Bastar News Update : सुकमा। कभी जिन दंपती पर शासन ने 8-8 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था, आज वही समाज के बीच शांति और पुनर्वास की मिसाल बन गए हैं। सुकमा जिला प्रशासन द्वारा आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में पूर्व नक्सली दंपती कलमु मंगडू और माडवी बुधरी ने विवाह कर नया जीवन शुरू किया। दोनों लंबे समय तक नक्सल संगठन में पीपीसी मेंबर के रूप में सक्रिय रहे।


आत्मसमर्पण के बाद सरकार की पुनर्वास नीति ने उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा। दंपती ने कहा कि जंगल में डर था, भविष्य नहीं। हिंसा छोड़ने के बाद समाज और शासन से सम्मान मिला। दोनों ने कानून के दायरे में सामान्य नागरिक जीवन जीने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में कुल 107 जोड़ों ने विवाह किया। बिहार से परिजन भी आशीर्वाद देने पहुंचे। दो क्रिश्चियन जोड़ों का विवाह विशेष व्यवस्था से संपन्न कराया गया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण देव ने योजना को समाज जोड़ने वाला बताया। कार्यक्रम में बाल विवाह विरोधी शपथ भी दिलाई गई। यह विवाह बस्तर में शांति की नई तस्वीर बनकर सामने आया।
भूमकाल की ज्वाला अब शिक्षा की रोशनी: वीरांगना रमोतीन को स्थायी सम्मान
नारायणपुर। बस्तर के इतिहास में भूमकाल विद्रोह केवल संघर्ष नहीं, नारी शक्ति का प्रतीक भी रहा है। अबूझमाड़ की बेटी वीरांगना रमोतीन माड़िया ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ महिलाओं को संगठित किया। 1910-11 के भूमकाल विद्रोह में उन्होंने छापामार युद्ध का नेतृत्व किया। धनुष-बाण और कुल्हाड़ी से अंग्रेजी फौज को चुनौती दी। 17 मई 1911 को रणभूमि में वीरगति प्राप्त की। अब उनके बलिदान को स्थायी पहचान मिली है। नारायणपुर के शासकीय महिला महाविद्यालय का नामकरण उनके नाम पर किया गया। कॉलेज परिसर में उनकी प्रतिमा स्थापित की गई है। यह प्रतिमा छात्राओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगी। यह निर्णय आदिवासी अस्मिता को सम्मान देने की दिशा में अहम है। बस्तर की बेटियों को इतिहास से जोड़ने की पहल मानी जा रही है। रमोतीन माड़िया अब शिक्षा की प्रतीक बन चुकी हैं।
गर्मी से पहले सूखते जलस्रोत: निचली बस्तियों में सबसे गहरा संकट
जगदलपुर। गर्मी की आहट के साथ ही जगदलपुर में जल संकट गहराने लगा है। शहर के जल स्रोतों का वाटर लेवल तेजी से नीचे जा रहा है। निगम के 48 वार्डों में पानी की मांग बढ़ गई है। फिलहाल 18 टैंकरों से जल संकट वाले इलाकों में आपूर्ति की जा रही है। शहर में 17 ओवरहेड टैंक और 122 बोर से सप्लाई हो रही है। दीपावली के बाद बारिश नहीं होने से स्थिति बिगड़ी है। इंद्रावती के सहायक नालों में भी जल प्रवाह नहीं बढ़ा। निजी बोर बढ़ने से निगम के बोर कमजोर पड़े हैं। निचली बस्तियों में संकट सबसे अधिक है। 30533 नल कनेक्शन से प्रतिदिन 17 एमएलडी पानी दिया जा रहा है। कई इलाकों में जलस्तर 200 फीट तक नीचे चला गया है। निगम का दावा है कि गर्मी से पहले उपाय शुरू कर दिए गए हैं।
डबल लाइन से रफ्तार बढ़ाने की तैयारी: जगदलपुर स्टेशन पर बड़ा निरीक्षण
बस्तर। बस्तर रेल कनेक्टिविटी को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम सामने आया है। जरती–मनाबार के बीच बनी दूसरी रेल लाइन का निरीक्षण किया गया। डीआरएम ललित बोहरा और रेलवे सेफ्टी कमिश्नर ने सुरक्षा जांच की। यह हिस्सा कोत्तवलसा–किरंदुल डबलिंग प्रोजेक्ट का भाग है। मंगलवार को डिलमिली और जगदलपुर स्टेशन का भी अवलोकन हुआ। आयरन ओर साइडिंग और सिग्नल सिस्टम की जांच की गई। अमृत स्टेशन के निर्माण कार्य की समीक्षा हुई। रेलवे के कई वरिष्ठ अधिकारी निरीक्षण में शामिल रहे। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समयसीमा पर जोर दिया गया। डबल लाइन से माल परिवहन और यात्री सुविधा बढ़ेगी। बस्तर को रेल नक्शे पर और मजबूत करने की तैयारी है।
आमदई माइंस ठप: मजदूर आंदोलन से जिले की रफ्तार थमी
नारायणपुर। नारायणपुर के आमदई माइंस में मजदूरों का आंदोलन सातवें दिन भी जारी है। 400 से अधिक मजदूर जीरो पॉइंट पर धरने पर बैठे हैं। मानदेय वृद्धि की एक सूत्रीय मांग को लेकर आंदोलन हो रहा है। माइनिंग कार्य पूरी तरह ठप हो गया है। लौह अयस्क परिवहन भी बंद है। सैकड़ों वाहन खड़े हो गए हैं। वाहन मालिकों पर बैंक किस्तों का दबाव बढ़ा है। मजदूर संघ ने साफ कहा है कि मांग पूरी होने पर ही काम शुरू होगा। कंपनी ने 20 रुपये प्रतिदिन वृद्धि का प्रस्ताव रखा है।
मजदूर 50 रुपये बढ़ोतरी पर अड़े हैं। परिवहन समितियां दोनों के बीच फंसी हैं। समाधान नहीं हुआ तो संकट और गहराने के संकेत हैं।
बस्तर में ही बनेगा भविष्य: रामकृष्ण मिशन में कॉलेज की तैयारी
बस्तर। रामकृष्ण मिशन आश्रम में नया महाविद्यालय खुलने की संभावना मजबूत हो गई है। उच्च शिक्षा आयुक्त डॉ. संतोष देवांगन ने स्थल का निरीक्षण किया। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कॉलेज शुरू करने की तैयारी है। उद्देश्य बस्तर के विद्यार्थियों को यहीं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। भूमि, आधारभूत संरचना और शैक्षणिक माहौल का आकलन किया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर भी चर्चा हुई। अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य से सुझाव लिए गए। स्थानीय छात्रों के लिए नए पाठ्यक्रम खुलेंगे। प्रतिस्पर्धा और अवसर दोनों बढ़ेंगे। आयुक्त ने अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। यह पहल बस्तर के शैक्षणिक भविष्य को मजबूती देगी।
नक्सल प्रभावित इलाकों पर फोकस: सेचुरेशन शिविरों को रफ्तार
बीजापुर। बीजापुर में टीएल बैठक में विकास योजनाओं पर विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर संबित मिश्रा ने सेचुरेशन शिविरों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। नियद नेल्लानार क्षेत्रों में योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर फोकस है। नक्सल पीड़ित और आत्मसमर्पित लोगों को योजनाओं से जोड़ा जाएगा।आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका पर विशेष ध्यान रहेगा। विभागों को पात्र हितग्राहियों की पहचान के निर्देश दिए गए। योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा गया। बैठक में जिला पंचायत सीईओ और अपर कलेक्टर मौजूद रहे। उद्देश्य है कि विकास से विश्वास मजबूत हो। प्रशासन ने परिणाम आधारित काम पर जोर दिया है।
इमरजेंसी में भी दवा नहीं: अस्पताल की हकीकत उजागर
बस्तर। पावंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। सड़क हादसे में घायल मरीजों को इमरजेंसी में दवा तक नहीं मिली। न टिटनेस इंजेक्शन, न दर्द निवारक उपलब्ध था। परिजनों को बाहर से दवा खरीदने भेजा गया। बिना दबाव के इलाज संभव नहीं दिखा। बीएमओ के हस्तक्षेप के बाद इंजेक्शन मंगवाया गया। यह स्थिति गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करती है। मरीजों की जान जोखिम में डालने का आरोप है। अस्पताल की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित नजर आई। प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग उठी है। ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर भरोसा डगमगा रहा है।
फर्जी यूपीआई से ठगी: दुकानदार बना शातिर गिरोह का शिकार
बस्तर। बस्तर में डिजिटल पेमेंट के नाम पर ठगी का नया तरीका सामने आया है। सिंगनपुर में किराना दुकानदार से 5500 रुपये की ठगी हुई। फर्जी फोन-पे एप दिखाकर आरोपी ने रकम ऐंठ ली। पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हुई है। आरोपी का नाम करण बताया जा रहा है। पहले भी वह ठगी के मामलों में जेल जा चुका है।गांवों में 3-4 ठगों का गिरोह सक्रिय बताया जा रहा है। अन्य इलाकों में भी इसी तरह की ठगी की गई है। पीड़ित ने पुलिस में शिकायत की तैयारी की है। साइबर पुलिस ने सतर्क रहने की अपील की है। डिजिटल लेन-देन में सत्यापन जरूरी बताया गया है।
कम लागत, ज्यादा मुनाफा में सूर्यमुखी खेती की हुई वापसी
बस्तर। बस्तर के किसान एक बार फिर सूर्यमुखी की खेती की ओर लौट रहे हैं। पिछले वर्षों में इसका रकबा तेजी से घटा था। अब बाजार में बीज की मांग और कीमत बढ़ी है। सूर्यमुखी बीज 3 हजार रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। खेती में पानी और लागत दोनों कम लगती है। तेल की मांग बाजार में लगातार बढ़ रही है। 2017-18 में 575 हेक्टेयर में खेती हुई थी। 2021-22 में यह घटकर 77 हेक्टेयर रह गई थी। अब 2025-26 में 500 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है। विक्रय व्यवस्था अभी भी बड़ी चुनौती है। कृषि विभाग किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है। सूर्यमुखी बस्तर के लिए वैकल्पिक फसल बन सकती है।
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक


