सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली दंगा 2020 के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने के बाद जेएनयू में तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) कैंपस में कल सोमवार की रात साबरमती हॉस्टल के बाहर जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) की ओर से प्रदर्शन किया गया, जिसमें पीएम मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ ‘कब्र खुदेगी’ जैसे आपत्तिजनक नारे लगाए गए।
इस घटना पर सियासत भी शुरू हो गई है। लालू यादव के बड़े बेटे और जजद के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने JNU कैंपस में PM मोदी और अमित शाह के खिलाफ हुई नारेबाजी पर कहा कि, जो प्रदर्शन कर रहे हैं, वो नासमझ हैं। प्रधानमंत्री के बारे में इस तरह के शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। हम चाहते हैं कि छात्र इस तरह की भाषा का प्रयोग ना करें क्योंकि युवा देश का भविष्य हैं…जो कार्रवाई हो रही है, उसको सरकार देख रही है।
भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने इस मुद्दे पर कहा- “JNU में देश विरोधी ताकतें भारत का अपमान कर रही हैं। मोदी जी और अमित शाह जी के खिलाफ नारे लगाने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए। जिस तरह से नारे लगाए गए, उससे पता चलता है कि ये लोग छात्रों के भेस में नक्सली बन गए हैं।”
वहीं, RJD सांसद मनोज झा ने कहा कि, मैं स्पष्ट तौर पर एक बात कहूं तो हम सब आहत हुए थे। एक-दो बातें बहुत चिंताजनक हैं, किसी को बिना ट्रायल के इतने सालों तक जेल में कैसे रखा जा सकता है, ताकि इसे सहनशक्ति की आखिरी परीक्षा माना जाए, और तभी उनके संवैधानिक अधिकार एक्टिवेट हों?
उन्होंने कहा कि, व्यक्तिगत तौर पर मैं मुर्दाबाद के नारों का विरोधी हूं, और इसलिए ऐसे नारों की एक सभ्य लोकतंत्र में कोई जगह नहीं है। लेकिन यह चयनात्मक गुस्सा क्या है? जब बिहार की लड़कियों के बारे में कुछ कहा गया, तो किसी ने कोई गुस्सा क्यों नहीं दिखाया? हमारे लोकतंत्र में यह अस्वस्थ होने वाले लक्षण है।
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