Anta By-Election 2025: बारां जिले की अंता विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया है। चुनाव की सियासी बिसात त्रिकोणीय रूप ले चुकी है, जहां भाजपा, कांग्रेस और एक निर्दलीय उम्मीदवार अपने-अपने सामाजिक समीकरण साधने में लगे हैं। करीब 2.25 लाख मतदाताओं वाली इस सीट पर जातिगत गणित ही इस बार निर्णायक साबित होगा।

अंता में माली समाज के लगभग 40 हजार, अनुसूचित जाति के 35 हजार और मीणा समुदाय के 30 हजार मतदाता हैं, जो इस चुनाव की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा धाकड़, ब्राह्मण, बनिया और राजपूत समाज के वोट भी निर्णायक हो सकते हैं।
क्षेत्र में माली समाज बहुल है, लेकिन अकेले उनके वोट से जीत संभव नहीं है। माली और मीणा वोट जिस दल के साथ एकजुट होते हैं, वही इस बार जीत हासिल करेगा। भाजपा को परंपरागत रूप से माली और शहरी वोटों का समर्थन मिलता रहा है, जबकि कांग्रेस मीणा और एससी समुदाय के भरोसे पर निर्भर रही है। पूर्व विधायक प्रमोद जैन भाया इस बार भी मैदान में हैं और जातीय खींचतान ही मुकाबले की दिशा तय करेगी।
भाजपा ने मोरपाल सुमन के माध्यम से स्थानीय और माली समीकरण साधने की कोशिश की है, वहीं निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा दोनों ही दलों के वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
अंता में चुनाव हमेशा जातीय संतुलन और उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ पर टिका रहा है। बिजली, पानी, सड़क और स्थानीय रोजगार जैसे मुद्दे चर्चा में आते हैं, लेकिन वोटिंग के समय जातिगत जोड़-घटाव ही निर्णायक साबित होते हैं। इस बार भी सियासी बिसात बिछ चुकी है, मोहरे सज चुके हैं, अब आखिरी चाल जनता ही चलने वाली है।
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