राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्यप्रदेश में पशुपालन विभाग के एक अजीब फरमान ने सभी कलेक्टरों से माथे पर चिंता की लकीरें खिंच दी है। दरअसल विभाग ने सभी अनुपयोगी सांडों की नसबंदी का आदेश दिया है। विभाग ने प्रदेश के सभी कलेक्टर को पत्र लिखकर सांडों की जल्द से जल्द नसबंदी करने का आदेश दिया है। पत्र में 23 अक्टूबर से नसबंदी अभियान को चलाने का आदेश दिया है। विभाग ने जो फरमान जारी किया है, उसके मुताबिक गौशालाओं के साथ पशुपालकों के सांडों की भी नसबंदी का आदेश दिया गया है।

अब कलेक्टरों को ये समझ में नहीं आ रहा कि इतने कम समय में सांडों की नसबंदी कैसे शुरू हो सकती है। सांडों को इतने कम समय में ढूढेंगे कहां। साथ ही कैसे पता चलेगा कि कौन सा सांड अनुपयोगी है। फिलहाल विभाग के निर्देश पर कलेक्टर्स ने नसबंदी अभियान के लिए जिला पंचायत सहित नगरीय निकायों को दिए आदेश।

12 लाख सांडों की नसबंदी पर 12 करोड़ खर्च होने का अनुमान 
एक अनुमान के मुताबिक प्रदेश में लगभग 12 लाख सांड हैं। इतने सांडों की नसबंदी पर करीब 12 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। विभाग ने अभियान में जिला पंचायत सहित नगरीय निकायों से भी सहयोग के निर्देश दिए हैं।

संस्कृति बचाओ मंच उतरा विरोध में
वहीं प्रदेश में सांडों की नसबंदी का मामला गरमा गया है। संस्कृति बचाओ मंच विभाग के आदेश के विरोध में उतर गया है। मंच संयोजक चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि सरकार से हमारी मांग नसबंदी रोकने की है। गौवंश हमारी संस्कृति है। गौवंश समाप्त हुआ तो हमारी संस्कृति समाप्त हो जाएगी।विभाग तुरंत आदेश वापस ले, नहीं तो संस्कृति बचाओ मंच सड़क पर उतरेगा।