औरंगाबाद। सिविल कोर्ट परिसर में बुधवार को एक अनोखी शादी चर्चा का विषय रही। आठ महीने जेल की सलाखों के पीछे रहने के बाद, जमानत मिलते ही एक प्रेमी ने अपनी प्रेमिका और अपने बच्चे की मां की मांग में सिंदूर भरकर उसे पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया। यह विवाह अधिवक्ताओं और परिजनों की मौजूदगी में कोर्ट परिसर स्थित मंदिर में संपन्न हुआ।

​मौसी के घर शुरू हुई थी प्रेम कहानी

​मामला मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के सिलाढ़ गांव के 19 वर्षीय विपुल कुमार और नबीनगर के टंडवा थाना क्षेत्र की 19 वर्षीय गूंजा कुमारी से जुड़ा है। विपुल का अपनी मौसी के घर आना-जाना था, जहां उसकी मुलाकात गूंजा से हुई। अलग-अलग जाति के होने के कारण परिजनों ने विरोध किया, तो दोनों घर से भागकर दिल्ली चले गए और लिव-इन में रहने लगे।

​जिम्मेदारी से भागने पर हुई थी जेल

​दिल्ली में रहने के दौरान गूंजा ने एक बच्चे को जन्म दिया। कुछ समय बाद विपुल उसे मायके छोड़कर खुद गायब हो गया और संपर्क तोड़ लिया। धोखे से आहत लड़की के परिजनों ने मामला दर्ज कराया, जिसके बाद पुलिस ने विपुल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पोक्सो एक्ट और अन्य धाराओं के तहत वह पिछले 8 महीनों से जेल में बंद था।

​पंचायत और कानूनी पहल से सुलझा मामला

​विपुल को जमानत मिलने के बाद दोनों पक्षों के वकीलों ने सकारात्मक पहल की। गांव में पंचायत बुलाई गई, जहां विपुल ने अपनी गलती स्वीकार की और गूंजा व बच्चे की जिम्मेदारी उठाने को तैयार हो गया। आपसी सहमति बनने के बाद बुधवार को कोर्ट परिसर में ही पूरे विधि-विधान से शादी की रस्में पूरी की गईं। वकीलों ने इस पहल को दोनों परिवारों और बच्चे के भविष्य के लिए एक सुखद कदम बताया।