नारायणपुर। नारायणपुर में विकास की रफ्तार अब जमीन पर उतरती दिख रही है, जहां वर्षों से जर्जर पड़ी सड़क अब नए सिरे से संवरने जा रही है. राष्ट्रीय राजमार्ग-130डी के गढ़बेंगाल चौक से मानसरोवर बखरूपारा तक करीब 2 किलोमीटर मार्ग के सुदृढ़ीकरण को 11.31 करोड़ की मंजूरी मिलना सिर्फ निर्माण नहीं, बल्कि शहर की लाइफलाइन को नई सांस देने जैसा है.
आधुनिक तकनीकी मानकों से बनने वाली यह सड़क यातायात को सुरक्षित और सुगम बनाएगी, जिससे आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानियां कम होंगी. लंबे समय से खराब सड़कों से जूझ रहे व्यापारियों और यात्रियों को अब राहत की उम्मीद जगी है. यह पहल केवल कनेक्टिविटी नहीं बढ़ाएगी, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति देगी.

क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की पहल और केंद्र-राज्य के समन्वय से मिली इस स्वीकृति को विकास के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है. तय समयसीमा में कार्य पूरा होने पर यह मार्ग हजारों लोगों के लिए राहत का कारण बनेगा. ग्रामीण क्षेत्रों को शहर से जोड़ने वाली यह कड़ी अब मजबूत होगी. लोगों का कहना है कि ऐसे प्रोजेक्ट से नारायणपुर की तस्वीर तेजी से बदल रही है. आने वाले समय में यह सड़क क्षेत्रीय विकास की रीढ़ साबित हो सकती है.
लापरवाही बनी हादसे की वजह
कोंडागांव। कोंडागांव में नेशनल हाईवे-30 एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही का गवाह बना, जहां तड़के सुबह एक खड़े ट्रक ने बड़ा हादसा खड़ा कर दिया. दूधगांव के पास सड़क किनारे खराब खड़े ट्रक से पीछे-पीछे आ रही दो हाइवा गाड़ियां टकरा गईं, जिससे जोरदार भिड़ंत हुई. सुबह करीब 5 बजे हुए इस हादसे में एक चालक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया गया.
शुरुआती जांच में सामने आया है कि तेज रफ्तार और समय पर वाहन न दिखना दुर्घटना की बड़ी वजह बना. हाईवे पर खड़े वाहनों की अनदेखी किस तरह जानलेवा साबित हो सकती है, यह घटना उसी का उदाहरण है. पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच में जुटी है और आगे की कार्रवाई जारी है. इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और सतर्कता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे पर खड़े वाहनों के लिए सख्त नियम जरूरी हैं. लगातार बढ़ती दुर्घटनाएं प्रशासन के लिए भी चेतावनी बनती जा रही हैं.
मुफ्त के लालच में बिखरी व्यवस्था
कोंडागांव। फरसगांव के साप्ताहिक बाजार में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब चलती ट्रक से धान की बोरियां सड़क पर गिर गईं और देखते ही देखते भीड़ लूट में बदल गई.
घटना रांधना बाजार रोड की है, जहां 4-5 बोरी धान गिरते ही लोग बाल्टी और बोरी लेकर उसे बटोरने दौड़ पड़े. कुछ ही मिनटों में सड़क पर भारी भीड़ जमा हो गई और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया. शाम करीब 5 बजे तक जाम की स्थिति बनी रही, जिससे बाजार क्षेत्र में अव्यवस्था फैल गई. मौके पर पहुंची पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद लोगों को समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रण में लिया.
हालांकि, इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन व्यवस्था जरूर चरमरा गई. यह घटना बताती है कि छोटे लालच किस तरह कानून-व्यवस्था को चुनौती दे सकते हैं. स्थानीय प्रशासन अब ऐसे मामलों में सख्ती की तैयारी में है.
अधिकार की लड़ाई OBC समाज का अल्टीमेटम
सुकमा। सुकमा में सर्व पिछड़ा वर्ग समाज ने जनगणना 2027 में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. समाज के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो उग्र आंदोलन किया जाएगा.
मुख्य मांग यह है कि जनगणना प्रपत्र में अन्य पिछड़ा वर्ग को भी शामिल किया जाए, ताकि वास्तविक सामाजिक आंकड़ों का सही आकलन हो सके. इसके साथ ही 27 प्रतिशत आरक्षण और यूजीसी नियमावली लागू करने की मांग भी उठाई गई है. समाज का कहना है कि बड़ी आबादी होने के बावजूद OBC वर्ग की लगातार अनदेखी की जा रही है. नेताओं ने चेतावनी दी कि अब यह अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे. यह मुद्दा अब सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गरमाता दिख रहा है. आने वाले दिनों में इस पर बड़ा आंदोलन देखने को मिल सकता है.
जवान का जज्बा सिस्टम बना सहारा
सुकमा। सुकमा में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान घायल हुए जवान के लिए सिस्टम ने मजबूत सहारा बनकर मिसाल पेश की है. आईईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल आरक्षक राजेंद्र कुमार नाग को 50 लाख रुपये की बीमा राशि दी गई है, जिससे उनके पुनर्वास और परिवार को बड़ी राहत मिलेगी.
बीजापुर के उसूर क्षेत्र में ऑपरेशन के दौरान घायल हुए जवान ने 5-6 महीने तक इलाज झेला, लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा. पुलिस सैलरी पैकेज योजना के तहत दी गई यह सहायता दर्शाती है कि जोखिम भरे कर्तव्य निभाने वाले जवानों के साथ विभाग खड़ा है. इस पहल से न केवल आर्थिक मदद मिली, बल्कि पूरे बल का मनोबल भी बढ़ा है. अधिकारियों ने इसे जवानों के साहस का सम्मान बताया. यह संदेश भी गया कि कठिन परिस्थितियों में सेवा देने वालों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा.
खेल मैदान से उभरती नई पहचान
जगदलपुर। जगदलपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 अब प्रतिभाओं के विस्फोट का मंच बन चुका है, जहां देशभर के जनजातीय खिलाड़ी अपनी क्षमता का दम दिखा रहे हैं. धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में एथलेटिक्स स्पर्धाओं ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया, खासकर 100 मीटर और 400 मीटर दौड़ में कांटे की टक्कर ने सबका ध्यान खींचा.
झारखंड, असम और गुजरात के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक अपने नाम किए, वहीं छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने भी रजत जीतकर प्रदेश का मान बढ़ाया. महज मिलीसेकंड के अंतर से तय हुए मुकाबलों ने प्रतियोगिता के स्तर को दर्शाया. महिला वर्ग में भी बेटियों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर अपनी ताकत साबित की. इन खेलों ने यह साफ कर दिया कि जनजातीय युवाओं में अपार प्रतिभा है, जिसे सही मंच मिलने पर वे राष्ट्रीय स्तर पर चमक सकते हैं. आयोजन से बस्तर की पहचान अब खेल हब के रूप में भी उभर रही है.
लाल गलियारे से डिजिटल कनेक्टिविटी तक
बीजापुर। बीजापुर का पीढ़िया इलाका, जो कभी माओवादी गतिविधियों का गढ़ माना जाता था, अब विकास की नई कहानी लिख रहा है. पहली बार यहां मोबाइल नेटवर्क पहुंचने से 15 गांव सीधे डिजिटल दुनिया से जुड़ गए हैं. यह बदलाव सुरक्षा बलों की रणनीति और लगातार प्रयासों का नतीजा है, जिन्होंने क्षेत्र को सुरक्षित बनाकर विकास का रास्ता खोला.
आईईडी जैसे खतरों को खत्म कर सड़क निर्माण संभव किया गया, जो अब ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा बन चुकी है. राशन, इलाज और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाएं अब गांव के करीब पहुंच गई हैं. सिविक एक्शन कार्यक्रमों के जरिए सुरक्षा बलों और ग्रामीणों के बीच भरोसा भी मजबूत हुआ है. यह परिवर्तन बताता है कि जहां पहले डर का साया था, वहां अब विकास की रोशनी फैल रही है. पीढ़िया अब मुख्यधारा से जुड़कर नई दिशा में आगे बढ़ रहा है.
सरकारी पहल से युवाओं को नया मौका
दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा में युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते आसान बनाने की दिशा में प्रशासन ने नई पहल की है. अग्निवीर थल सेना भर्ती 2026 की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को अब मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का लाभ मिलेगा. 6 अप्रैल से शुरू होने वाली इन कक्षाओं के जरिए युवाओं को लिखित परीक्षा के लिए तैयार किया जाएगा.
आवेदन की अंतिम तिथि 1 अप्रैल तय की गई है, जिसके चलते प्रशासन ने तेजी से पंजीयन की अपील की है. रोजगार कार्यालय, यूथ हब और शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से पंजीयन की सुविधा दी गई है. यह पहल खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं के लिए राहत लेकर आई है. अब संसाधनों की कमी उनके सपनों के आड़े नहीं आएगी. प्रशासन का मानना है कि सही मार्गदर्शन मिलने पर जिले के युवा बड़ी संख्या में चयनित हो सकते हैं.
नीतियों से मैदान तक खेल को मिल रहा सिस्टम सपोर्ट
जगदलपुर। बस्तर में खेल संस्कृति को मजबूत करने के लिए अब नीतिगत स्तर पर गंभीर प्रयास शुरू हो गए हैं. केंद्रीय राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे की अध्यक्षता में आयोजित संवाद कार्यक्रम में खेल अधोसंरचना और युवाओं के भविष्य पर व्यापक चर्चा हुई. बैठक में स्पष्ट हुआ कि केवल प्रतिभा ही नहीं, बल्कि संसाधन और नियमित प्रतियोगिताएं भी जरूरी हैं.
स्पोर्ट्स सिटी, साइंस लैब और कौशल योजनाओं के जरिए युवाओं को नए अवसर देने की दिशा में काम हो रहा है. समाज प्रमुखों ने भी प्रशिक्षकों और प्रतियोगिताओं की जरूरत पर जोर दिया. प्रशासन और समाज के समन्वय से खेलों को नई दिशा देने की रणनीति तैयार की जा रही है. सरकार का फोकस अब खिलाड़ियों को जमीनी स्तर से राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने पर है. यह पहल बस्तर को खेल मानचित्र पर मजबूत पहचान दिला सकती है.
संसाधन नहीं, हौसला बनता है जीत की असली ताकत
जगदलपुर। एक ओर बड़े-बड़े संसाधनों से लैस खिलाड़ी होते हैं, तो दूसरी ओर कुछ ऐसे भी होते हैं जो संघर्ष को ही अपनी ताकत बना लेते हैं. महाराष्ट्र के पालघर से आए 19 वर्षीय धावक सूरज माशी की कहानी यही बताती है, जिन्होंने उधार के जूतों में 5000 मीटर दौड़ में रजत पदक जीतकर सबको चौंका दिया.
दिहाड़ी मजदूर के बेटे सूरज के लिए दौड़ सिर्फ खेल नहीं, बल्कि परिवार की जिम्मेदारी उठाने का जरिया है. छोटी-छोटी प्रतियोगिताओं से मिलने वाली राशि से ही वे घर चलाते हैं और पढ़ाई करते हैं. कोचिंग के पैसे न होने पर उन्होंने दूसरों को देखकर खुद ही तकनीक सीखी. घिसे जूतों और सीमित संसाधनों के बावजूद उनका जज्बा कभी कम नहीं हुआ. यह कहानी बताती है कि असली ताकत संसाधनों में नहीं, बल्कि हौसले में होती है.
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