Bastar News Update : जगदलपुर. बस्तर आईजी सुन्दरराज पी. द्वारा आयोजित वार्षिक पत्रवार्ता में वर्ष 2025 को बस्तर संभाग के लिए सुरक्षा और शांति की दिशा में निर्णायक वर्ष बताया गया. उन्होंने कहा कि नक्सली समस्या अब आखिरी सांसें ले रही है, और यह साल पुलिस व सुरक्षा बलों के लिए स्वर्णिम उपलब्धियों से भरा रहा.

आईजी ने कहा कि वर्ष 2024 की तुलना में 2025 में हत्या, हत्या के प्रयास, बलात्कार सहित अधिकांश संगीन अपराधों में आंशिक लेकिन उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई. दहेज मृत्यु के मामलों में भी बड़ा सुधार देखने को मिला, जहां बीते पांच वर्षों में पहली बार केवल एक एफआईआर दर्ज हुई. चोरी और अपहरण जैसी घटनाओं में भी गिरावट आई है, जो सामाजिक बदलाव का संकेत है. हालांकि सड़क दुर्घटनाएं चिंता का विषय बनी रहीं, जिनमें 782 लोगों की जान गई, हालांकि यह आंकड़ा 2024 की तुलना में कम है. आईजी ने कहा कि आगामी वर्ष 2026 में बेसिक पुलिसिंग, जनविश्वास और जागरूकता अभियानों पर विशेष फोकस रहेगा, ताकि अपराधों में और कमी लाई जा सके.

सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा

वर्ष 2025 में बस्तर संभाग में सड़क दुर्घटनाओं में 782 लोगों की मौत दर्ज की गई. वर्ष 2024 में यह संख्या 830 थी, जबकि 2022 में 699 मौतें हुई थीं. आईजी ने बताया कि हादसों में मामूली कमी आई है, लेकिन यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है. 2026 में सड़क सुरक्षा अभियानों को और सशक्त किया जाएगा.

नक्सल उन्मूलन में बड़ी सफलता

बस्तर संभाग में वर्ष 2025 नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक रहा. सुरक्षा बलों ने 256 नक्सलियों को ढेर किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है. वहीं मुठभेड़ों की संख्या 123 से घटकर 99 रह गई. इसके अलावा 884 माओवादियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जिससे शीर्ष कैडर की कमर टूट गई.

1562 नक्सलियों ने छोड़ी हिंसा

‘पूना मारगेम’ अभियान के तहत वर्ष 2025 में 1562 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की. यह संख्या 2024 की तुलना में लगभग दोगुनी है. सरकार द्वारा स्थापित 52 नए सुरक्षा कैंप अब केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि विकास के केंद्र के रूप में कार्य कर रहे हैं, जिससे बस्तर में भरोसे का माहौल मजबूत हुआ है.

नदी नालों को पार कर रेस्क्यू टीम ने रुकवाया 12 साल की बालिका का विवाह 

जगदलपुर. सुकमा जिला प्रशासन को 2 जनवरी की सुबह सूचना मिली कि सुकमा विकासखंड के ग्राम पंचायत रामाराम के सुदूर और पहुंचविहीन गांव नाड़ीगुफा में एक 12 वर्षीय बालिका का विवाह होने जा रहा है. सूचना मिलते ही जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी शिवदास नेताम के नेतृत्व में जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन और सेक्टर सुपरवाइजर की संयुक्त टीम गांव पहुंची. टीम ने उफनते नदी-नालों और कठिन परिस्थितियों की परवाह न करते हुए पैदल ही नाड़ीगुफा गांव तक का सफर तय किया.

गांव पहुंचने पर टीम ने पाया कि स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह की तैयारियां पूर्ण कर ली गई थीं. अधिकारियों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए परिजनों और ग्रामीणों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों और इससे होने वाले कानूनी परिणामों की जानकारी दी. प्रशासन की समझाइश का सकारात्मक असर हुआ. परिजनों ने स्वेच्छा से विवाह रोकने का निर्णय लिया और ग्रामीणों की उपस्थिति में विधिवत पंचनामा तैयार किया गया.

लक्ष्य था परिजनों को प्रेरित करना

बताया गया कि टीम का लक्ष्य केवल विवाह रोकना ही नहीं था बल्कि बालिका को पुन शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए परिजनों को प्रेरित करना था. शासन की मंशा है कि राज्य का हर पंचायत बाल विवाह मुक्त घोषित हो, ताकि जिले का सर्वांगीण विकास हो सके.

ये रहे शामिल

नवपदस्थ कलेक्टर अमित कुमार के निर्देश पर रेस्क्यू टीम में संरक्षण अधिकारी मनीषा शर्मा, सेक्टर सुपरवाइजर निशा साहू, सामाजिक कार्यकर्ता जोगेंद्र दिर्दी, लोकेश्वरी काउंसलर, चाइल्ड लाइन सुपरवाइजर मल्लिका सोड़ी, केस वर्कर मुड़ा पोडियामी एवं आंगनबाड़ी कार्यकतों उपस्थित रहीं.

नशनल हाइवे 130 डी की बदहाल सड़कों को लेकर कांग्रेस ने किया चक्काजाम 

नारायणपुर. नशनल हाइवे 130 डी अबूझमाड़ एवं जिला मुख्यालय नारायणपुर की प्रवेश द्वार सड़क की जर्जर हालत को लेकर शासन-प्रशासन की घोर विफलता, जनविरोधी रवैये एवं सत्ता की संवेदनहीनता के खिलाफ जिला कांग्रेस कमेटी, नारायणपुर द्वारा जोरदार विरोध सड़क निर्माण नहीं हुआ तो आंदोलन होगा और उग्र : कांग्रेस प्रदर्शन किया गया. इस दौरान कांग्र स कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय नागरिकों ने बखरूपारा एड़का चौक में चक्काजाम कर अपना आक्रोश व्यक्त किया. जिला कांग्रेस कमेटी ने आरोप लगाया कि अत्यधिक और जर्जर बदहाल स्थिति में है, जिससे आम जनता, मरीजों, छात्रों एवं व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन शासन-प्रशासन आंख मूंदे बैठा है. बार-बार मांग और शिकायत के बावजूद सड़क निर्माण एवं मरम्मत को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जो सत्ता की संवेदनहीनता को दर्शाता है.

शांतिपूर्ण रहा आंदोलन, यातायात रहा प्रभावित

चक्काजाम के दौरान जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेश दीवान ने प्रशासनिक अधिकारियो को जल्द जल्द शीघ्र सड़क निर्माण कार्य शुरू करने कहा अन्यथा, आगे आंदोलन को और उग्र करने की बात कही जिसकी पूरी जिम्मेवारी शासन-प्रशासन की होगी. प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा, लेकिन आंदोलन शांतिपूर्ण रहा. नारायणपुर अनुविभागीय एवं दण्डधिकारी मांडवी सर ने कांग्रेस कार्यकर्ताओ को हाइवे से उठाया कांग्रेस ने एसडीएम को ज्ञापन सौप कर आंदोलन समाप्त किया. जिला कांग्रेस कमेटी ने मांग की कि अबूझमाड़ एवं जिला मुख्यालय नारायणपुर की प्रवेश द्वार सड़क का तत्काल सुधार एवं स्थायी समाधान किया जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके. इसके सिवा गढबेंगाल चौक से कोंडागांव और छोटडोगर तक ग्रामीण क्षेत्र में पानी का छिड़‌काव किया जाये ताकि इस मार्ग में चलने वाले यात्री को धुल से थोड़ा राहत मिल सके.

घर-घर छेरछेरा मांगने निकली बच्चों की टोलियां

जगदलपुर. शहर  सहित पूरे बस्तर अंचल में पारंपरिक छेरछेरा पर्व पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है. पर्व को लेकर खासतौर पर बच्चों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. झोला और बोरी हाथ में लिए बच्चों की टोलियां सुबह से ही घर-घर छेरछेरा मांगने निकल पड़ीं. गाजे-बाजे के साथ छेरछेरा गीत गाते हुए बच्चों ने गांव और शहर की गलियों में लोकसंस्कृति का रंग बिखेर दिया.

ग्रामीण अंचलों के साथ नगर क्षेत्र में भी छेरछेरा पर्व की रौनक दिखाई दी. किलेपाल परगना के माड़िया जनजाति के ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में छेरछेरा नृत्य करते हुए नगर पहुंचे, जिससे वातावरण पूरी तरह उत्सवमय हो गया. लोगों ने बच्चों को धान, रुपये और चॉकलेट देकर उनका उत्साह बढ़ाया. छेरछेरा पर्व ने एक बार फिर बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की. 

धान और दान से जुड़ी परंपरा

बस्तर अंचल में पोष पूर्णिमा के दिन छेरछेरा पर्व मनाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है. मान्यता है कि धान के कुछ अंश का दान करने से अगले वर्ष अच्छी फसल होती है. इसी विश्वास के चलते किसान इस दिन दरवाजे पर आए किसी भी व्यक्ति को खाली हाथ नहीं लौटाते और खुशी-खुशी दान देते हैं.

अमीरी-गरीबी का भेद मिटाता पर्व

छेरछेरा पर्व सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जाता है. इस दिन अमीरी-गरीबी का भेद भूलकर लोग एक-दूसरे के घर जाकर नृत्य और गीत के माध्यम से खुशियां बांटते हैं. इतिहास में उल्लेख है कि प्राचीन काल में राजा-महाराजा भी इस पर्व को पूरे सम्मान के साथ मनाते थे.