BNP की ऐतिहासिक जीत के बाद ढाका ने भारत को लेकर अपना रुख नरम कर लिया है. BNP की भारी जीत के बाद बांग्लादेश के सुर बदल गए हैं और अब भारत से नए सिरे से रिश्ते बनाने की बात कही है क्योंकि अब शेख हसीना और अवामी लीग सत्ता में नहीं हैं. बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. तारिक रहमान के सलाहकार ने कहा कि बदली राजनीतिक स्थिति को स्वीकार करते हुए दोनों देशों को आपसी हित में सहयोग बढ़ाना चाहिए. हालांकि अल्पसंख्यक सुरक्षा और शेख हसीना के मुद्दे पर मतभेद बने हुए हैं. तारिक रहमान के सलाहकार हुमायूं कबीर ने कहा कि नई सरकार आपसी लाभ के लिए सहयोग चाहती है, लेकिन भारत को बदले हालात स्वीकार करने होंगे.

कबीर ने कहा कि भारत को बांग्लादेश की बदली राजनीतिक वास्तविकता को स्वीकार करना होगा. उनके मुताबिक जनता ने भारी बहुमत देकर बीएनपी को जनादेश दिया है और अब उसी आधार पर कूटनीतिक रिश्ते आगे बढ़ने चाहिए.

कबीर ने भारत से कहा कि उसकी जमीन का इस्तेमाल शेख हसीना या अवामी लीग के किसी नेता द्वारा बांग्लादेश की स्थिरता के खिलाफ नहीं होना चाहिए. उनका कहना है कि ऐसा होने पर भारत की छवि पर असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि जब यह भरोसा बन जाएगा तो दोनों देश सामान्य कूटनीतिक सहयोग फिर से शुरू कर सकते हैं और आपसी लाभ के लिए काम कर सकते हैं.

भारत पहले ही कह चुका है कि वो बांग्लादेश के लोगों के हित, शांति, लोकतंत्र और स्थिरता के प्रति प्रतिबद्ध है. विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया था कि शेख हसीना के प्रत्यर्पण के अनुरोध पर विचार किया जा रहा है. नई दिल्ली का कहना है कि वो सभी पक्षों के साथ रचनात्मक तरीके से जुड़ा रहेगा.

कबीर ने कहा कि नई सरकार भारत, चीन और अमेरिका के बीच संतुलित संबंध रखेगी. बांग्लादेश किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहेगा और राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देगा. उन्होंने कहा कि मजबूत जनादेश के साथ सरकार अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर मजबूती से बातचीत करेगी.

भारत ने सार्वजनिक रूप से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं की सुरक्षा पर चिंता जताई, जिससे रिश्तों में तनाव की धार बनी रही. इसके बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार, सीमा प्रबंधन और कूटनीतिक संपर्क पूरी तरह बंद नहीं हुए और कार्यस्तर पर संवाद जारी रहा.

हिंदुओं पर हमलों को लेकर उठ रही चिंताओं पर कबीर ने कहा कि बांग्लादेश में सांप्रदायिक सौहार्द है और स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है. हालांकि, भारत ने हाल के महीनों में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर हमलों को लेकर चिंता जताई है. कबीर ने आतंकवाद के खिलाफ खुफिया जानकारी साझा करने और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई. उनका कहना है कि निर्वाचित सरकारों के बीच तालमेल से ही चरमपंथ पर रोक लगाई जा सकती है.

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