लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने समाजवादी पार्टी के समय में बने मेडिकल कॉलेज, कैंसर इंस्टीट्यूट व अन्य अस्पतालों की जानबूझकर अनदेखी की है। भाजपाइयों ने अपने समय में बने मेडिकल कॉलेजों की बिल्डिंग खड़ी करने में केवल कमीशन खाया है लेकिन उन्हें चलाया नहीं है।

आम अस्पतालों की पूरी तरह उपेक्षा

मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल, ट्रामा सेंटर बिना स्टॉफ के पड़े हैं। भाजपाइयों ने अपने कार्यालय, और मुख्य भाजपाई जी ने अपनी आयुष यूनिवर्सिटी तो खोल ली है परंतु जनहित में काम करने वाले आम अस्पतालों की पूरी तरह उपेक्षा की है।

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उनका विभाग ‘हाता नहीं भाता’

अखिलेश ने कहा कि रही बात स्वास्थ्य मंत्री की तो ये समझ लेना चाहिए कि वो खुद और उनका विभाग ‘हाता नहीं भाता’ की मुख्य-नीति के विस्तार के कारण, उन्हीं की तरह उपेक्षित है और अगले मंत्रिमंडल विस्तार में उनसे विभाग छीनने का आधार बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय और विभाग की ऐसी दुर्गति देखकर हर कोई, ये सहज रूप से स्वीकार भी कर लेगा कि सच में स्वास्थ्य मंत्री महोदय की लापरवाही और कमीशनखोरी की वजह से प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं की इतनी दुर्दशा हुई है।

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वो नेम प्लेट पर ही मंत्री हैं

जबकि सच ये है कि उन बेचारों के हाथ में पैसों के हिस्से बाँट के अलावा और कुछ अधिकार या दूसरी शक्ति, सामर्थ्य और अख्तियार नहीं है। स्वास्थ्य-चिकित्सा विभाग में वो नेम प्लेट पर ही मंत्री हैं, कोई उनकी सुनता भी नहीं है। सुना है उन्होंने अपने मोबाइल में एक रिमाइंडर लगा रखा है, जो रोज सुबह उन्हें याद दिलाता है कि वो स्वास्थ्य मंत्री हैं। जानेवालों के बारे में अब और क्या कहा जाए, थोड़े लिखे को ही पूरा समझा जाए, उनका ‘हाता से जो पुराना नाता है’, शायद उसीकी वजह से बंद हो रहा उनका खाता है। भाजपा जाए तो सेहत सुधर पाए।