Bastar News Update : दंतेवाड़ा. कटेकल्याण में प्रशासनिक अनुशासन पर सवाल तब खड़े हो गए, जब महिला तहसीलदार की सरकारी गाड़ी हादसे का शिकार हो गई. घटना के वक्त तहसीलदार वाहन में मौजूद नहीं थीं, लेकिन कार पर उनका नाम लिखा हुआ था. हादसा अंबेडकर पार्क के पास हुआ, जहां गाड़ी डिवाइडर से टकरा गई. मौके पर पहुंचे लोगों ने बताया कि चालक और प्यून नशे की हालत में थे. पूछताछ में दोनों ने बस स्टैंड के पास महुआ शराब पीने की बात स्वीकार की. नशे में वाहन चलाने से नियंत्रण बिगड़ा और दुर्घटना हुई. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की. सरकारी वाहन के दुरुपयोग का मामला भी जांच के दायरे में है. यह घटना प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है. सरकारी गाड़ी का निजी और गैरकानूनी इस्तेमाल उजागर हुआ है. अब देखना होगा कि दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है. फिलहाल मामला जांचाधीन है और प्रशासन की चुप्पी चर्चा में है.

दंतेवाड़ा – सत्ता बनाम व्यापार गीदम में दबाव की राजनीति?

गीदम में बीजेपी जिलाध्यक्ष संतोष गुप्ता पर लगे गंभीर आरोपों ने स्थानीय राजनीति और व्यापार जगत में हलचल मचा दी है. सराफा व्यापारी चांडकमल सोनी का आरोप है कि सत्ता और पद का दबाव दिखाकर उनसे न सिर्फ किराया रोका गया, बल्कि मारपीट भी की गई. व्यापारी का दावा है कि 40 हजार रुपये मासिक किराये की दुकान को लेकर विवाद लंबे समय से चल रहा था.

मंगलवार को बातचीत के बहाने घर बुलाकर गाली-गलौज और मारपीट का आरोप लगाया गया है. घटना के बाद सराफा व्यापारी बड़ी संख्या में गीदम थाने पहुंचे और एफआईआर की मांग की. व्यापारी वर्ग ने इसे सत्ता की दबंगई करार दिया है. वहीं संतोष गुप्ता ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उनका कहना है कि वे खुद पीड़ित हैं और उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जा रही है. पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. मामला राजनीतिक होने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था से भी जुड़ गया है. शहर में चर्चा है कि जांच निष्पक्ष होगी या दबाव हावी रहेगा. फिलहाल गीदम की सियासत गरमा चुकी है और निगाहें पुलिस कार्रवाई पर टिकी हैं.

सुकमा – जिला अस्पताल में इलाज से ज्यादा जुगाड़

जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर बदहाल तस्वीर पेश कर रही है. पिछले चार महीनों से अस्पताल में एक्स-रे फिल्म उपलब्ध नहीं है. मरीजों को एक्स-रे रिपोर्ट मोबाइल पर खींची गई फोटो के रूप में दी जा रही है. जिनके पास स्मार्टफोन नहीं, वे बिना रिपोर्ट के लौटने को मजबूर हैं. हर महीने 100 से 200 से ज्यादा एक्स-रे होने के बावजूद समाधान नहीं निकाला गया. नियमों के अनुसार स्थानीय स्तर पर खरीदी होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. डॉक्टर भी धुंधली मोबाइल तस्वीर देखकर इलाज करने को मजबूर हैं. इससे गलत इलाज और जटिलताओं का खतरा बढ़ गया है. गरीब मरीजों के लिए यह व्यवस्था सबसे ज्यादा परेशानी भरी है. सिविल सर्जन ने रायपुर से सप्लाई नहीं होने का हवाला दिया है. लेकिन यह जवाब मरीजों की पीड़ा कम नहीं कर पा रहा. कुल मिलाकर जिला अस्पताल भरोसे नहीं, मजबूरी पर चल रहा है.

दंतेवाड़ा – पीडीएस सिस्टम फेल चूहे खा रहे, गरीब भुगत रहे

गीदम वेयरहाउस से निकले चावल ने खाद्यान्न वितरण व्यवस्था की पोल खोल दी है. पीडीएस दुकान में चूहे के मल से दूषित चावल पाए गए हैं. कई उपभोक्ताओं ने चावल वापस कर दिए. यह चावल मानव उपभोग के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त हैं. दुकान में 448 कार्डधारी होने के बावजूद लापरवाही बरती गई. पहले ही घटिया चावल मामले में दो अफसरों पर कार्रवाई हो चुकी है. एक फूड इंस्पेक्टर को नोटिस भी जारी किया गया है. इसके बावजूद दूषित चावल वितरण तक पहुंच गए. यह सीधा गरीब और आदिवासी स्वास्थ्य से खिलवाड़ है. वेयरहाउस में चूहों की सक्रियता सिस्टम की नाकामी दिखाती है. अब सवाल है—जांच करेगा कौन और जिम्मेदारी लेगा कौन? फिलहाल खाद्य विभाग में हड़कंप है, भरोसा गायब.

नारायणपुर – परंपरा बनाम अधिकार शव दफन पर बढ़ता विवाद

ग्राम बोरपाल में मतांतरित व्यक्ति के शव दफनाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि बिना ग्राम समाज की सहमति परंपराओं का उल्लंघन किया गया. ग्रामीणों ने इसे सामाजिक भावनाओं पर आघात बताया है. मामले को लेकर थाना प्रभारी और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया. ग्रामीणों ने 24 घंटे में समाधान की चेतावनी दी है. पूर्व में भी ऐसे विवाद जिले में सामने आ चुके हैं. प्रशासन के सामने सामाजिक संतुलन की बड़ी चुनौती है. एक ओर संवैधानिक अधिकार, दूसरी ओर ग्राम परंपराएं हैं. किसी भी पक्षीय निर्णय से तनाव बढ़ सकता है. स्थिति संवेदनशील बनी हुई है. प्रशासन संवाद से समाधान निकालता है या नहीं, यह अहम होगा. फिलहाल गांव में तनावपूर्ण शांति बनी है.

जगदलपुर – इंद्रावती में मिला शव, मानसिक तनाव की दर्दनाक कहानी

इंद्रावती नदी में मिले महिला के शव की शिनाख्त हो गई है. मृतका की पहचान संगीता कश्यप (32) के रूप में हुई है. वह पूर्व में मेडिकल कॉलेज डिमरापाल में स्टाफ नर्स थी. मानसिक तनाव के चलते उसने कुछ समय पहले नौकरी छोड़ दी थी. 11 जनवरी को वह घर से टहलने निकली और वापस नहीं लौटी. परिजनों ने तलाश के बाद गुमशुदगी दर्ज कराई थी. दो दिन बाद नदी में शव मिलने से सनसनी फैल गई. परिवार में शोक की लहर है. पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की है. मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक समर्थन पर सवाल खड़े हुए हैं. यह घटना कई अनकही पीड़ाओं की ओर इशारा करती है. फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है.