देश में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच एम्स निदेशक का बड़ा बयान, न तो हम शिखर पर पहुंचे हैं, और न ही स्थिरता आई है…

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण से पांच महीने जूझने के बाद भी देश को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है. वैक्सीन पर केवल बात ही हो रही है, कब लोगों को उपलब्ध होगा इसका अता-पता नहीं है. ऐसे में एम्स के निदेशक और देश के जाने-माने स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कोरोना के मामलों के अभी शिखर पर नहीं पहुंचने की बात कहकर और निराशा भर दी है.

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि देश में कोरोना के मामले अपने शिखर (peak) पर नहीं पहुंचे हैं, और न ही स्थिरता (plateaue) आई है. इससे सवाल यह पैदा हो रहा है कि जब बीते दो दिनों में एक लाख से ज्यादा कोरोना संक्रमित मिले हों, तो पीक में क्या स्थिति होगी. क्या हम अमेरिका और ब्राजील को मानक मानकर चल रहे हैं, जहां कमोबेश एक दिन में एक लाख तक केस मिल रहे हैं.

महामारी पर नजर रखऩे के लिए बनाई कई केंद्र सरकार की कोर टीम के सदस्य डॉ. गुलेरिया कहते हैं कि हम बहुत ही कठिन दौर से गुजर रहे हैं. यह देश की जीवटता को परख रहा है. हम कोरोना के प्रकरणों में अभी तक शिखर पर नहीं पहुंचे हैं, और न ही प्रकरणों में स्थिरता आई है. वैक्सीन के विकास पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारत इस मामले में अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है, क्योंकि हमारे यहां दुनिया का लगभग 60 फीसदी वैक्सीन का निर्माण होता है.

वे कहते हैं कि हमारे पास बड़ी मात्रा में वैक्सीन बनाने की क्षमता है, और सरकार और निर्माताओं ने भरोसा दिलाया है कि जरूरत पड़ी तो न केवल हम अपने देश के लिए बल्कि दुनिया के लिए भी उत्पादन क्षमता में तेजी से बढ़ोतरी कर सकते हैं. वे कहते हैं कि वैक्सीन के विकास में बहुत तेजी इसलिए आई है, क्योंकि विभिन्न देश मिलकर काम कर रहे हैं.

देश के नामी फप्फुसीय विशेषज्ञ (pulmonologist) डॉ. गुलेरिया कहते हैं कि इस महामारी ने दुनिया के लोगों के संघर्ष के माद्दे को साबित कर दिया. साथ ही बता दिया कि जरूरत पड़ने पर शोध, निर्माण और उद्योग एक साथ आ सकते हैं. इसके साथ ही वे रूस में बने कोरोना के पहले वैक्सीन को लेकर सतर्क करते हुए सुरक्षा के पहले पर जोर देते हैं. वे कहते हैं कि वैक्सीन सुरक्षित और असरकारक हो, यही हम अपेक्षा करते हैं.

वे कहते हैं कि कोई भी वैक्सीन जिसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाना हो, जिसमें बुजुर्ग या किसी व्याधि से ग्रसित व्यक्ति पर इस्तेमाल किया जाना हो, सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण विषय होता है. इसके अलावा उसका असरकारक होना भी जरूरी है कि वह किस स्तर तक और कब तक सुरक्षा प्रदान करता है.

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