Ajit Pawar Political Journey: महाराष्ट्र की राजनीति के 4 दशक से भी अधिक समय तक अहम चेहरा रहने वाले अजित पवार का आकस्मिक निधन हो गया है। 28 जनवरी को महाराष्ट्र के बारामती (Baramati) में प्लेन क्रैश में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का निधन हो गया। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम जिला पंचायत चुनाव प्रचार के जा रहे थे, इसी दौरान ये दर्घटना घटी।
महाराष्ट्र की सियासत के बेताज बादशाह कहे जाने वाले अजित पवार अपने चाचा शरद पवार की उंगली पकड़कर राजनीति में कदम रखा था। उन्होंने चाचा शरद से ही राजनीति की A, B, C, D या कहे ककहरा सीखी थी। इसके बाद अपने चाचा को ही मात देकर अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति के ‘दादा’ बने।

उन्होंने अपनी राजनीतिक कौशल के जरिए पार्टी को महाराष्ट्र में मजबूत बनाया। पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर एनसीपी को एक बड़ा जनाधार तैयार करने में अहम रोल अदा किया। हालांकि 2022 में शरद पवार से अलग अपनी राजनीतिक लकीर खींची और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई। अजित पवार पिछले 4 दशक से भी अधिक समय तक अलग-अलग सरकारों में मंत्री के रूप में काम किया।

1982 में राजनीति में कदम रखा था
अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार की उंगली पकड़कर साल 1982 में राजनीति में कदम रखा था। अजित पवार प्राथमिक शिक्षा की पढ़ाई कर रहे थे, तो उस दौरान उनके चाचा यानी शरद पवार एक दिग्गज सियासी नेता बन चुके थे। राजनीति में कदम रखने के बाद सबसे पहले उन्होंने एक सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड के लिए चुने लड़ा। वो पुणे सहकारी बैंक के अध्यक्ष के रूप में चुने गए, वो16 सालों तक इस पद पर काबिज रहे। साल 1991 में पहली बार बारामती संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुने गए, लेकिन बाद में उन्होंने यह सीट अपने चाचा शरद पवार के लिए खाली कर दी। इसके बाद शरद पवार केंद्र में पीवी नरसिम्हा राव सरकार में रक्षा मंत्री बने। यहीं से शरद पवार केंद्र की राजनीति में खुद को सक्रिय कर लिया तो अजित पवार महाराष्ट्र की सियासत की कमान अपने हाथ में ले ली।

पहले लोकसभा फिर विधानसभा का सफर
अपने समर्थकों के बीच दादा के नाम से पुकारे जाने वाले, अजित पवार ने 1980 के दशक में चाचा शरद की छत्रछाया में राजनीति में कदम रखा था। साल 1991 में उन्हें पहली चुनावी सफलता तब मिली, जब उन्होंने बारामती लोकसभा सीट पर जीत हासिल की। हालांकि, उन्होंने कुछ समय बाद ही अपने चाचा के लिए पद से इस्तीफा दे दिया था। फिर शरद ने यहां के उपचुनाव में जीत हासिल की और पीवी नरसिम्हा राव की तत्कालीन केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री बने। इसी साल, अजित अपने परिवार के गढ़ बारामती विधानसभा सीट से मैदान में उतरे और विधायक चुने गए. और 8 बार इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। साल 1991 के उपचुनाव में यहां से जीत हासिल करने के बाद वह लगातार इसी सीट से चुनाव लड़ते रहे और हर बार जीत भी हासिल की।

शरद पवार के सियासी वारिस बनकर उभरे
अजित पवार ने अपनी मेहनत और लगन के बाद खुद को शरद पवार के सियासी वारिस के तौर पर महाराष्ट्र में स्थापित किया। महाराष्ट्र की राजनीति पर अपनी पकड़ मजबूत बना ली, इसके बाद साल 1995 में वो पहली बार पुणे जिले में बारामती विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से विधायक बने। इसके बाद से वो लगातार इस निर्वाचन क्षेत्र के विधायक चुने जाते रहे, उन्होंने साल 1995, 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में विधायक बने. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में खुद को स्थापित ही नहीं किया बल्कि अपनी पकड़ भी बनाई।
विधायक से डिप्टी सीएम तक का सियासी सफर
अजित पवार ने अपने 45 साल के सियासी सफर में एक बार सांसद और सात बार विधायक रहे। उन्होंने खुद को महाराष्ट्र के राजनीति तक सीमित रखा। सरकार में रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्री पद संभालने का तजुर्बा है, उन्होंने राज्य सरकार में कृषि, ऊर्जा और योजना राज्य मंत्री के रूप में काम किया, उन्होंने सुधाकर नाइक की सरकार में कृषि और बिजली राज्य मंत्री के रूप में काम किया, इसके बाद जब उनके चाचा शरद पवार 1992 और 1993 में मुख्यमंत्री बने तो उन्हें मंत्री बनाया गया। साल 1999 में जब कांग्रेस और एनसीपी सत्ता में आई तो उन्हों विलासराव देशमुख की सरकार सिंचाई मंत्री का कार्यभार सौंपा गया। वहीं, साल 2003-2004 में सुशील कुमार शिंदे की सरकार में उन्हें ग्रामीण विकास का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। इसके बाद उपमुख्यमंत्री बने।
6 बार महाराष्ट्र के बने उपमुख्यमंत्री
कई विभागों में मंत्री रहने वाले अजित पवार साल 2010 में पहली बार राज्य के उपमुख्यमंत्री बने। वह राज्य के 8वें उपमुख्यमंत्री रहे और कुल 6 बार इस पद पर बने. वह करीब 8 साल तक इस पद पर रहे। अजित पवार कुल 6 बार उपमुख्यमंत्री बने. इसमें वह 2-2 बार पृथ्वीराज चव्हाण और देवेंद्र फडणवीस के कार्यकाल में उपमुख्यमंत्री रहे। इसके अलावा वह उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के कार्यकाल में भी उपमुख्यमंत्री बने। बारामती से लगातार चुनाव लड़ने के बाद भी उनकी लोकप्रियता बनी रही। साल 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने 1.65 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की. 2024 के चुनाव में उनका अंतर एक लाख (100,899) से अधिक वोटों का रहा।
एक साल में दो बार बने डिप्टी सीएम
साल 2019 के बाद अजित पवार की राजनीतिक करियर काफी दिलचस्प रही। उन्होंने 2019 में दो अलग-अलग मुख्यमंत्री के अधीन उपमुख्यमंत्री की शपथ ली। 23 नवंबर की सुबह उन्होंने देवेंद्र फडनवीस के साथ उपमुख्यमंत्री की शपथ ली। लेकिन, सदन में फडनवीस बहुमत साबित करने में नाकाम रहे। इसके बाद उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री की शपथ ली तो उन्हें एक बार फिर उपमुख्यमंत्री बनाया गया। अब साल 2023 में वो एक बार फिर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने हैं, वो अबतक छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बन चुके हैं। अजित पवार पहली बार साल 2010 के नवंबर महीने में उपमुख्मंत्री बने, इसके बाद साल 2010 में वो दूसरी बार उपमुख्यमंत्री बने। 2019 में फडणवीस के साथ डिप्टीसीएम बने और फिर उद्धव ठाकरे के अगुवाई में महाविकास अघाड़ी की सरकार बनी तो उसमें भी डिप्टीसीएम रहे. इसके बाद 2023 में शरद पवार के बगावत कर शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में डिप्टीसीएम बने। 2024 में छठी बार डिप्टीसीएम बने।
यह भी पढ़ेंः- ‘एक मूर्ख की वजह से देश इतना नुकसान नहीं झेल सकता…,’ किरेन रिजिजू का राहुल गांधी पर करारा वार, बोले- अब हर बिल पास कराएगी सरकार
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक


