“दैहिक दैविक भौतिक तापा। रामराज नहिं काहुहि व्यापा॥”
अर्थात रामराज्य में किसी को भी दैहिक यानी शारीरिक, दैविक यानी प्राकृतिक और भौतिक यानी सामाजिक-आर्थिक कष्ट नहीं होता। हर ओर शांति और संतुलन का वातावरण होता है। रामचरितमानस की यह चौपाई देश के कई राज्यों के लिए प्रासंगिक है। नक्सलवाद पर काबू पाने के बाद छत्तीसगढ़ भी उन राज्यों में शामिल हो गया है।
छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र दशकों तक नक्सलवाद की आग में झुलसता रहा। एक समय था जब बंदूक की गूंज, भय का वातावरण और विकास से दूरी ही यहां की पहचान बन चुकी थी। लेकिन आज एक सुविचारित रणनीति, राजनीतिक इच्छाशक्ति और जमीनी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप राज्य में उल्लेखनीय बदलाव आया है। बस्तर की तस्वीर और तकदीर बदल रही है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दूरदर्शी नेतृत्व और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की सक्रिय पहल ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक और सार्थक मोर्चा खोला। 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को समाप्त करने के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और अब इसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं।

सुरक्षा और रणनीति का अचूक संतुलन
नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई केवल बंदूक से नहीं जीती जा सकती थी। यह एक बहुआयामी समस्या थी, जिसमें सामाजिक, आर्थिक और वैचारिक पहलुओं का गहरा प्रभाव था। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने “सुरक्षा और विकास” के दोहरे दृष्टिकोण को अपनाया।
सुरक्षा बलों ने सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर नक्सलियों के ठिकानों पर प्रभावी कार्रवाई की और उनके वित्तीय नेटवर्क को भी ध्वस्त किया। इससे नक्सली संगठनों की कमर टूटने लगी। साथ ही आत्मसमर्पण नीति को प्रभावी बनाया गया।
2025 में 2000 से अधिक नक्सलियों का मुख्यधारा में लौटना इसका प्रमाण है। ‘लोन वर्राटू’ (घर वापस आइए) अभियान के तहत कई कुख्यात नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें रामधेर मज्जी, पापा राव, भूपति उर्फ अभय, टी. वासुदेव राव, लोकेश उर्फ पोडियाम भीमा, रमेश उर्फ कलमू केसा, मड़काम हुंगा, कवासी मासा और बामन मड़काम शामिल हैं।
अक्टूबर 2025 में 170 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिनमें कई वरिष्ठ ऑपरेटिव शामिल थे। कई महिला नक्सलियों ने भी आत्मसमर्पण किया, जिनमें 5 लाख की इनामी शमिला उर्फ सोमली कवासी और गंगी उर्फ रोहनी बारसे शामिल हैं। अधिकांश आत्मसमर्पण बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर क्षेत्रों से हुए हैं।

विकास की कमी से मिला नक्सलियों को आधार
नक्सलवाद के प्रमुख कारणों में विकास का अभाव प्रमुख रहा। वर्षों तक बस्तर के नक्सल प्रभावित गांवों में सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाईं। नक्सलियों ने इसी कमी का फायदा उठाया।
अब यह परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। बस्तर में 118 एकड़ में विकसित हो रहा औद्योगिक क्षेत्र रोजगार के अवसर प्रदान करेगा। 3500 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाएं इन क्षेत्रों को देश की मुख्य आर्थिक धारा से जोड़ रही हैं।
स्वास्थ्य केंद्रों का पुनर्निर्माण, बंद पड़े स्कूलों का संचालन, बैंकिंग सेवाओं का विस्तार और मोबाइल नेटवर्क की पहुंच—इन सभी प्रयासों ने आदिवासी क्षेत्रों में ठोस बदलाव लाया है। अब बच्चे स्कूल जा रहे हैं, महिलाएं स्व-सहायता समूहों से सशक्त हो रही हैं और किसान बाजार से सीधे जुड़ रहे हैं।

“डबल इंजन” सरकार की भूमिका
केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय को “डबल इंजन सरकार” कहा जाता है। इस तालमेल ने नक्सल उन्मूलन अभियान को गति दी है। नीति निर्माण से लेकर क्रियान्वयन तक हर स्तर पर समन्वय देखने को मिला। अमित शाह का स्पष्ट विजन और विजय शर्मा की जमीनी रणनीति ने नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में ठोस परिणाम दिए हैं।

विचारधारा की लड़ाई में जीत
नक्सलवाद केवल हिंसा नहीं, बल्कि एक विचारधारा भी है। इसके खात्मे के लिए शिक्षा, जागरूकता और संवाद के माध्यम से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया गया। रोजगार के अवसर बढ़ाकर युवाओं को हिंसा के रास्ते से दूर किया जा रहा है।

आगे की चुनौतियां
हालांकि नक्सल उन्मूलन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, लेकिन यह मान लेना कि समस्या पूरी तरह समाप्त हो गई है, जल्दबाजी होगी। दुर्गम इलाकों में अभी भी नक्सली गतिविधियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
इसलिए जरूरी है कि विकास कार्यों की निरंतरता और पारदर्शिता बनी रहे। यदि विकास की गति धीमी पड़ी, तो असंतोष फिर से जन्म ले सकता है।
निष्कर्ष
आज छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चली लड़ाई के परिणामस्वरूप बंदूक की आवाजें मद्धम पड़ रही हैं और बस्तर के जंगलों में विकास की गूंज सुनाई दे रही है। यह केवल छत्तीसगढ़ की नहीं, बल्कि पूरे देश की सफलता की कहानी है।
“जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी।
सो नृप अवसि नरक अधिकारी॥”
अर्थात जिस राज्य में प्रजा दुखी हो, वह शासक पतन का भागी होता है। आज बस्तर “लाल गलियारा” से “विकास का गलियारा” बनने की ओर बढ़ रहा है।

लेखक – संदीप अखिल
सलाहकार संपादक
न्यूज़ 24 मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ / लल्लूराम डॉट कॉम

