Bastar News Update: बस्तर। फाल्गुन की हवा के साथ बस्तर में होली सिर्फ त्योहार नहीं, सामाजिक मेल-मिलाप का उत्सव बनकर उभरी। यहां रंगों में केवल उल्लास नहीं, बल्कि सद्भाव और स्मृतियों की खुशबू भी घुली दिखी। आंगन, गलियां और मन—तीनों जगह होली ने नई चमक बिखेरी। कविताओं के माध्यम से प्रेम, भक्ति और जीवन-दर्शन को स्वर मिला। रंगों ने रूठों को मिलाया और पुराने गिले-शिकवे मिटाए। युवा रचनाकारों ने फागुन की संवेदना को शब्द दिए। लाल, पीला, नीला और हरा हर रंग एक भाव बनकर उभरा। होली यहां सिर्फ खेल नहीं, परंपरा का पुनर्जागरण है। पीढ़ियों से चली आ रही रीत आज भी जीवंत दिखी। सांस्कृतिक प्रस्तुति ने नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ा। बस्तर की होली ने यह संदेश दिया—रंग इंसानियत के हों। यही वजह है कि यहां होली दिलों को जोड़ती है।

616 साल पुरानी होलिका दहन परंपरा
बस्तर। बस्तर में होली की शुरुआत परंपरा से होती है, दिखावे से नहीं। माड़पाल गांव में 616 वर्षों से निभाई जा रही होलिका दहन की रीत आज भी कायम है। यहीं से जिलेभर में होलिका दहन का क्रम शुरू होता है। पूर्व राजपरिवार की सहभागिता परंपरा को ऐतिहासिक पहचान देती है। मावली माता मंदिर में विधि-विधान से पूजा होती है। रथ यात्रा में ग्रामीणों की भागीदारी सामूहिक आस्था का प्रतीक है। डेढ़ किलोमीटर तक खिंचा रथ संस्कृति की निरंतरता दर्शाता है। होलिका दहन केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, सामाजिक एकता है। पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन परंपरा नहीं बदली। यह आयोजन बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती देता है। आधुनिकता के बीच भी परंपरा का सम्मान कायम है। माड़पाल आज भी बस्तर की होली का केंद्र बना हुआ है।
स्वास्थ्य व्यवस्था: रात में भी इलाज सुनिश्चित
बस्तर। बस्तर में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर आकाश छिकारा ने नॉर्मल प्रसव नजदीकी सरकारी अस्पताल में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अब किसी गर्भवती महिला को भटकना नहीं पड़ेगा। पीएचसी से लेकर मेडिकल कॉलेज तक अस्पताल 24 घंटे संचालित रहेंगे। रात में इलाज से इनकार अब बर्दाश्त नहीं होगा। सीएमएचओ और बीएमओ को सतत निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। रात के समय औचक निरीक्षण से व्यवस्था में कसावट आई है। अंदरूनी गांवों तक स्वास्थ्य अमला सक्रिय दिख रहा है। आपात मरीजों को तत्काल इलाज मिलने लगा है।
लंबे सफर की मजबूरी से ग्रामीणों को राहत मिली है। इससे जिला अस्पताल पर दबाव भी घटेगा। स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही पर कार्रवाई तय है।
महिला सशक्तिकरण प्राकृतिक गुलाल से आत्मनिर्भरता
बस्तर। बस्तर की महिलाएं इस होली रंगों से किस्मत संवार रही हैं। ग्रामीण महिलाओं ने रासायनिक रंगों के बजाय हर्बल गुलाल तैयार किया। पालक, चुकंदर, पलाश जैसे प्राकृतिक स्रोतों से रंग बने। यह पहल स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत संदेश देती है। स्व-सहायता समूहों ने उत्पादन से लेकर पैकेजिंग तक नवाचार किया। हर्बल गुलाल की मांग स्थानीय बाजार से बाहर तक पहुंची। शासकीय कार्यालयों और विश्वविद्यालय केंद्रों में आपूर्ति हो रही है। यह प्रयास वोकल फॉर लोकल को जमीन पर उतारता है। वैज्ञानिक प्रशिक्षण से गुणवत्ता में निखार आया। त्वचा के लिए सुरक्षित रंगों ने विश्वास बढ़ाया। महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है। होली अब आत्मनिर्भरता का रंग भी बन गई है।
होली पर जंगलों की सुरक्षा
कोंडागांव। होली के दौरान जंगलों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग अलर्ट है। अवैध कटाई की आशंका को देखते हुए विशेष अभियान चलाया गया। संवेदनशील क्षेत्रों में दिन-रात निगरानी बढ़ाई गई। पैदल गश्त के जरिए संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। रात्रि भ्रमण से अवैध तत्वों में हड़कंप है। वन अमला और समिति सदस्य संयुक्त रूप से तैनात हैं। जंगलों को नुकसान से बचाना प्राथमिक लक्ष्य है। यह अभियान त्योहार के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। स्थानीय स्तर पर सतर्कता बढ़ी है। वन संपदा की रक्षा में सहभागिता दिख रही है। होली में हरियाली सुरक्षित रखने की पहल सराहनीय है। वन विभाग की सक्रियता से अवैध गतिविधियों पर लगाम लगी है।
अपराध: पुरानी रंजिश का हिंसक अंजाम
बस्तर। बस्तर जिले में पुरानी रंजिश ने हिंसक रूप ले लिया। एक व्यक्ति पर जानलेवा हमला कर आरोपी फरार हो गए थे। टंगिया और तीर-धनुष से हमला कर गंभीर चोट पहुंचाई गई। पुलिस ने जंगल क्षेत्र में घेराबंदी कर आरोपियों को पकड़ा। घटनास्थल से लौटते समय संदिग्धों की पहचान हुई। पूछताछ में आरोपियों ने जुर्म कबूल किया। वारदात में प्रयुक्त हथियार बरामद किए गए। गवाहों की मौजूदगी में विधिवत जब्ती हुई। आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा गया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से कानून का संदेश गया। जंगल इलाकों में निगरानी और बढ़ाई गई है। अपराध पर सख्ती जारी रहने के संकेत हैं।
आस्था और विज्ञान: चंद्रग्रहण का प्रभाव
बस्तर। चंद्रग्रहण के दौरान बस्तर संभाग आस्था में डूबा नजर आया। सूतक काल लगते ही मंदिरों की दिनचर्या बदली। माँ दंतेश्वरी मंदिर सहित प्रमुख देवालयों के कपाट बंद रहे। भक्तों ने भोजन त्याग कर भजन-स्मरण किया। ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण की प्रक्रिया हुई। गंगाजल से मंदिर परिसर और प्रतिमाओं का अभिषेक किया गया। विशेष आरती के बाद दर्शन शुरू हुए। वैज्ञानिक दृष्टि से यह खगोलीय संयोग है। धार्मिक मान्यताओं में इसे साधना का समय माना गया। श्रद्धा और विज्ञान का संतुलन दिखा। भक्तों ने अनुशासन का पालन किया। आस्था की परंपरा पूरी गरिमा के साथ निभी।
आरएएमपी योजनान्तर्गत उद्यमियों के लिए इंडस्ट्री एवं बैंकर्स मीट 6 मार्च को
कवर्धा। आरएएमपी योजनान्तर्गत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमियों के लिए इंडस्ट्री एवं बैंकर्स मीट का आयोजन 06 मार्च 2026 का 03.30 बजे से होटल रायल सेलिब्रेशन, रायपुर रोड, कवर्धा में किया जाएगा। बैठक में अध्यक्ष, चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्रीज, अध्यक्ष राईस मिल संघ, अध्यक्ष फ्लाई एश ब्रिक्स संघ, अध्यक्ष जिला गुड़ इकाई मालिक संघ, सर्व उद्योग प्रतिनिधि, जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक, भारतीय स्टेट बैंक, विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधक, समस्त चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, उपसंचालक कृषि, सहायक संचालक उद्यानिकी विभाग, सहायक संचालक मछलीपालन विभाग, सहायक संचालक अंत्याव्यवसायी, सहायक संचालक खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, मुख्य नगर पालिका परिषद कवर्धा, जिला कार्यक्रम प्रबंधक राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन कवर्धा तथा समस्त डीआरपी की उपस्थिति में आयोजित की जाएगी।
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