कुंदन कुमार, पटना। अररिया के जोकीहाट निवासी प्रख्यात इस्लामिक स्कॉलर मौलाना अब्दुल्ला सलीम चतुर्वेदी की गिरफ्तारी को लेकर विवाद गहरा गया है। आरोप है कि उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स ने दो साल पुराने कथित डॉक्टर्ड वीडियो के मामले में उन्हें बिहार से बिना ट्रांजिट रिमांड गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई पर सीमांचल समेत कई इलाकों में नाराजगी जताई जा रही है और इसे अवैध बताया जा रहा है।

अख्तरुल ईमान ने बताया मानवाधिकार का उल्लंघन

AIMIM प्रदेश अध्यक्ष और आमौर विधायक अख्तरुल ईमान ने इस संबंध में कहा कि इस गिरफ्तारी से सीमांचल समेत बिहार के कई इलाकों में नाराजगी है। उन्होंने कहा कि, मौलाना सलीम चतुर्वेदी की पहचान एक विद्वान के रूप में है, और उनके समर्थकों का मानना है कि यह कार्रवाई राजनीति से प्रेरित है।

अख्तरुल ईमान ने कहा कि, एक सम्मानित स्कॉलर को बिना ट्रांजिट रिमांड के दूसरे राज्य की पुलिस द्वारा उठा ले जाना न्याय व्यवस्था का मजाक है। यह सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन और बिहार के क्षेत्राधिकार में हस्तक्षेप है। उन्होंने सीएम नीतीश और बिहार सरकार से इस मामले में तुरंत संज्ञान लेने की अपील की है।

जानें क्या है पूरा मामला?

दरअसल पूर्णिया जिले से मशहूर इस्लामिक स्कॉलर मौलाना अब्दुल्ला सलीम चतुर्वेदी को यूपी की एसटीएफ ने बीते 30 मार्च सोमवार की देर शाम गिरफ्तार कर लिया। स्कॉलर मौलाना की गिरफ्तारी अमौर थाना क्षेत्र के दलमालपुर गांव में की गई। मौलाना मूल रूप से अररिया जिले के जोकीहाट के रहने वाले हैं। गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ उन्हें अपने साथ यूपी लेकर चली गई।

यूपी में दर्ज हैं 120 से अधिक मुकदमे

पूरा मामला लगभग दो साल पुराने एक वायरल वीडियो से जुड़ा बताया जा रहा है। दरअसल आरोप है कि मार्च 2026 की शुरुआत में एक धार्मिक सभा के दौरान मौलाना अब्दुल्ला सलीम चतुर्वेदी ने यूपी के गोकशी कानून पर टिप्पणी की थी। इसी दौरान उन्होंने कुछ ऐसे बयान दिए, जिन्हें आपत्तिजनक और अभद्र बताया गया। वायरल वीडियो को लेकर यूपी में मौलाना के खिलाफ 120 से अधिक मुकदमे दर्ज कराए गए हैं, जिसमें यूपी की एसटीएफ ने यह कार्रवाई की है।

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