Bastar News Update : दंतेवाड़ा। बचेली वन परिक्षेत्र में बाघ की मौजूदगी ने ग्रामीण जीवन की रफ्तार थाम दी है। भांसी इलाके में गाय के शिकार की घटना के बाद जंगल से लगे गांवों में दहशत फैल गई है। ग्रामीणों ने बाघ की गतिविधियों की सूचना वन विभाग को दी, जिसके बाद मौके पर जांच की गई। जांच में शिकार की पुष्टि होते ही पूरे क्षेत्र में अलर्ट जारी कर दिया गया। दर्जनभर से अधिक गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया जा रहा है।

ग्रामीणों को अकेले जंगल न जाने और मवेशियों को खुले में न छोड़ने की हिदायत दी गई है। वन कर्मियों की तैनाती बढ़ा दी गई है और।लगातार गश्त जारी है। रेलवे ट्रैक से गुजरने वाले कर्मचारियों को भी विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। डीएफओ रंगनाधा रामकृष्णा ने बाघ की मौजूदगी के प्रमाण मिलने की पुष्टि की है। किसी भी वन्य गतिविधि की सूचना तत्काल विभाग को देने की अपील की गई है। अधिकारियों का कहना है कि हालात पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है।।प्राथमिक लक्ष्य मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकना बताया गया है।

हवाई सेवा बंद, भरोसे की उड़ान जमीन पर

बस्तर। जगदलपुर से रायपुर की हवाई सेवा एक साल से ठप पड़ी है। विशाखापटनम और भुवनेश्वर के लिए प्रस्तावित उड़ानें भी कागज़ों में सिमटी हैं। अब बिलासपुर होकर दिल्ली जाने वाली उड़ान पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हवाई कनेक्टिविटी के अभाव में बस्तरवासियों की नाराजगी खुलकर सामने आ रही है। माँ दंतेश्वरी एयरपोर्ट के पुराने ढांचे को बड़ी बाधा बताया जा रहा है। डामरीकरण के बिना नई उड़ानों की राह आसान नहीं हो पा रही। निविदा प्रक्रिया में मानकों के अनुरूप ठेकेदार नहीं मिल पाया।

लागत बढ़ने के कारण परियोजना अधर में लटक गई है। दो विमानन कंपनियों ने घाटे का हवाला देकर उड़ानें बंद कर दीं। यात्रियों को रायपुर होकर देश से जुड़ने में भारी परेशानी हो रही है। प्रबंधन मानता है कि अधोसंरचना मजबूत किए बिना समाधान संभव नहीं। लोग अब केवल आश्वासन नहीं, ठोस निर्णय चाहते हैं।

यूजीसी रेगुलेशन के खिलाफ सड़कों पर सवर्ण समाज

बस्तर। यूजीसी रेगुलेशन के विरोध में बस्तर में सवर्ण समाज का व्यापक प्रदर्शन हुआ। माँ दंतेश्वरी मंदिर के सामने बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने रेगुलेशन को युवाओं के भविष्य के लिए घातक बताया। इसे संविधान की समानता की भावना के विरुद्ध करार दिया गया। धरना प्रदर्शन के बाद शहर में बाइक रैली निकाली गई। रैली विभिन्न चौक-चौराहों से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची। पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर ने ज्ञापन प्रेषित करने का आश्वासन दिया।

ज्ञापन में सामाजिक और शैक्षणिक असमानता का मुद्दा उठाया गया। प्रदर्शन का नेतृत्व सर्व सवर्ण समाज के संयोजक ने किया। वक्ताओं ने इसे समाज में वर्ग संघर्ष बढ़ाने वाला बताया। समाज ने आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं।

रामाराम मेला बना आस्था और उत्सव का संगम

सुकमा। रामाराम मेला समापन के बाद माता की डोली सुकमा लौटी। नगर आगमन पर श्रद्धालुओं ने फूलों और आतिशबाजी से स्वागत किया। राजवाड़ा मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद मेला सजा।

आसपास के गांवों से हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। दिनभर माता के दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। परंपरा अनुसार देवी-देवताओं की विदाई हुई। शाम होते ही मेला स्थल रोशनी से जगमगा उठा। झूले, मीना बाजार और सांस्कृतिक रंगों ने माहौल बनाया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर आस्था और उल्लास झलका। बच्चों और युवाओं में खास उत्साह देखा गया। मेला देर रात तक आकर्षण का केंद्र बना रहा। सुकमा में यह आयोजन सांस्कृतिक पहचान बनकर उभरा।

मेले में योजनाओं की जानकारी का नया प्रयोग

सुकमा। रामाराम मेले में जनकल्याणकारी योजनाओं का अनूठा प्रदर्शन हुआ। जनसंपर्क विभाग की प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण बनी। एलईडी वैन के जरिए योजनाओं का सजीव प्रसारण किया गया। स्थानीय कलाकारों ने लोकनृत्य से योजनाओं की जानकारी दी। संगीत और नृत्य के माध्यम से लाभ और पात्रता समझाई गई। ग्रामीणों ने इस नवाचार की सराहना की। ब्रोशर और पुस्तकों का निःशुल्क वितरण किया गया। लोगों ने योजनाओं को सरल भाषा में समझा। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि और सामाजिक लोग मौजूद रहे। तीन दिन तक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां चलती रहीं। उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक जानकारी पहुंचाना रहा। मनोरंजन के साथ जागरूकता का यह मॉडल सराहा गया।

19 साल बाद भी अफसरों को नहीं मिला ठिकाना

नारायणपुर। जिला बने 19 साल बाद भी नारायणपुर के शीर्ष अधिकारी उधार के बंगले में रह रहे हैं। कलेक्टर, एसपी और जिला सीईओ के लिए आज तक निजी आवास नहीं बने। वन विभाग के पुराने बंगलों में प्रशासनिक कामकाज चल रहा है।

कलेक्टर का बंगला दशकों पुराने भवन में संचालित है। बरसात में छत से पानी टपकने जैसी स्थिति बनती है। हर तबादले के बाद मरम्मत पर लाखों खर्च होते हैं। 2015 में अधिकारियों के आवास हेतु जमीन आरक्षित की गई थी। लेकिन आज भी वह जमीन खाली पड़ी है।अब तक 14 कलेक्टर बदल चुके हैं, समस्या जस की तस है। एसपी भी वन विभाग के उत्पादन डीएफओ बंगले में रह रहे हैं। आवास की कमी से प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। स्वीकृति के अभाव ने सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैंसर के खिलाफ जनआंदोलन

बस्तर। विश्व कैंसर दिवस पर बस्तर में ऐतिहासिक स्वास्थ्य अभियान चला। शहरी क्षेत्रों से लेकर सुदूर गांवों तक जांच शिविर लगे। एक ही दिन में 8,000 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई। 261 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में जांच की सुविधा रही। ओरल, स्तन और सर्वाइकल कैंसर की जांच पर फोकस रहा। 45 संदिग्ध मरीजों को तुरंत रेफर किया गया। 15 दिनों में उपचार शुरू करने की योजना बनाई गई है। 5,000 से अधिक लोगों की ओरल स्क्रीनिंग हुई। 3,500 महिलाओं की स्तन जांच की गई। 600 महिलाओं की सर्वाइकल जांच हुई। 4,000 स्कूली बच्चों ने नशा छोड़ने का संदेश दिया। अभियान जनभागीदारी का उदाहरण बना।

बॉडी बिल्डिंग में शहर का गौरव

जगदलपुर। दल्ली राजहरा में आयोजित राज्य स्तरीय बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता में जगदलपुर के युवाओं ने दम दिखाया। 50–55 किलो वर्ग में रोहित पटनायक ने चौथा स्थान हासिल किया। मेन्स फिजिक्स में भी रोहित पांचवें स्थान पर रहे। 70–75 किलो वर्ग में अंकित विश्वास ने चौथा स्थान पाया। कुल तीन पदक जगदलपुर की झोली में आए। प्रतियोगिता में ओडिशा के प्रतिभागियों ने भी हिस्सा लिया.

खिलाड़ियों का प्रदर्शन सराहनीय रहा। टीम के साथ प्रशिक्षक मौजूद रहे। कोच ने खिलाड़ियों के अनुशासन की तारीफ की। युवाओं की मेहनत रंग लाई। खिलाड़ियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं। जगदलपुर ने खेल मंच पर अपनी पहचान बनाई।