American Share market: अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा पारस्परिक टैरिफ की घोषणा के बाद, अमेरिकी शेयर बाजार सूचकांक डाउ जोंस 3 अप्रैल को 1,679 अंक (3.98%) गिरकर 40,545 पर बंद हुआ. इसी समय, एसएंडपी 500 सूचकांक 274 अंक (4.84%) गिरकर 5,450 पर बंद हुआ. नैस्डैक कंपोजिट सबसे अधिक 1,050 अंक (5.97%) की गिरावट के साथ बंद हुआ.

नाइकी, बोइंग, एप्पल और अमेजन जैसी कंपनियों के शेयरों में 15% तक की गिरावट आई. एयरलाइंस, कपड़े, रिटेल, टेक्नोलॉजी, बैंक समेत सभी सेक्टर के शेयरों में गिरावट आई.

US market का market cap करीब 2 trillion dollars घटा

इस गिरावट के कारण अमेरिकी शेयर बाजार का मार्केट कैप करीब 2 ट्रिलियन डॉलर (170 लाख करोड़ रुपए) घट गया. 2 अप्रैल को एसएंडपी 500 इंडेक्स का मार्केट कैप 47.681 ट्रिलियन डॉलर था, जो 3 अप्रैल को घटकर करीब 45.917 ट्रिलियन डॉलर रह गया है.

अमेरिकी बाजार में गिरावट के 3 कारण

कंपनियों को मुनाफे में कमी का डर: अमेरिका ने सभी आयातित वस्तुओं पर 10% न्यूनतम टैरिफ और कुछ देशों पर इससे भी अधिक टैरिफ (जैसे चीन पर 34%, वियतनाम पर 46%) लगाने की घोषणा की है. इससे वहां से आने वाले सामानों की कीमत बढ़ जाएगी. इससे कंपनियों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर उनके मुनाफे पर पड़ेगा. मुनाफे में कमी के डर से निवेशकों ने शेयर बेचना शुरू कर दिया है, जिससे बाजार में गिरावट आई है.

वैश्विक व्यापार युद्ध का डर: अमेरिका द्वारा टैरिफ की घोषणा के बाद अन्य देश भी जवाबी टैरिफ लगा सकते हैं. उदाहरण के लिए, अगर भारत पर 26% टैरिफ है, तो भारत भी अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ा सकता है. इससे वैश्विक व्यापार में व्यवधान पैदा हो सकता है, जिसका असर आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ेगा. इस अनिश्चितता के कारण निवेशक घबरा गए हैं और उन्होंने शेयर बाजार से पैसे निकालने शुरू कर दिए हैं.

आर्थिक मंदी की चिंता: टैरिफ के कारण अगर सामान महंगा हुआ तो लोग कम खरीदेंगे, जिससे अर्थव्यवस्था की गति धीमी हो सकती है. साथ ही मांग कम होने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट आई है (यूएस क्रूड 69.63 डॉलर प्रति बैरल). यह कमजोर आर्थिक गतिविधि का संकेत है. इससे निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है और बाजार में गिरावट तेज हो गई है.