आदित्य मिश्र, अमेठी. तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में उस वक्त हल्की मुस्कान और गंभीरता दोनों एक साथ देखने को मिलीं, जब एक युवक जिलाधिकारी के सामने पहुंचा और बोला- “DM साहब, नौकरी बाद में देख लेंगे, पहले एक घर दिला दीजिए, ताकि शादी हो जाए.”

गंगागंज मोहल्ला, सरवनपुर निवासी शान मोहम्मद ने शिकायती पत्र सौंपते हुए बताया कि उसके पास न जमीन है और न ही पक्का मकान. इसी घर की कमी के चलते उसकी दो शादियां पहले ही टूट चुकी हैं. अब तीसरी बार रिश्ता तय हुआ है, लेकिन बिना छत के रिश्ता भी डगमगा रहा है. युवक का कहना है कि आजकल रिश्ते दिल से कम और घर से ज्यादा जुड़ते हैं. जैसे ही लड़की पक्ष को पता चलता है कि अपना मकान नहीं है, बात सीधे “हम बाद में फोन करेंगे” पर आकर रुक जाती है.

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शान मोहम्मद ने प्रशासन से मांग की कि अगर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक घर मिल जाए तो उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी फाइल भी क्लोज हो जाएगी. युवक की बात सुनकर जनसुनवाई में मौजूद अधिकारी भी मुस्कुरा उठे, लेकिन मामले की गंभीरता को समझते हुए जिलाधिकारी संजय चौहान ने उपजिलाधिकारी आशीष सिंह को पूरे प्रकरण की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए.