Bastar News Update : सुकमा. बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान का असर साफ नजर आने लगा है. बीजापुर मुठभेड़ और सुकमा में आत्मसमर्पण के बाद हथियारबंद नक्सलियों की संख्या घटकर 144 रह गई है. बीजापुर में दो नक्सली मारे गए, जबकि सुकमा में चार नक्सलियों ने हथियारों के साथ सरेंडर किया. सुरक्षा बलों के दबाव में अब संगठन के भीतर बिखराव बढ़ता जा रहा है. किस्टारम और गोलापल्ली इलाकों में नए सुरक्षा कैंपों ने नक्सलियों की आवाजाही सीमित कर दी है. सड़क और संचार नेटवर्क ने संगठन की रणनीति को कमजोर किया है. बताया जा रहा है कि नई भर्ती लगभग बंद हो चुकी है. सुकमा जिले में अभी भी कुछ हथियारबंद नक्सलियों की मौजूदगी बताई जा रही है. हालांकि पुलिस का दावा है कि संगठन अब दोबारा खड़ा होने की स्थिति में नहीं है. पिछले साल बड़े नक्सली नेताओं के मारे जाने से संगठन की कमर टूट चुकी है. आईजी ने शेष नक्सलियों से हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटने की अपील की है. पुलिस का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वालों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिलेगा. मिशन 2026 की दिशा में इसे बड़ी सफलता माना जा रहा है.

दंतेवाड़ा – 17 साल पुराना जमीन विवाद, लाल मिट्टी बनी आदिवासी खेतों के लिए अभिशाप

दंतेवाड़ा जिले के फूलपाड़ गांव में औद्योगिक कचरे की कहानी अब जमीन हड़पने के आरोपों में बदल गई है. आयरन से लोहा बनाने के बाद बचने वाली जहरीली लाल मिट्टी को डंप करने की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को दी गई थी. कंपनी का दावा है कि उसने 132 एकड़ जमीन आदिवासी किसानों से खरीदी थी, लेकिन किसान इस दावे को सिरे से खारिज कर रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि सागौन के पेड़ बेचने के नाम पर धोखे से जमीन की रजिस्ट्री कर ली गई. किसानों का कहना है कि उन्होंने कभी जमीन बेचने की सहमति नहीं दी. 17 साल बीतने के बावजूद कंपनी का डंपिंग यार्ड शुरू नहीं हो पाया. इस बीच ठेकेदारों पर आरोप है कि वे दूसरे गांवों के खेतों में गड्ढे कर लाल मिट्टी डाल रहे हैं. कहा जा रहा है कि मिट्टी से उपज बढ़ेगी, लेकिन हकीकत में खेत बंजर हो चुके हैं. कुंदेली और मनेसार गांवों में दो साल से फसल नहीं उग रही.

ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी जमीन पर किसी भी यार्ड की अनुमति नहीं देंगे. प्रशासनिक सीमांकन के दौरान भी किसानों ने खुलकर विरोध किया. ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है. न्याय नहीं मिलने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया गया है.

बस्तर – ग्रीन केव पर खतरा, हाईकोर्ट पहुंचा पर्यावरण का मामला

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की दुर्लभ ग्रीन केव एक बार फिर विवाद के केंद्र में है. गुफा के मुहाने पर चल रहे निर्माण के खिलाफ पर्यावरणविदों ने उच्च न्यायालय का रुख किया है. याचिका में गुफा को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए तत्काल काम रोकने की मांग की गई है. पर्यावरणविदों का कहना है कि यह एक बंद पारिस्थितिकी तंत्र है. मामूली धूल, शोर और कंपन से भी गुफा की संरचना को स्थायी नुकसान हो सकता है. ग्रीन केव में दिन में केवल एक घंटे सूर्य की रोशनी पहुंचती है. भीतर मौजूद हरे शैवाल और चूना पत्थर की संरचनाएं इसे विशिष्ट बनाती हैं. पर्यटकों की आवाजाही से आर्द्रता और तापमान में बदलाव का खतरा है.याचिकाकर्ताओं ने गुफा को पर्यटकों के लिए खोलने के फैसले पर भी सवाल उठाए हैं. निर्माण से स्टेलेक्टाइट्स और स्टेलेग्माइट्स को नुकसान की आशंका जताई गई है. हाईकोर्ट में याचिका पंजीकरण की प्रक्रिया चल रही है. पर्यावरणविदों ने ग्रीन केव को पूरी तरह संरक्षित क्षेत्र घोषित करने की मांग की है. मामला अब कानूनी दायरे में पहुंच चुका है.

जगदलपुर : नौकरी लगाने के नाम पर लाखों की ठगी, फार्मासिस्ट गिरफ्तार

जगदलपुर में सरकारी नौकरी लगाने के नाम पर 10 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है, जगदलपुर के कुम्हारपारा निवासी पीड़ित अनंत राम कश्यप ने ठगी की शिकायत बोधघाट थाने में दर्ज कराई, कोंडागांव जिले के बड़े कनेरा में फार्मासिस्ट के पद पर पदस्थ आरोपी प्रमोद सिंह ने पीड़ित की बेटी एवं भांजी को आश्रम अधीक्षक के पद नौकरी लगाने का झांसा दिया इसके लिए आरोपी ने अपने जीजा को व्यापम का अधिकारी भी बताया, मामले में बोधघाट थाने की पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रमोद सिंह भार्गव को गिरफ्तार कर लिया है.

बीजापुर – इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ गणना की तैयारी तेज

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों की गिनती के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं. वन विभाग ने ट्रैप कैमरे लगाने से पहले अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया. यह गणना अखिल भारतीय बाघ आंकलन 2025–26 के तहत की जा रही है. प्रशिक्षण में बाघों के फुटमार्क, मल और पेड़ों पर निशानों की पहचान सिखाई गई. सैटेलाइट इमेज और ट्रैप कैमरे से डाटा संग्रह का अभ्यास कराया गया. एम-स्ट्राइप्स मोबाइल एप के जरिए गणना की जाएगी. प्रशिक्षण में मांसाहारी और शाकाहारी वन्यजीवों की पहचान भी शामिल रही. वनभैंसा, गौर और अन्य जीवों के प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष संकेत दर्ज किए जाएंगे. करीब 200 वनकर्मी और फायर वाचर इस अभियान में शामिल हुए. अधिकारियों ने जंगल की सेहत और मानवीय हस्तक्षेप पर भी फोकस किया. गणना जनवरी से अप्रैल के बीच पूरी की जाएगी. इससे बाघों की संख्या और उनके फैलाव की सटीक जानकारी मिलेगी. वन्यजीव संरक्षण की दिशा में इसे अहम कदम माना जा रहा है.

बस्तर – फाइलेरिया मुक्त बस्तर की ओर, 10 फरवरी से महाअभियान

बस्तर जिले को फाइलेरिया से मुक्त करने के लिए प्रशासन ने बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला लिया है. 10 से 25 फरवरी तक तीन विकासखंडों में सामूहिक दवा सेवन कराया जाएगा. अभियान को जन-आंदोलन का रूप देने की तैयारी की गई है. स्वास्थ्य विभाग के साथ कई अन्य विभागों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है. पहले चरण में स्कूल, आंगनवाड़ी और कॉलेजों में बूथ लगाकर दवा दी जाएगी. दूसरे चरण में स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर दवा खिलाएंगे. तीसरे चरण में छूटे लोगों को मॉप-अप राउंड में कवर किया जाएगा. गर्भवती महिलाएं, गंभीर रोगी और दो साल से कम उम्र के बच्चे बाहर रखे गए हैं. खाली पेट दवा न लेने की सख्त हिदायत दी गई है. जनजागरूकता के लिए सरपंच खुद पहले दवा खाएंगे. गांव-गांव मुनादी और स्कूलों में संकल्प कार्यक्रम होंगे. शहरी क्षेत्रों में भी प्रचार के विशेष इंतजाम किए गए हैं. प्रशासन का लक्ष्य बस्तर को पूरी तरह फाइलेरिया मुक्त बनाना है.

जगदलपुर : पुलिस लिखी कार और स्कूटी में जोरदार टक्कर 

शहर के गीदम रोड पर तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला. बस्तर परिवहन संघ के पास एक कार और इलेक्ट्रॉनिक स्कूटी की भीषण टक्कर में दो लोग घायल हो गए. हादसे का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें साफ तौर पर दिख रहा है कि तेज़ रफ्तार और ओवरटेकिंग के दौरान यह दुर्घटना हुई. टक्कर करने वाली कार पर झारखंड नंबर की है. कार पर पुलिस लिखा हुआ है. जानकारी के मुताबिक, कार जगदलपुर की ओर तेज गति से जा रही थी, जोरदार भिड़ंत में स्कूटी सवार दूर जा गिरा, जबकि कार चालक भी घायल हुआ. पीछे चल रही डिस्कवर बाइक भी चपेट में आ गई. स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को महारानी अस्पताल पहुंचाया गया, कुछ देर तक यातायात भी प्रभावित रहा. फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच कर रही है. यह हादसा एक बार फिर बताता है कि तेज़ रफ्तार और नियमों की अनदेखी शहर में दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बन रही है.