पटना। बिहार के मोकामा से पूर्व विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह के परिवार के लिए राहत की खबर आई है। पटना हाईकोर्ट ने उनके दो भतीजों, राजवीर और कर्मवीर, को दुलारचंद हत्याकांड में अग्रिम जमानत दे दी है। निचली अदालत से अर्जी खारिज होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पलटा पूरा मामला
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि राजवीर और कर्मवीर ने दुलारचंद को जबरन गाड़ी से खींचकर गोली मारी थी। हालांकि, बचाव पक्ष के वकील कुमार हर्षवर्धन ने जस्टिस प्रभात कुमार सिंह की अदालत में दलील दी कि पुलिस की कहानी मेडिकल रिपोर्ट से मेल नहीं खाती।
- दावा: गोली मारकर हत्या की गई।
- हकीकत: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, मौत का कारण (किसी ठोस वस्तु से चोट लगना) बताया गया, न कि गोलीबारी।
- इसी विरोधाभास को आधार मानते हुए अदालत ने दोनों को जमानत दे दी।
अनंत सिंह की रिहाई के बाद बढ़ी हलचल
गौरतलब है कि इसी मामले में करीब एक सप्ताह पहले खुद अनंत सिंह भी जेल से बाहर आ चुके हैं। जेल से छूटने के बाद उन्होंने समर्थकों के साथ बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया था। पुलिस इस मामले में हत्या का स्पष्ट कारण और ठोस सबूत पेश करने में विफल रही, जिसके चलते कोर्ट ने बाहुबली नेता को 15-15 हजार रुपये के बेल बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश दिया था।
कोर्ट द्वारा जमानत देने के 4 मुख्य आधार
- अदालत ने केस डायरी और साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद पाया कि पुलिस का पक्ष कमजोर है:
- साक्ष्यों का अभाव: प्रत्यक्षदर्शी और सबूत कानूनी कसौटी पर कमजोर साबित हुए।
- बयानों में विरोधाभास: गवाहों द्वारा दिए गए बयानों में काफी अंतर पाया गया।
- संदेहास्पद परिस्थितियां: घटनास्थल का निरीक्षण और घटना का क्रम संदेहास्पद लगा।
- कमजोर केस डायरी: पुलिस की केस डायरी अदालत में अपराध सिद्ध करने के लिए निर्णायक नहीं रही।
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