पंडो महिला की मौत मामला: स्वास्थ्य विभाग ने कहा- कुपोषण से नहीं, चिकित्सकों की सलाह नहीं मानने पर गई महिला की जान

बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में महिला पंडो की मौत सरकार की ओर से बयान सामने आया है. जारी विज्ञाप्ति में कहा गया है कि विभिन्न अखबारों में पंडो महिला की मौत की खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई. जिसमें कुपोषण को प्रमुख कारण बताया गया, लेकिन जांच प्रतिवेदन में कुपोषण को कारण नहीं माना गया है. स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सकों की सलाह नहीं मानने पर मौत होना बताया है.

रामानुजगंज के खण्ड चिकित्सा अधिकारी डॉ. कैलाश कैवर्त्त की अगुवाई में टीम ने मामले की जांच की. जिसमें पाया कि महिला देवंती पंडो 19 अगस्त को उपस्वास्थ्य केन्द्र बरवाही में प्रसव के लिए भर्ती हुई थी. अगले दिन 20 अगस्त को उनका प्रसव हुआ. महिला की स्थिति को देखते हुए उनके बेहतर इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र रामानुजगंज भेजा गया था, लेकिन परिजनों ने उन्हें अस्पताल न ले-जाकर अपने घर बरवाही ले जाए. जिस कारण 9 सितंतर को उनकी मौत हो गई.

जांच में पाया गया कि महिला देवंती पंडो के स्वास्थ्य की जांच समय-समय पर की गई थी. मितानिन ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सनावल में महिला चिकित्सक के द्वारा देवन्ती पंडो की जांच कराई गई. आयरन और कैल्शियम की गोलियां भी दी गई. महिला की दूसरी और तीसरी एएनसी जांच की गई. प्रसव के बाद बेहतर इलाज के लिए उच्च अस्पताल ले जाने को कहा गया, लेकिन परिजनों ने अस्पताल ले जाने से मना कर दिया.

मृतिका के पति शिवलाल पंडो ने बताया कि गर्भ के दौरान देवंती का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सनावल में दो बार और उप स्वास्थ्य केन्द्र बरवाही में तीन बार जांच हुआ है. जांच के बाद उन्हें दी गई आयरन और कैल्सियम की गोलियों का सेवन नहीं किया गया. देवंती की मौत की जांच में यह पाया गया कि उन्होंने चिकित्सकों द्वारा दी गई सलाह का पालन नहीं किया. महिला की मृत्यु कुपोषण के कारण नहीं हुई है. प्रसव के बाद मृतिका के बच्चे की स्वास्थ्य विभाग विशेष निगरानी कर रही है. साथ ही अखबार द्वारा प्रसारित एक अन्य खबर में उल्लेखित किया गया है कि विकासखण्ड रामचन्द्रपुर में पिछले 4 माह में विशेष पिछड़ी जनजाति परिवार के 20 सदस्यों की मौत हुई है, जिसकी जांच की जा रही है.

पहले की तरह ही विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों को केन्द्रित कर प्रशासन स्वास्थ्य शिविर का आयोजन और जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. शासन की प्राथमिकता प्राप्त सभी योजनाओं का लाभ इन्हें दिया जा रहा है. 207 ग्रामों के 525 आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं से समुदाय के 738 गर्भवती, 764 शिशुवती, 3714 छः माह से तीन वर्ष, 3238 तीन से छः वर्ष कुल 8454 लोगों को विभागीय योजनाओं के माध्यम से पूरक पोषण आहार प्रदाय किया जा रहा है.

इसके साथ ही खाद्य विभाग द्वारा विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों को 6169 राशन कार्ड जारी कर नियमित रूप से खाद्यान्न प्रदान किया जा रहा है. इसके साथ पिछले माह अप्रैल से अगस्त 2021 तक विकासखण्ड रामचन्द्रपुर में शत्-प्रतिशत संस्थागत प्रसव का लक्ष्य पूर्ण किया गया है. विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों की महिलाओं को प्राथमिकता के साथ संस्थागत प्रसव ही कराया जा रहा है. वहीं प्रधानमंत्री आवास के अंतर्गत 1508 विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों के प्रधानमंत्री आवास पूर्ण हो चुके हैं.

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