Odisha News: भुवनेश्वर। ओडिशा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन राज्य की आंगनबाड़ी व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई, जिसमें ढांचे की खामियां प्रमुख मुद्दा रहीं. प्रश्नोत्तर काल में बीजद विधायक अश्विनी पात्रा के सवाल का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री प्रभाती परिडा ने सदन को जानकारी दी कि प्रदेश के 20,150 आंगनबाड़ी केंद्र आज भी अपनी इमारतों के बिना संचालित हो रहे हैं. यह आंकड़ा राज्य में शुरुआती बाल विकास सेवाओं के बुनियादी ढांचे की गंभीर स्थिति को दिखाता है.

कुल 74,224 आंगनबाड़ी केंद्र

उन्होंने बताया कि फिलहाल ओडिशा में कुल 74,224 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनमें से 54,074 केंद्र अपनी इमारतों से चल रहे हैं. बाकी केंद्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं अपनाई गई हैं-कुछ स्कूलों में चल रहे हैं, कुछ सामुदायिक भवनों में, जबकि कई अभी भी किराए की जगहों में काम कर रहे हैं. सरकार का कहना है कि जहां भी जमीन उपलब्ध नहीं है, वहां पंचायत राज संस्थाओं की मदद से भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है ताकि प्रत्येक केंद्र का अपना भवन बन सके.

आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में काम जारी

सदन को यह भी बताया गया कि राज्य सरकार लगातार आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है. पिछले वर्षों में 12,144 केंद्रों को पूर्ण विकसित आंगनबाड़ी केंद्रों में बदला गया है, जबकि 2024-25 वित्तीय वर्ष में 5,056 केंद्रों का निर्माण पूरा कर लिया गया. इसके अलावा पूरक बजट में 10,900 नए केंद्रों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिससे भवनहीन केंद्रों की संख्या में भारी कमी आने की उम्मीद है. 

प्रभाती परिडा ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि ओडिशा के प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सुचारु और सुसज्जित आंगनबाड़ी सेवाएं मिलें. इसके लिए निर्माणाधीन केंद्रों को तेजी से पूरा किया जा रहा है और जिन स्थानों पर भवन नहीं हैं, वहां जल्द ही स्थायी संरचना उपलब्ध कराई जाएगी.