Amalaki Ekadashi 2026 : आज 27 फरवरी को फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है. जिसे पद्मपुराण में आमलकी एकादशी कहा गया है. पुराणों के अनुसार यह तिथि अत्यंत पुण्यदायी मानी गई है. भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था कि आमलकी एकादशी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है. इस व्रत के पुण्य से मनुष्य समस्त पापों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करता है.

आंवले के वृक्ष की पूजा

आमलकी एकादशी को आंवला एकादशी और रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है. इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा का विशेष विधान है. मान्यता है कि फाल्गुन शुक्ल एकादशी को आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति हुई थी. सृष्टि की रचना के समय भगवान विष्णु से दिव्य बीज उत्पन्न हुआ. जिससे आमलकी वृक्ष प्रकट हुआ. पद्म पुराण के अनुसार आंवले के वृक्ष के मूल में भगवान विष्णु, ऊपर ब्रह्मा, तने में भगवान शिव का वास माना गया है. शाखाओं में मुनि, टहनियों में देवता, पत्तों में वसु, फूलों में मरुद्गण और फलों में प्रजापति निवास करते हैं.

इस दिन कथा सुनने का महत्व

कथा के बिना एकादशी व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता. आंवले के वृक्ष की पूजा, स्पर्श और सेवन को पुण्यदायी बताया गया है. आंवले के वृक्ष की पूजा के साथ 28 परिक्रमा करने का विधान भी बताया गया है. व्रत से मोक्ष और गोदान के समान पुण्य प्राप्ति होता है.