महाराष्ट्र की राजनीति में ‘वक्त’ को अपनी मुट्ठी में रखने वाले अजित पवार की जीवन-घड़ी बुधवार सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर हमेशा के लिए ठहर गई. बारामती एयरपोर्ट के पास हुए एक भीषण विमान हादसे ने न केवल सूबे के डिप्टी सीएम, बल्कि उनके साथ सवार चार अन्य लोगों को भी मौत की आगोश में सुला दिया. यह हादसा महज एक दुर्घटना है या इसके पीछे कोई बड़ी तकनीकी चूक या साजिश, इसे लेकर अब देश की सियासत और जांच एजेंसियां आमने-सामने हैं. अजित पवार की अंतिम पहचान उनके हाथ में बंधी उस घड़ी से हुई, जो न केवल उनका व्यक्तिगत शौक था, बल्कि उनकी पार्टी का चुनाव चिन्ह भी था. नियति ने उनके शव की पहचान भी वक्त बताने वाली उसी घड़ी से कराई.

बुधवार सुबह जब बारामती के पास विमान के मलबे से लपटें उठ रही थीं, तब पहचान करना भी मुश्किल था. प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों के अनुसार,अजित पवार की अंतिम पहचान उनके हाथ में बंधी उस घड़ी से हुई, जो न केवल उनका व्यक्तिगत शौक था, बल्कि उनकी पार्टी का चुनाव चिन्ह भी था.

गुरुवार सुबह 11 बजे बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. गृह मंत्री अमित शाह भी अंतिम संस्कार में शामिल होंगे. 

शुरुआती जांच में विमान को पूरी तरह एयरवर्थी बताया गया है, पायलट अनुभवी थे, कोई MAYDAY कॉल नहीं गया, फिर भी हादसा हुआ. ऐसे में हादसे की जांच अब उन अंतिम सात मिनटों पर सिमट गई है, उड़ान सामान्य थी, मौसम में कोई चेतावनी दर्ज नहीं थी.

करीब 8:37 बजे विमान पहली बार रडार से गायब हुआ. दो मिनट बाद 8:39 बजे वह दोबारा रडार पर दिखाई दिया. फ्लाइटराडार-24 के आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान विमान ने ‘गो-अराउंड मैन्यूवर’ किया यानी लैंडिंग को बीच में छोड़कर दोबारा ऊंचाई ली. 8 बजकर 38 मिनट 18 सेकंड पर पहली लैंडिंग की कोशिश हुई, लेकिन खराब दृश्यता के कारण विमान रनवे पर नहीं उतर पाया. 8 बजकर 38 मिनट 45 सेकंड पर पायलट गो-अराउंड का फैसला लेते हैं. विमान उसी दिशा में लौटता है, जिस दिशा से पहले आया था.

फिर आता है निर्णायक क्षण. 8:42 AM: पायलटों ने एटीसी को सूचित किया कि कम दृश्यता के कारण रनवे दिखाई नहीं दे रहा है. 8 बजकर 43 मिनट 11 सेकंड पर विमान दूसरी बार रनवे की ओर अप्रोच करता है. पायलट कहते हैं- ‘रनवे इन साइट’. एटीसी ने रनवे-11 पर लैंडिंग की क्लीयरेंस दी. 8 बजकर 44 मिनट पर विमान रनवे के थ्रेशोल्ड (शुरुआती बिंदु) के पास पहुंचा, लेकिन अचानक गोता लगाकर बगल की खाई में जा गिरा और धमाके के साथ आग के गोले में तब्दील हो गया.

सिविल एविएशन मंत्रालय का कहना है कि उस समय दृश्यता लगभग 3,000 मीटर थी. लेकिन प्रत्यक्षदर्शी, पायलटों का एटीसी से संवाद और फ्लाइट डेटा यह संकेत देते हैं कि रनवे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी. इसलिए पायलटों को पूरी तरह अपनी आंखों पर निर्भर रहना पड़ता है. 

AAIB और DGCA ने संयुक्त रूप से जांच शुरू कर दी है. फॉरेंसिक टीमें मलबे के हर टुकड़े, एटीसी लॉग, फ्लाइट डेटा रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं.

पहला और सबसे बड़ा एंगल मौसम का है. सवाल यह है कि अगर दृश्यता 3,000 मीटर थी, तो पायलटों ने रनवे न दिखने की बात क्यों कही? विशेषज्ञ मानते हैं कि हवा में दृश्यता और जमीन की दृश्यता अलग-अलग होती है.

प्रारंभिक जांच में साफ किया गया है कि विमान 100 प्रतिशत एयरवर्थी था. एयरवर्थिनेस सर्टिफिकेट वैध था, कोई तकनीकी खराबी दर्ज नहीं की गई. पायलट-इन-कमांड सुमित कपूर के पास 15,000 घंटे का अनुभव था, को-पायलट सांभवी पाठक के पास 1,500 घंटे का अनुभव. दोनों मेडिकल रूप से फिट थे.

फिर भी सवाल उठता है कि क्या आखिरी सेकंड में कोई सिस्टम फेल हुआ? क्या ऊंचाई या स्पीड का गलत अनुमान हुआ? या फिर टेबल-टॉप रनवे का भ्रम तकनीक पर भारी पड़ा?

तीसरा एंगल सबसे संवेदनशील है मानवीय गलती. क्या पायलटों ने रनवे की दूरी का गलत आकलन किया? क्या गो-अराउंड के बाद दोबारा अप्रोच जल्दबाजी में की गई? क्या रनवे दिखाई देने का भ्रम हुआ?

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