बात 1989-90 की है, जब हम स्कूल से निकलकर कॉलेज में पहुंचे थे. उन दिनों कॉलेज में मित्रों के साथ देश में विद्यमान समस्याओं पर चर्चा के दौरान पहली बार नक्सलवाद शब्द सुना था. गूगल का जमाना नहीं था, इसलिये नक्सलवाद को जानने समझने के लिए बिलासपुर के एक लाइब्रेरी में जाकर पड़ताल किया, तो इतना ही पता चला कि इसकी शुरुआत 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से कानू सान्याल और चारू मजूमदार नामक क्रांतिकारी नेताओं ने की थी और नक्सलबाड़ी से शुरु होने के इस सशस्त्र आंदोलन को नक्सलवाद कहा जाता है. इसके तहत गरीबों और वंचितों को उनका अधिकार दिलाने के लिये सशस्त्र क्रांति करने की वकालत की गई थी. तब से लेकर 1998 तक देश के अलग-अलग इलाकों में घट रही नक्सल हिंसा को समाचारों में पढ़ता और देखता रहा.

गांव के चौराहे पर मंत्री की हत्या

1998 में पत्रकारिता के पेशे में आने के बाद अनुभव किया कि तत्कालीन मध्यप्रदेश के बालाघाट और बस्तर जिले में नक्सल हिंसा की छिटपुट घटना होती थी, लेकिन 1999 में नक्सलियों ने जब मध्यप्रदेश सरकार के वन और परिवहन मंत्री लिखी राम कांवरे की बीच सड़क में कुल्हाड़ी से हत्या की, तब मुझे लगा कि नक्सलवाद पूरे देश में कानून व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती है. पहली बार नक्सलियों ने किसी मंत्री को निशाना बनाया और उन्हें उनके घर से जगा कर घसीटते हुए सोनपुर गांव के चौराहे पर लेकर आये और गांव वालों के सामने ही उनकी नृशंस हत्या कर दी. हत्या के बाद नक्सलियों ने माओवाद जिंदाबाद का नारा लगाते हुए जश्न मनाया.

छत्तीसगढ़ बना नक्सल आंदोलन का केंद्र

सन 2000 में मध्यप्रदेश से अलग होने के बाद छत्तीसगढ़ धीरे-धीरे नक्सल आंदोलन का केंद्र बन गया. शुरुआती दिनों में बस्तर और सरगुजा अंचल में पैर जमाने के बाद नक्सल आंदोलन का कई जिलों तक विस्तार हो गया और नक्सली आए दिन बड़ी बड़ी वारदातों को अंजाम देकर समानांतर सरकार चलाने का दावा करने लगे. रिपोर्टर के रुप में मैंने इनमें से कुछ घटनाओं को कवर किया और जिम्मेदारों से इस खौफनाक समस्या के संबंध में सवाल भी किये, लेकिन उनके जवाबों से ऐसा कभी नहीं लगता था कि वो नक्सलवाद का अंत कर पाएंगे.

झीरम हमले में कांग्रेस नेताओं की एक पीढ़ी खत्म

2013 में झीरम घाटी हमले में छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेताओं की एक पीढ़ी खत्म हो गई. इतनी बड़ी घटना के बाद कुछ सालों तक नक्सलवाद पर केवल बहस चलता रहा, लेकिन इसे समूल नष्ट करने के लिये ठोस उपायों की कमीं दिखती रही. 2020 के बाद छत्तीसगढ़ में नक्सल घटनाओं में कमीं जरूर दिखने लगी थी, लेकिन समय-समय पर नक्सली अपनी मजबूत उपस्थिति दिखाकर सरकार के समक्ष चुनौती प्रस्तुत करते रहे.

नक्सलवाद खत्म करने की डेडलाइन तय

दो साल पहले जब केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म करने की डेडलाइन तय की, उस समय भी मुझे और मेरे ज्यादातर साथी पत्रकारों को इस बात की यकीन नहीं था कि कोई सरकार नक्सलवाद को खत्म कर सकती है. लेकिन समय आते-आते इस दिशा में तेजी से प्रगति दिखने लगी. डिड़मा सहित कई नक्सली नेताओं के मारे जाने और बड़े पैमाने पर नक्सलियों के सरेंडर होने से धीरे-धीरे विश्वास होने लगा था कि शायद तय सीमा में छत्तीसगढ़ और देश से नक्सलवाद का खात्मा हो जाए.

सालों पुरानी इस समस्या का हो गया अंत

खास तौर पर 2026 की शुरुआत से ही मन में बार बार ये सवाल आते थे कि क्या नियत तिथी तक देश से लाल आतंक का अंत हो पायेगा. इस इंतजार के बीच करीब-करीब रोज नक्सलियों के पस्त होने और सरेंडर करने संबंधी खबरें आने लगी और जब 30 मार्च को केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जब संसद में इस आशय की घोषणा की कि अब देश से सशस्त्र नक्सलवाद का अंत हो गया है, तब जाकर भरोसा होने लगा कि अब सालों पुरानी इस समस्या का अंत हो गया है. 31 मार्च 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है.

पशुपति से तिरूपति तक रेड कॉरिडोर

पशुपति से तिरूपति तक रेड कॉरिडोर की बातें अब अतीत की बातें लगने लगी है. अपने अनोखे जनजातीय संस्कृति के लिये पहचाने जाने वाले बस्तर के विकास की संकल्पना अब आकार लेते दिखेगी, ऐसी उम्मीद हम अब कर सकते हैं. बस्तर सहित नक्सल प्रभावित रहे इलाकों को संवारने की चुनौतियां बहुत कठिन हैं, लेकिन उतनी कठिन नहीं जितनी सशस्त्र नक्सलवाद को समाप्त करने की चुुनौती थी.

सशस्त्र बल के जवानों को मेरा सलाम

सशस्त्र नक्सलवाद खत्म करने के इस ऐतिहासिक दिन पर सूबे के मुखिया विष्णुदेव साय को बहुत बधाई, जिनके नेतृत्व में यह पुनीत कार्य सम्पन्न हुआ है. इस मौके पर उन हजारों जवानों की शहादत को नमन जिन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अपने प्राणों की आहुति दी. सशस्त्र बल के जवान जो पिछले कई सालों से सुदुर जंगलों में रहकर नक्सलवाद को कुचलने में अपनी भूमिका को बखूबी निभा रहें हैं, उन्हें भी मेरा सलाम.

लेखक- मनोज सिंह बघेल
एडोटोरियल डायरेक्टर
NEWS 24 मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़/लल्लूराम डॉट कॉम