जगदलपुर। बस्तर की जनजातीय संस्कृति में मृत्यु को अंत नहीं, बल्कि एक नए रिश्ते की शुरुआत माना जाता है. यहां मान्यता है कि परिजन की मृत्यु के बाद उसकी आत्मा पितरों में शामिल होती है. दशगात्र की रात आत्मा की तृप्ति के लिए बाकायदा बाजार सजाया जाता है. ऐसा माना जाता है कि मृतक की आत्मा किसी न किसी रूप में वहां आती है. इसी विश्वास के चलते सूर्यास्त के बाद घर के पास चौक में हाट लगाया जाता है.

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इस हाट में चना-मुर्रा, मिठाइयां, रुमाल से लेकर महुआ शराब तक रखी जाती है. रिश्तेदार ही खरीदार बनते हैं, लेकिन उद्देश्य आत्मा की संतुष्टि होता है. समाज का विश्वास है कि अतृप्त आत्मा परिवार को परेशान कर सकती है. हल्बा और भतरा समाज के अनुसार यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है. स्त्री-पुरुष में कोई भेद नहीं, हर आत्मा को समान सम्मान दिया जाता है. यह परंपरा बस्तर की अनोखी सोच और गहरी आस्था को दर्शाती है. मृत्यु के बाद भी परिजन अपने रिश्तों को निभाना नहीं भूलते.

सामूहिक श्रद्धा से बना स्वर्ण कलश आस्था का जीवंत उदाहरण

जगदलपुर। श्री बालाजी मंदिर में श्रद्धा ने एक ऐतिहासिक रूप ले लिया. करीब 600 श्रद्धालुओं ने अपनी सामर्थ्य अनुसार सोना दान किया. किसी ने एक ग्राम तो किसी ने बारह ग्राम स्वर्ण अर्पित किया. इसी सामूहिक सहयोग से एक किलो वजनी स्वर्ण कलश तैयार हुआ.

29 जनवरी को इसी कलश से भगवान का महा-अभिषेक होगा. पहली बार इस स्वर्ण कलश का उपयोग अभिषेक में किया जाएगा. ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं से इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने की अपील की है.

पूजन के दौरान श्रद्धालुओं की आंखों में भावुकता साफ दिखी. मंत्रोच्चार और शंख ध्वनि के बीच कलश का विधिवत शुद्धिकरण हुआ. मंदिर ट्रस्ट के अनुसार यह आयोजन केवल अनुष्ठान नहीं है. यह भक्तों की एकजुट आस्था और समर्पण का प्रतीक है. रजत जयंती के अवसर पर यह विशेष उपलब्धि मानी जा रही है.

जंगल, श्रद्धा और देवी मेड़ारम मेले की अद्भुत आस्था

जगदलपुर। तेलंगाना में आस्था और परंपरा का महापर्व मेड़ारम मेला शुरू हो गया है. मुलुगु जिले के मेड़ारम गांव में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है. तीन दिनों में डेढ़ करोड़ से अधिक लोगों के पहुंचने का अनुमान है. यह मेला हर तीसरे वर्ष आयोजित होता है, लेकिन भव्यता अद्वितीय होती है.

माता सम्मक्का और सरलम्मा को गुड़ अर्पित करने की परंपरा है. यह गुड़ श्रद्धालुओं के लिए सोने के समान पवित्र माना जाता है. मेले में मूर्तियों के बजाय बांस, हल्दी और सिंदूर से पूजा होती है. देवियों को जंगल से लाकर पूजा स्थल तक लाया जाता है. श्रद्धालु घने जंगलों और पहाड़ियों से पैदल यात्रा कर पहुंचते हैं. राज्य सरकार ने सुरक्षा, स्वास्थ्य और यातायात के व्यापक इंतजाम किए हैं. 4000 अतिरिक्त बसों और हेलीकॉप्टर सेवा की व्यवस्था की गई है. यह आयोजन आदिवासी आस्था और प्रकृति से जुड़ाव का जीवंत उदाहरण है.

बस्तर पंडुम लोककला से वैश्विक पहचान की ओर

जगदलपुर। जिला मुख्यालय में बस्तर पंडुम का भव्य शुभारंभ हुआ. यह आयोजन जनजातीय संस्कृति को मंच देने का सशक्त माध्यम बन रहा है. इस बार 5 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया. कई ऐसे कलाकार सामने आए, जिन्हें पहली बार बड़ा मंच मिला. आयुक्त ने इसे सांस्कृतिक उत्सव से आगे की पहल बताया. प्रतिभागी अब संभाग स्तरीय आयोजन में अपनी कला दिखाएंगे.

यहां उन्हें देश-विदेश के कलाकारों से सीखने का अवसर मिलेगा. कार्यक्रम से बस्तर की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रही है. इसी मंच से ‘संपूर्णता अभियान’ की शुरुआत भी की गई. स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. बस्तर पंडुम परंपरा और विकास को एक साथ जोड़ता है. नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का यह मजबूत प्रयास है.

संघर्ष से शिखर तक: योगिता मण्डावी की प्रेरक कहानी

कोंडागांव। कोंडागांव की योगिता मण्डावी आज जिले की पहचान बन चुकी हैं. महज 14 वर्ष की उम्र में वे राष्ट्रीय स्तर की जूडो खिलाड़ी हैं. बाल पुरस्कार से सम्मानित योगिता ने संघर्ष को अपनी ताकत बनाया. चार वर्ष की उम्र में माता-पिता को खोने के बाद जीवन कठिन रहा. बालगृह से निकलकर उन्होंने खेल को अपना सहारा बनाया. 10 वर्ष की उम्र में जूडो शुरू कर तेजी से सफलता पाई. राज्य, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते. खेलो इंडिया और ओपन प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया. वर्तमान में भोपाल में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं. उनकी कहानी हजारों बच्चों के लिए प्रेरणा है. योगिता ने साबित किया कि हालात सफलता नहीं रोक सकते. मेहनत और अनुशासन से सपने पूरे किए जा सकते हैं.

भुगतान नहीं तो रास्ता बंद: किसानों का आक्रोश सड़कों पर

फरसगांव। फरसगांव में किसानों का सब्र जवाब दे गया. सहकारी बैंक से भुगतान नहीं मिलने पर किसानों ने चक्काजाम किया. नेशनल हाईवे-30 पर बैठकर किसानों ने विरोध दर्ज कराया. आधे घंटे तक दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं.

किसानों का कहना है कि समय पर राशि नहीं मिल रही. अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर किसानों से बातचीत की. आश्वासन के बाद चक्काजाम समाप्त किया गया. इसके बाद यातायात बहाल हो सका. धान खरीदी में आ रही दिक्कतों से किसान परेशान हैं. पहले भी चेतावनी दी गई थी, लेकिन समाधान नहीं हुआ. मजबूरी में किसानों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा. प्रशासन ने जल्द समाधान का भरोसा दिलाया है.

बाइक की टक्कर से युवक के दोनों पैर टूटे

कोंटा। कोंटा में तेज रफ्तार बाइक हादसे का कारण बन गई. अंबेडकर चौक के पास पैदल चल रहे युवक को बाइक ने टक्कर मार दी. हादसे में युवक के दोनों पैर टूट गए. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाइक पर तीन युवक सवार थे. रफ्तार इतनी तेज थी कि चालक नियंत्रण खो बैठा. स्थानीय युवाओं ने घायल को अस्पताल पहुंचाया.

डॉक्टरों ने युवक की हालत गंभीर बताई है. बाइक चालक और सवार भी घायल हुए हैं. एक युवक मौके से फरार बताया जा रहा है. पुलिस ने चालक की पहचान कर ली है. घायलों के बयान के बाद आगे की कार्रवाई होगी. यह हादसा तेज रफ्तार के खतरे की चेतावनी है.

आवारा कुत्ते शहर में बढ़ता डर और खतरा

जगदलपुर। नगर में आवारा कुत्ते लोगों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं. हर दिन किसी न किसी हादसे की खबर सामने आ रही है. बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक डर के साये में जी रहे हैं. सुबह टहलने वाले लोग हाथ में डंडा लेकर निकलने को मजबूर हैं.

कुत्तों के काटने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. तीन वर्षों में मामलों में करीब 36 प्रतिशत इजाफा हुआ. स्वास्थ्य विभाग ने इलाज का दावा किया है. आयोग ने निकायों को नसबंदी के निर्देश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर मुद्दा बताया है. नगर निकायों पर जिम्मेदारी तय की गई है. नसबंदी और प्रबंधन पर जोर दिया जा रहा है. शहर की सुरक्षा अब बड़ी चुनौती बन चुकी है.

जर्जर स्कूल, खुले आसमान के नीचे पढ़ते बच्चे

जगदलपुर। मर्दापाल ब्लॉक के बेड़मा गांव में शिक्षा बदहाली का शिकार है. प्राथमिक शाला की हालत कई वर्षों से जर्जर बनी हुई है. 24 बच्चे बिना छत जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं. न मरम्मत हुई, न वैकल्पिक व्यवस्था की गई. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं. पेयजल, सड़क और आंगनबाड़ी तक का अभाव है.

इस स्थिति से बच्चों का भविष्य खतरे में है. प्रशासन से कई बार शिकायत की गई. अब तत्काल कार्रवाई की मांग तेज हो गई है.
सुरक्षित भवन की व्यवस्था की मांग उठी है. शिक्षा के अधिकार पर सवाल खड़े हो रहे हैं. यदि समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी दी गई है.