Bastar News Update : जगदलपुर। चैत्र नवरात्र के साथ इस बार बस्तर में आस्था का रंग पूरी तरह डिजिटल नजर आ रहा है। जगदलपुर के ऐतिहासिक दंतेश्वरी मंदिर में इस बार 3 हजार से ज्यादा मनोकामना ज्योत जलने का अनुमान है। श्रद्धालु अब मंदिर पहुंचने से पहले ही ऑनलाइन बुकिंग के जरिए अपनी आस्था दर्ज करा रहे हैं। अब तक करीब 2 हजार से ज्यादा भक्त ज्योति कलश के लिए पंजीयन करा चुके हैं। खास बात यह है कि विदेशों से भी श्रद्धालु ऑनलाइन जुड़ रहे हैं, जिसमें दुबई से बुकिंग शामिल है। क्यूआर कोड और वेबसाइट आधारित व्यवस्था से प्रक्रिया बेहद आसान हो गई है। नवरात्र 19 मार्च से शुरू हो रहा है, जिसे लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां तेज हैं। इस बार महंगाई का असर पूजा व्यवस्था पर भी पड़ा है, शुल्क में हल्की बढ़ोतरी की गई है। तेल ज्योत के लिए 751 और घी ज्योत के लिए 1751 रुपए निर्धारित किए गए हैं। मंदिर गेट पर ऑफलाइन काउंटर भी बनाए गए हैं, ताकि सभी वर्गों को सुविधा मिले। बस्तर के साथ देश के अलग-अलग राज्यों से भी श्रद्धालु जुड़ रहे हैं। डिजिटल सुविधा के चलते इस बार श्रद्धा का दायरा सीमाओं से बाहर निकल गया है।

26 साल से अधूरी योजनाएं, शहर अब भी इंतजार में

बस्तर। संभाग मुख्यालय जगदलपुर में विकास की दो बड़ी योजनाएं दशकों से अधूरी पड़ी हैं। गोकुलधाम और ट्रांसपोर्ट नगर का सपना 26 साल बाद भी जमीन पर नहीं उतर पाया है। शहर में 100 से ज्यादा डेयरियां और 2000 से अधिक ट्रक होने के बावजूद व्यवस्था बदहाल है। मवेशी सड़कों पर और भारी वाहन मोहल्लों में खड़े नजर आते हैं। करकापाल में गोकुलधाम के लिए जमीन चिन्हित हुई, टेंडर भी निकला, लेकिन काम ठप रह गया। हर साल निगम बजट में चर्चा होती है, लेकिन योजना कागज से बाहर नहीं आ पाती। ट्रांसपोर्ट नगर के लिए अब तक भूखंड तक तय नहीं हो सका है। संघ लंबे समय से 150 एकड़ जमीन की मांग कर रहा है। इन दोनों योजनाओं से करीब 1000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। स्थानीय लोग इसे शासन की उदासीनता मान रहे हैं। शहर की ट्रैफिक, सफाई और सुरक्षा पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। अब सवाल है कि क्या ये योजनाएं फिर सिर्फ घोषणा बनकर रह जाएंगी?

मार्च में ही गर्मी का प्रकोप, स्कूल टाइम बदलने की मांग तेज

बस्तर। मार्च की शुरुआत के साथ ही बस्तर में गर्मी ने तेवर दिखाना शुरू कर दिया है। बढ़ते तापमान ने स्कूली बच्चों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ा दी है। तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने स्कूल टाइम बदलने की मांग उठाई है। संघ का कहना है कि दोपहर में घर लौटना बच्चों के लिए बेहद कष्टदायक हो रहा है। पड़ोसी जिलों में पहले ही सुबह की पाली लागू की जा चुकी है। ऐसे में बस्तर में भी सुबह 7:30 से 11:30 तक स्कूल चलाने की मांग की गई है। जिला शिक्षा अधिकारी के अवकाश पर होने से आदेश में देरी हो रही है। हालांकि विभाग स्तर पर इस पर विचार जारी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही नया समय-चक्र लागू होगा। इससे हजारों छात्रों को चिलचिलाती धूप से राहत मिल सकेगी। अभिभावकों ने भी इस मांग का समर्थन किया है। अब प्रशासन के फैसले पर सबकी नजर टिकी हुई है।

मौसम का मिजाज बदला, राहत भी और चिंता भी

बस्तर। तेज गर्मी के बीच अचानक बदले मौसम ने बस्तर में राहत और परेशानी दोनों दी। मंगलवार दोपहर तेज आंधी और गरज-चमक के साथ बारिश शुरू हो गई। तापमान में गिरावट आई और लोगों ने राहत की सांस ली। लेकिन तेज हवाओं के कारण कई जगह पेड़ गिर गए। बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई और घंटों सप्लाई बाधित रही। शाम होते-होते आसमान में अंधेरा छा गया था। ग्रामीण इलाकों में लोगों को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। अचानक बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। फसलों को नुकसान की आशंका जताई जा रही है। मौसम के इस उतार-चढ़ाव ने जनजीवन को प्रभावित किया है।
विशेषज्ञ इसे बदलते मौसम चक्र का संकेत मान रहे हैं। अब आगे मौसम कैसा रहेगा, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।

एक महीने से पानी संकट, महिलाओं का फूटा गुस्सा

जगदलपुर। डोंगरी पारा वार्ड में पिछले एक महीने से पेयजल संकट गहराया हुआ है। नलों में पानी पूरी तरह बंद होने से लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है। महिलाओं को दूर-दराज से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। पीने, खाना बनाने और रोजमर्रा के कामों में भारी दिक्कत आ रही है। स्थानीय लोगों ने नगर निगम से कई बार शिकायत की। सीएमओ ने एक सप्ताह में बोरिंग कराने का आश्वासन दिया था। लेकिन अब तक कोई काम शुरू नहीं हुआ है। छोटे बच्चे और बुजुर्ग इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। गर्मी बढ़ने के साथ संकट और गहराने लगा है। महिलाओं ने प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग की है। लोगों का कहना है कि योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। अब सवाल है कि जल संकट पर कब कार्रवाई होगी?

जल संरक्षण में महिलाओं की अगुवाई, बना मिसाल

कोंडागांव। हसलनार पंचायत में जल संरक्षण को लेकर अनूठी पहल देखने को मिली। जल अर्पण और जल उत्सव पखवाड़े के तहत सामूहिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। महिलाओं, स्व-सहायता समूहों और जल समितियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। गांव स्तर पर जल बचाने और स्वच्छता का संदेश दिया गया। बेहतर काम करने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया गया। इससे गांव में जागरूकता का माहौल बना है। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं की भूमिका को पहचान देना था। साथ ही जल संकट से निपटने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी तय की गई। लोगों ने जल संरक्षण का संकल्प लिया। ग्राम स्तर पर इस तरह की पहल को सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयास भविष्य के लिए जरूरी हैं। यह पहल अन्य गांवों के लिए भी उदाहरण बन रही है।

महुआ खरीदी पर अनिश्चितता, ग्रामीणों की उम्मीदों को झटका

बस्तर। बस्तर में महुआ खरीदी को लेकर इस साल भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। पिछले साल खरीदी नहीं होने के कारण ग्रामीण पारंपरिक तरीके से संग्रह कर रहे हैं। फूड ग्रेड महुआ को बढ़ावा देने की योजना ठंडी पड़ती नजर आ रही है। सरकारी खरीदी नहीं होने से ग्रामीणों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा। महुआ का उपयोग अब लड्डू और अन्य उत्पादों में भी बढ़ रहा है। इसके बावजूद समितियों में खरीदी की तैयारी नहीं दिख रही है। पहले कच्चा महुआ 10 रुपए प्रति किलो खरीदा गया था। इससे ग्रामीणों को सीधा लाभ मिला था। लेकिन इस बार अनिश्चितता ने उनकी आय पर असर डाला है। महुआ बस्तर की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। ग्रामीण अब सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। अगर खरीदी शुरू नहीं हुई तो नुकसान बढ़ सकता है।

लोक अदालत में रिकॉर्ड निपटारा, 4 करोड़ से ज्यादा का एवार्ड

दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा में आयोजित नेशनल लोक अदालत में बड़ी सफलता मिली है। कुल 4810 मामलों को सुनवाई के लिए रखा गया था। इनमें से 4728 मामलों का आपसी सहमति से निराकरण किया गया। करीब 4 करोड़ 10 लाख रुपये से ज्यादा का एवार्ड पारित हुआ। कार्यक्रम वर्चुअल और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से हुआ। अलग-अलग खंडपीठों में न्यायाधीशों ने सुनवाई की। बीजापुर, सुकमा और बचेली में भी मामलों का निपटारा हुआ। बैंक, बीएसएनएल और अन्य विभागों ने सहयोग दिया। लोक अदालत से लोगों को त्वरित न्याय मिला। कार्यक्रम के दौरान पौधरोपण का संदेश भी दिया गया।
पक्षकारों को पौधे भेंट कर पर्यावरण जागरूकता बढ़ाई गई। यह आयोजन न्याय व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

जहां पहली बार बजी स्कूल की घंटी

नारायणपुर। अबूझमाड़ के करकाबेड़ा गांव में पहली बार शिक्षा की शुरुआत हुई है। यहां 20 बच्चों के लिए प्राथमिक शाला खोली गई है। प्रशासन की पहल से बच्चों को गांव में ही पढ़ाई का अवसर मिला। अधिकारियों ने 5 घंटे पैदल चलकर स्कूल की शुरुआत की। गोटुल को अस्थायी कक्षा के रूप में उपयोग किया जा रहा है। बच्चों को किताबें, गणवेश और जरूरी सामग्री दी गई। आसपास के गांवों के बच्चों को भी इसका लाभ मिलेगा। ग्रामीणों में इस पहल को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। यह कदम अबूझमाड़ में बदलाव की नई शुरुआत माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। जनप्रतिनिधियों ने इसे विकास की दिशा में बड़ा कदम बताया। अब यह गांव शिक्षा की नई पहचान बना रहा है।

रेल इतिहास समृद्ध, लेकिन आज भी कनेक्टिविटी अधूरी

बस्तर। एक समय बस्तर देशभर को रेल स्लीपर सप्लाई करता था। 1900 से 1940 तक यहां से रेललाइन के जरिए सप्लाई होती रही। लेकिन आज 100 साल बाद भी बस्तर रेल कनेक्टिविटी के लिए संघर्ष कर रहा है। वर्तमान में केवल केके लाइन ही प्रमुख रेल मार्ग है। यह लाइन मुख्य रूप से लौह अयस्क परिवहन के लिए बनाई गई थी। यात्री ट्रेनों की सुविधा सीमित बनी हुई है। रावघाट-राजहरा रेललाइन का काम जारी है, लेकिन विस्तार धीमा है। लोग लंबे समय से नई रेललाइन की मांग कर रहे हैं। इतिहास में योगदान देने वाला बस्तर आज भी उपेक्षा झेल रहा है। स्थानीय लोग इसे विकास में बाधा मानते हैं। रेल कनेक्टिविटी बढ़ने से क्षेत्र का विकास तेज हो सकता है। अब जरूरत है ठोस और समयबद्ध निर्णय की।

गर्भवती महिलाओं के लिए राहत, मुफ्त सोनोग्राफी की सुविधा

बस्तर। बस्तर में मातृ-शिशु स्वास्थ्य को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। अब निजी सोनोग्राफी सेंटर हर महीने दो दिन मुफ्त जांच करेंगे। यह निर्णय प्रशासन और निजी केंद्रों की बैठक में लिया गया। आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा। गर्भावस्था में सोनोग्राफी बेहद जरूरी मानी जाती है। पहले ग्रामीण महिलाएं खर्च के कारण जांच नहीं करा पाती थीं। अब उन्हें नजदीक में ही सुविधा उपलब्ध होगी। अधिकारियों ने पीसीपीएनडीटी एक्ट के पालन के निर्देश दिए हैं। भ्रूण लिंग जांच पर सख्त प्रतिबंध दोहराया गया है। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इस पहल से सुरक्षित प्रसव को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी आने की उम्मीद है।