हिंसक करार देकर नौकरी से वंचित किए गए एक युवक को दिल्ली हाईकोर्ट(Delhi High Court) से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने युवक को कांस्टेबल पद पर नियुक्त करने के आदेश दिए हैं। न्यायमूर्ति मधु जैन और न्यायमूर्ति नवीन चावला की खंडपीठ ने युवक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि उम्मीदवार ने भर्ती से जुड़े सभी मापदंड पूरे किए थे, इसके बावजूद पुलिस सत्यापन के दौरान एक ऐसे आपराधिक मामले के आधार पर उसकी नियुक्ति रद्द कर दी गई, जिसमें वह पहले ही बरी हो चुका था। अदालत ने स्पष्ट किया कि बरी हो चुके मामले के आधार पर किसी योग्य उम्मीदवार को नियुक्ति से वंचित करना उचित नहीं है।

पीठ ने कहा कि दस्तावेज़ों में यह उल्लेख किया गया था कि आरोपी की कथित हिंसक प्रवृत्ति के आधार पर उसकी नियुक्ति रद्द की जा रही है। इस पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि दो पक्षों के बीच मामूली कहासुनी के बाद हुई मारपीट को किसी व्यक्ति की “हिंसक प्रवृत्ति” का प्रमाण नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि कई बार परिस्थितिवश ऐसी घटनाएं हो जाती हैं। पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि संबंधित आपराधिक मामले में युवक पहले ही बरी हो चुका है। जब सक्षम अदालत ने उसे दोषमुक्त कर दिया है, तो उसके खिलाफ इस प्रकार की नकारात्मक टिप्पणी करना उचित नहीं है।

मामले में सभी गवाह मुकरे

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि संबंधित आपराधिक मामले में सभी गवाह मुकर गए थे, जिसके कारण आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया गया। इस पर पीठ ने स्पष्ट कहा कि किसी व्यक्ति का बरी होना अपने आप में उसे आरोपों के कलंक से मुक्त कर देता है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में गवाहों के मुकरने को आधार बनाकर नियुक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आए तथ्यों और निष्कर्षों को ही अंतिम और मान्य माना जाएगा।

2016 में आया था विज्ञापन

दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) ने सितंबर 2016 में दिल्ली पुलिस में भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था, जिसके तहत युवक ने कांस्टेबल पद के लिए आवेदन किया। इसी दौरान अक्तूबर 2016 में उसके खिलाफ दंगा और मारपीट से जुड़ी एक प्राथमिकी दर्ज की गई। हालांकि, चयन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही संबंधित अदालत ने युवक को इस मामले में बरी कर दिया।

इस बीच युवक ने भर्ती प्रक्रिया के तहत लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा और चिकित्सा परीक्षण सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर लिए थे। अंतिम चयन के दौरान पुलिस सत्यापन में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी सामने आई। इसके आधार पर कथित ‘प्रवृत्ति’ का हवाला देते हुए उसे दिल्ली पुलिस में भर्ती करने से इनकार कर दिया गया।

नियुक्ति पत्र 8 साल पहले का रहेगा

दिल्ली उच्च न्यायालय ने निर्देश दिए हैं कि पुलिस विभाग युवक को वर्ष 2018 में नियुक्त किए गए अन्य कांस्टेबलों के अनुरूप वेतन वृद्धि, वरिष्ठता क्रम और अन्य सेवा लाभ प्रदान करेगा। हालांकि, इस अवधि के आठ वर्षों का बकाया वेतन युवक को नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि वेतन वृद्धि पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार ही लागू होगी।

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