Lalluram Desk. बैसाखी सिख धर्म का एक प्रमुख और ऐतिहासिक पर्व है। यह पर्व केवल फसल कटाई तक सीमित नही, बल्कि सिख इतिहास की एक बड़ी आध्यात्मिक घटना का प्रतीक माना जाता है। इस दिन को लेकर देशभर में खास उत्साह देखा जा रहा है।

बैसाखी किसानों के लिए रबी फसल के पकने का प्रतीक है। खेतों में सुनहरी फसल तैयार होने पर किसान ईश्वर के प्रति आभार जताते हैं। ढोल की थाप पर भांगड़ा और गिद्दा के साथ उत्सव मनाया जाता है, जिससे गांवों में खास रौनक देखने को मिलती है। इस अवसर पर गुरुद्वारों में अरदास और कीर्तन का आयोजन किया जाता है।

पंजाब और हरियाणा में नगर कीर्तन निकाले जाते हैं, जिसमें श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। साथ ही लंगर और मेलो का भी आयोजन होता हैं। जहां लोग एक साथ मिलकर इस पर्व की खुशियां साझा करते हैं। इस साल 14 अप्रैल को वैसाखी का पर्व मनाया जाएगा।

खालसा पंथ की स्थापना से जुड़ा महत्व

साल 1699 में गुरु गोबिंद सिंह ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी। उस समय समाज में भेदभाव और अत्याचार बढ़ रहे थे, जिसे समाप्त करने के उद्देश्य से एक निडर और समानता पर आधारित समुदाय की शुरुआत की गई। पंच प्यारों को अमृत छकाकर खालसा की नींव रखी गई, जो सिख इतिहास की एक अहम घड़ी मानी जाती है।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है। जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है। इसी के साथ सौर नववर्ष की शुरुआत होती है। अलग-अलग राज्यों में इसे नए साल के रूप में भी मनाया जाता है। हालांकि, इसकी परंपराएं भिन्न होती हैं।

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