पर्यावरण संरक्षण बोर्ड ने एनएमडीसी को दिया माइनिंग का कंसेंट, बैठक में शामिल नहीं होते मंत्री – मोहम्मद अकबर

रायपुर.  वन एवं पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर ने बैलाडीला में  माइनिंग की सहमति देने के मसले पर कहा है कि सहमति पर्यावरण विभाग ने नहीं दी थी. बल्कि पर्यावरण संरक्षण बोर्ड ने दी थी. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण बोर्ड केंद्र सरकार की जल एवं वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम के तहत गठित एक स्वायतशासी संस्था है. जिसकी कार्रवाई अलग से चलती है. बोर्ड के फैसले अलग से होते हैं. चूंकि ये एक स्वतंत्र इकाई है इसलिए इनकी बैठकों में मंत्री शामिल नहीं होते.

उन्होंने कहा कि जो जानकारी उन्हें पर्यावरण संरक्षण मंडल से मिली है उसके मुताबिक माह अप्रेल में माइनिंग हेतु संचालन सम्मति बोर्ड में दिया गया था. लेकिन ये कंसेट केन्द्र सरकार के उपक्रम एनएमडीसी एवं सीएमडीसी के संयुक्त उपक्रम के नाम से जारी किया गया था न कि किसी प्राइवेट कंपनी को.

गौरतलब है कि पर्यावरण संरक्षण बोर्ड द्वारा जारी इस सहमति को आधार बनाकर दो-दो पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और डॉक्टर रमन सिंह ने सरकार पर हमला बोला है. अजीत जोगी ने इस मामले में अकबर के विभागों को लेकर आरोप लगाया. जिस पर अकबर ने एक बार फिर दोहराया है कि इस पूरे मसले में न तो उन्होंने किसी प्रकार की कोई सहमति दी है न ही उनके समक्ष इस पूरे मसले पर कोई फाइल आई थी.

अकबर ने एक बार फिर दोहराया है कि उन्होंने वन काटने की अनुमति या सहमति कभी नहीं दी है. अकबर ने दस्तावेज़ पेश करके बताया कि पेड़ों की काटने की अनुमति रमन सिंह की सरकार ने जनवरी 2018 में दी थी.

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