर्क रह कर फ़ैसला करें.

सेना का भगवाकरण करना है..

फरवरी हमीने में आरएसएस चीफ मोहन भागवत का एक वीडयो वायरल हो रहा था. इसमें वह कह रहे थे कि सेना का भगवाकरण करना है. इसके अलावा उनको कहते हुए देखा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अछूतों से छुटकारा पा लेना चाहिए. इस वीडियो को सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया गया. हालांकि जब जांच की गई तो पता चला कि यह वीडियो फर्जी था और एआई से बनाया गया था. एआई की मदद से आसानी से व्यक्ति की भाव-भंगिमाएं, होटों के हिलने और अन्य चीजें भी बदली जा सकती हैं.

संघ को बदनाम करने के लिए डीपफेक का सहारा

संघ की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दुष्प्रचार अभियान में सबसे खतरनाक पहलू डीपफेक तकनीक का उपयोग है,इसके माध्यम से सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जैसे उच्च पदस्थ व्यक्तियों के बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है. उदाहरण के तौर पर एक वीडियो में डॉक्टर मोहन भागवत को भारतीय सेना के भगवाकरण की बात करते हुए दिखाया गया जबकि मूल वीडियो एकता के संदेश पर आधारित था. पीआईबी और अन्य तथ्य-जांचकर्ताओं ने इसे पूरी तरह फर्जी करार दिया है. इसी प्रकार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के एक पुराने भाषण में एआई द्वारा आवाज बदलकर उन्हें संघ की तुलना तालिबान से करते हुए दिखाया गया है, जो पूरी तरह निराधार पाया गया.

संघ के मुताबिक़ डिजिटल जालसाजी के इस दौर में केवल वीडियो ही नहीं बल्कि फर्जी दस्तावेजों और पत्रों का भी बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है. हाल ही में एक पत्र वायरल हुआ जिसमें डॉक्टर मोहन भागवत द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ शिकायत करते हुए दिखाया गया था. संघ ने स्पष्ट किया है कि यह पत्र पूरी तरह फर्जी है. इसे राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के उद्देश्य से बनाया गया था.

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