जगदलपुर। साल 2025 की विदाई और 2026 के स्वागत ने बस्तर के पर्यटन को नई रफ्तार दी। चित्रकोट, तीरथगढ़, कोटमसर और पिकनिक स्पॉट्स पर रिकॉर्ड भीड़ देखी गई। 31 दिसंबर की सुबह से ही पर्यटक स्थलों पर चहल-पहल शुरू हो गई थी। कई पर्यटक देर रात तक नववर्ष के स्वागत में डटे रहे। नाइट कैंपिंग का ट्रेंड इस बार सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहा। चित्रकोट के आसपास नाईट स्टे और कैम्पिंग फुल बुक रहे। होटल और टूरिज्म रिसॉर्ट पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र और ओडिशा के पर्यटकों से खचाखच भरे रहे।
बस्तर पुलिस ने सभी पर्यटन स्थलों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए थे। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात के आसपास विशेष निगरानी रखी गई। पर्यटन विभाग के अनुसार दिसंबर–जनवरी में सबसे ज्यादा पर्यटक आते हैं। 1 जनवरी को मंदिरों और पार्कों में भी भारी भीड़ उमड़ी। प्रशासन ने नववर्ष के पहले दिन के लिए भी सुरक्षा और व्यवस्थाएं पुख्ता की है।
नए पर्यटन की पहचान बना बेम्बू रॉफ्टिंग
जगदलपुर। बस्तर में एडवेंचर टूरिज्म अब नई पहचान बना रहा है। धूड़मारास के बाद नेतानार, तिरिया जैसे इलाकों में बेम्बू रॉफ्टिंग शुरू की गई। नववर्ष के मौके पर इन स्थलों पर पर्यटकों की खासी भीड़ रही। स्थानीय युवाओं की भागीदारी से रोजगार के नए अवसर बने।।पर्यटकों में रॉफ्टिंग को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। इन गतिविधियों से नए पर्यटन स्थल विकसित हो रहे हैं। प्राकृतिक सौंदर्य के साथ रोमांच का संगम बस्तर की खास पहचान बन रहा है। पर्यटन विभाग इसे स्थायी टूरिज्म मॉडल के रूप में आगे बढ़ा रहा है। स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिल रहा है। एडवेंचर टूरिज्म बस्तर को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से ला रहा है। आने वाले समय में और स्थलों को जोड़ने की योजना है। बस्तर अब सिर्फ सुकून नहीं, रोमांच का भी केंद्र बन रहा है।

पुनर्वास से पुनर्जीवन की ओर
जगदलपुर। नक्सल प्रभावित इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम। पुना मार्गेम योजना के तहत आईजी सुंदरराज पी. ने देवखरगांव पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण किया। पुनर्वासित लोगों से सीधे संवाद कर प्रशिक्षण और सुविधाओं की जानकारी ली। 35 पुनर्वासित व्यक्तियों को स्मार्टफोन और प्रशिक्षण किट वितरित की गई। आईजी ने कहा हिंसा नहीं, विकास ही स्थायी समाधान है। प्रशिक्षण से आत्मनिर्भर बनने का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया गया है। पुलिस अधीक्षक पंकज चन्द्रा ने योजना की प्रगति की जानकारी दी। विभिन्न ट्रेड में स्किल ट्रेनिंग दी जा रही है। कलेक्टर नुपूर राशि पत्रा ने स्वरोजगार की संभावनाएं बताईं। पुनर्वासितों से गांव तक सकारात्मक संदेश पहुंचाने का आह्वान किया गया। यह पहल शांति और विकास की नई मिसाल बन रही है। मुख्यधारा में लौटते कदम बस्तर का भविष्य बदल रहे हैं।
प्रशासन अब गांव की चौखट पर
जगदलपुर। सुशासन को जमीन तक उतारने के लिए जिला प्रशासन ने नया प्रयोग किया है। कलेक्टर हरिस एस के नेतृत्व में “चौपाल अभियान” शुरू होने जा रहा है। अभियान की शुरुआत 9 जनवरी को लोहण्डीगुड़ा से होगी। अधिकारी दफ्तर छोड़ सीधे गांवों में पहुंचेंगे। सुबह स्कूल, आंगनबाड़ी और अस्पतालों का निरीक्षण किया जाएगा। दोपहर पंचायत भवन में ग्रामीणों से सीधा संवाद होगा। शाम को समीक्षा बैठक में समस्याओं का समाधान तय होगा। पूरे जिले के लिए कैलेंडर जारी किया गया है। 30 अप्रैल 2026 तक सभी जनपदों में चौपाल लगेगी। उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही तय करना। प्रशासन और जनता के बीच दूरी कम करने की कोशिश।
कोंडागांव – धान खरीदी में कसता शिकंजा
कोंडागांव। समर्थन मूल्य धान खरीदी में गड़बड़ी रोकने सख्त निगरानी। सीमा पर बाहरी धान रोकने के लिए विशेष चेकिंग। 643 किसान टोकन कटाने के बाद भी केंद्र नहीं पहुंचे। सबसे ज्यादा 254 किसान कांकेर जिले से। 66 किसानों का धान मापदंड पूरा न करने पर लौटाया गया। कोंडागांव में सबसे ज्यादा 27 मामले सामने आए। 17 में नमी और 10 में साफ-सफाई की कमी पाई गई। बस्तर जिले के चपका केंद्र में 59 क्विंटल धान लौटा। अधिक नमी और कचरा बड़ी वजह बनी। अधिकारी बोले 17% नमी और साफ धान अनिवार्य। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी। पारदर्शी खरीदी के लिए सख्ती जारी है।
दंतेवाड़ा : गीदम वेयरहाउस में खराब मिला 30 हजार क्विंटल चावल
दंतेवाड़ा। गीदम वेयरहाउस में 30 हजार क्विंटल चावल खराब मिला है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 18 करोड़ रुपए है। बीजापुर और सुकमा से शिकायत के बाद जांच में मामले का खुलासा हुआ। तीन स्टैक में फफूंद और सड़न की पुष्टि हुई है। 50 से ज्यादा मजदूरों से चावल साफ कर खपाने की तैयारी। गोदाम प्रभारी और ब्रांच मैनेजर नोटिस के बाद गायब। फ्यूमीगेशन पर लाखों खर्च, फिर भी चावल सड़ा। अब सवाल उठ रहे कि क्या मिल से ही खराब आया था? क्या गुणवत्ता जांच में मिलीभगत हुई? पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने गंभीर आरोप लगाए। डीएमओ बोले एक दाना भी बिना जांच बाहर नहीं जाएगा। पूरा मामला बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है।
मिशन 2026 से सिमटता नक्सलवाद
जगदलपुर। मिशन 2026 ने नक्सलियों की कमर तोड़ दी है।।बस्तर के आधे से ज्यादा इलाके नक्सलमुक्त। अब सिर्फ साउथ बस्तर डिवीजन में बचे नक्सली। हथियारबंद नक्सलियों की संख्या 120–150 के बीच। ज्यादातर या तो मारे गए या सरेंडर कर चुके। चार बड़े डिवीजन पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। आईजी सुंदरराज पी. ने अभियान की सफलता बताई। पहले बड़े कैडर पर प्रहार, फिर सरेंडर नीति। गलियारा लगातार सिमट रहा है। जल्द ही बचे नक्सलियों का भी आत्मसमर्पण। शांति और विकास की राह मजबूत। बस्तर नए दौर में प्रवेश कर रहा है।
रेल से खुलेगा विकास का रास्ता
जगदलपुर। नए साल में बस्तर को रेल।कनेक्टिविटी की सौगात।रावघाट–जगदलपुर रेललाइन का काम 2026 में शुरू होगा। 140 किमी का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है। 3513 करोड़ रुपए की केंद्र से मंजूरी। 2028 तक प्रोजेक्ट पूरा करने का लक्ष्य। पहला चरण दल्ली राजहरा–रावघाट लगभग पूरा। 12 स्टेशन, 10 क्रॉसिंग और 2 हॉल्ट प्रस्तावित। 776 हेक्टेयर में से 264 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित। पर्यटन, व्यापार और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा। खनिज और स्थानीय उत्पादों को बाजार। लागत 5 साल में 975 करोड़ बढ़ी। रेलमार्ग बस्तर की तस्वीर बदलेगा।
सुकमा – टेरर फंडिंग पर एनआईए की बड़ी कार्रवाई
सुकमा। नक्सलियों को हथियार सप्लाई मामले में एनआईए का शिकंजा। सुकमा कोतवाली में दर्ज केस की जांच एनआईए को सौंपी गई। टिफिन बम, डेटोनेटर और विस्फोटक सामग्री बरामद। टेरर फंडिंग और सप्लाई चेन का खुलासा। एनआईए ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की। पांच नए आरोपी नामजद। मनीष सोड़ी उर्फ हुर्रा पहले ही गिरफ्तार। पीएलजीए बटालियन नंबर-1 तक सप्लाई। जगरगुंडा इलाका था मुख्य केंद्र। प्रतिबंधित CPI माओवादी संगठन से संबंध। नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की कार्रवाई। सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा ब्रेकथ्रू।
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