हेमंत शर्मा, इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों और बीमारियों के बाद अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमों में हलचल तेज हो गई है। इलाके में एंटीबैक्टीरियल टीम घर-घर पहुंचकर लोगों की जानकारी जुटा रही है। यह पूरा सर्वे ICMR की विशेष KABO टूल किट के जरिए किया जा रहा है, जिसमें हर परिवार से बीमारी, लक्षण, पानी के उपयोग और स्वास्थ्य स्थिति से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं।
टीम का मकसद यह पता लगाना है कि दूषित पानी से किस स्तर पर लोग प्रभावित हुए हैं और किन घरों में संक्रमण का खतरा ज्यादा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस डेटा के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। इसी बीच एम्स के डॉक्टर भी अब मामले में सक्रिय हो गए हैं। एम्स की विशेषज्ञ टीम यह जांच करने में जुटी हुई है कि भागीरथपुरा के पानी में आखिर किस तरह का बैक्टीरिया मौजूद है, जो लोगों की जान ले रहा है और बड़ी संख्या में लोगों को बीमार कर रहा है।
पानी के सैंपल लेकर उनकी गहन जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संक्रमण का असली कारण क्या है। स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रभावित क्षेत्र में लोगों को ओआरएस के घोल, जिंक की गोलियां और पानी को साफ करने के लिए क्लोरीन भी वितरित कर रही है। लोगों को समझाया जा रहा है कि पानी उबालकर ही इस्तेमाल करें और किसी भी तरह के लक्षण नजर आते ही तुरंत अस्पताल से संपर्क करें। स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ खास बातचीत में अधिकारियों ने बताया कि हालात गंभीर हैं, लेकिन अब हर स्तर पर निगरानी की जा रही है।
भागीरथपुरा में फिलहाल डर का माहौल बरकरार है। एक तरफ घर-घर सर्वे और दवाइयों का वितरण चल रहा है, तो दूसरी तरफ लोग अब भी साफ पानी और जिम्मेदारों पर कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
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