परवेज आलम/ बगहा। बिहार के चर्चित रहे दस्यु सरगना जयनारायण यादव को लेकर अनुमंडल व्यवहार न्यायालय ने एक अहम फैसला सुनाया है। बगहा के एसडीजेएम (SDJM) आलोक कुमार चतुर्वेदी की अदालत ने आर्म्स एक्ट के एक पुराने मामले में जयनारायण यादव को दोषी करार देते हुए सजा मुकर्रर की है। अभियोजन पदाधिकारी डॉ. अनीश कुमार ने फैसले की पुष्टि करते हुए मामले की विस्तृत जानकारी साझा की।

​सजा और अर्थदंड का विवरण

​अदालत ने आर्म्स एक्ट की दो अलग-अलग धाराओं के तहत दोषी को कुल 3 साल के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने अभियुक्त पर 5 हजार रुपये और 1 हजार रुपये (कुल 6 हजार रुपये) का आर्थिक दंड भी लगाया है। हालांकि, इस फैसले में एक तकनीकी पहलू महत्वपूर्ण रहा।

​जेल में बिताई अवधि का मिला लाभ

​मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि अभियुक्त जयनारायण यादव सजा की निर्धारित 3 साल की अवधि पहले ही जेल में काटकर पूरी कर चुका है। इसी आधार पर अदालत ने सजा की अवधि को मुजरा कर दिया है। इसका अर्थ है कि उसे अब दोबारा जेल नहीं जाना होगा, लेकिन कोर्ट के आदेशानुसार उसे निर्धारित अर्थदंड की राशि अनिवार्य रूप से जमा करनी होगी। जुर्माना न भरने की स्थिति में नियमानुसार अतिरिक्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

2008 में किया था आत्मसमर्पण

​उल्लेखनीय है कि जयनारायण यादव ने वर्ष 2008 में तत्कालीन एसपी विकास वैभव के समक्ष सरेंडर किया था। करीब 18 वर्षों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया और गहमागहमी के बीच आज इस मामले का पूर्णतः निष्पादन हो गया।