Bastar News Update : जगदलपुर. नेशनल हाईवे-30 एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही का गवाह बना, जहां गुरुवार सुबह भूमका नाला के पास दो हाईवा की आमने-सामने टक्कर ने एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी और सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए. जगदलपुर से गिट्टी लेकर जा रहा हाईवा और कोंडागांव की ओर जा रहा खाली हाईवा इतनी जोरदार भिड़े कि एक चालक केबिन में ही फंस गया और उसकी मौके पर मौत हो गई. मृतक की पहचान बरण्डी निवासी दुबेश नाग के रूप में हुई है, जिसकी उम्र महज 28 साल बताई जा रही है. हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शव को बाहर निकालने के लिए पुलिस और स्थानीय लोगों को काफी देर तक मशक्कत करनी पड़ी. वहीं दूसरे वाहन का चालक गंभीर रूप से घायल हुआ, जिसे तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया, साथ ही क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है. लगातार हो रहे ऐसे हादसे यह संकेत दे रहे हैं कि हाईवे पर सुरक्षा इंतजाम और यातायात नियंत्रण की जरूरत पहले से ज्यादा बढ़ गई है.

दंतेवाड़ा – चावल संकट में उलझा सिस्टम, हितग्राही ‘उत्सव’ से भी वंचित

दंतेवाड़ा में पीडीएस व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरती नजर आ रही है, जहां गोदाम में हजारों क्विंटल चावल खराब होने के बाद अब वितरण व्यवस्था चरमरा गई है और हितग्राहियों को महीनों से राहत नहीं मिल पा रही है. कुआकोंडा ब्लॉक की 49 राशन दुकानों में तीन महीने का चावल एक साथ देने की योजना थी, लेकिन 2600 क्विंटल की जरूरत के मुकाबले महज 900 क्विंटल स्टॉक होने से स्थिति बिगड़ गई है. हालात इतने खराब हैं कि जहां 100 क्विंटल चावल भेजा जाना था, वहां सिर्फ 10 क्विंटल भेजकर औपचारिकता निभाई जा रही है. 7 अप्रैल को आयोजित चावल उत्सव में भी एक तिहाई हितग्राही शामिल नहीं हो पाए, क्योंकि उन्हें चावल ही नहीं मिल सका. वहीं मिलरों द्वारा बीआरएल चावल वापस नहीं जमा करने से संकट और गहरा गया है, खासकर रिजवी राइस मिल द्वारा बड़ी मात्रा में चावल जमा नहीं किए जाने से व्यवस्था प्रभावित हुई है. माटी तिहार जैसे त्योहार के दौरान चावल की कमी ने ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ा दी है, जबकि जिले में लगातार पर्याप्त सप्लाई के दावे किए जा रहे हैं. फिलहाल प्रशासन दो दिनों में स्थिति सुधारने का भरोसा दे रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी सवाल खड़े कर रही है.

कोंडागांव – पत्थर बना हथियार, राह चलते युवक की हत्या से सनसनी

कोंडागांव जिले में एक सनसनीखेज वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए, जहां एक अज्ञात हमलावर ने राह चलते युवक पर पत्थर से हमला कर उसकी जान ले ली और इलाके में दहशत फैला दी. भतवा निवासी मेहंदू मरकाम अपने परिजनों के साथ बाइक से लौट रहे थे, तभी बागबेड़ा और खुड़ी के बीच अचानक एक व्यक्ति ने ईंट से उनके सीने पर वार कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. घटना के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामला दर्ज कर जांच शुरू की और साइबर सेल के साथ संयुक्त टीम गठित कर आरोपी की तलाश में जुट गई. महज कुछ घंटों के भीतर पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर धनीराम मंडावी को गिरफ्तार कर लिया, जिसने इस वारदात को अंजाम दिया था. पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने जहां मामले का खुलासा कर दिया, वहीं इस तरह की घटनाओं ने आम लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जरूर बढ़ा दी है.

बीजापुर – मजदूरों की सफर में हादसा, ओवरलोडिंग ने पलटी पिकअप

बीजापुर में मजदूरी के लिए निकले ग्रामीणों का सफर हादसे में तब्दील हो गया, जहां ओवरलोड पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया और 15 से ज्यादा मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए. भोपालपटनम ब्लॉक के सोमनपल्ली के पास सुबह हुए इस हादसे में 40 से 45 मजदूर पिकअप में सवार होकर महाराष्ट्र जा रहे थे, लेकिन खराब सड़क और ओवरलोडिंग ने उनकी जान जोखिम में डाल दी. हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई, जिसे सुनकर आसपास के ग्रामीण मदद के लिए दौड़े और घायलों को बाहर निकाला गया. सभी घायलों को पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से गंभीर रूप से घायल मरीजों को जिला अस्पताल और फिर कुछ को जगदलपुर रेफर किया गया. डॉक्टरों के अनुसार तीन घायलों की हालत ज्यादा गंभीर है, जिनका हायर सेंटर में इलाज जारी है. यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि नियमों की अनदेखी और खराब सड़कें मिलकर बड़े हादसों को न्योता दे रही हैं.

दंतेवाड़ा – सड़क के बिना संघर्ष, मरीजों को कांवड़ में ढोने को मजबूर ग्रामीण

दंतेवाड़ा के कटेकल्याण ब्लॉक के सुरनार गांव में आज भी विकास की राह अधूरी है, जहां सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को मरीजों को कांवड़ में उठाकर मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ रहा है. गांव के एक हिस्से तक पक्की सड़क जरूर पहुंची है, लेकिन ओमेलपारा जैसे इलाके अब भी 7 से 8 किलोमीटर दूर कटे हुए हैं, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी कठिन बनी हुई है. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन से सड़क और पुलिया निर्माण की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है. बरसात के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है, जब नाले पार करना भी जोखिम भरा हो जाता है. पंचायत के पास भी इतना बजट नहीं है कि अस्थायी व्यवस्था की जा सके, जिससे लोगों की परेशानी लगातार बनी हुई है. ऐसे हालात में बीमार और बुजुर्गों के लिए अस्पताल तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है, जो ग्रामीण विकास की हकीकत को उजागर करता है.

जगदलपुर – स्वास्थ्य सेवाओं में हाईटेक बदलाव, अब अस्पताल में ही होगी 134 जांच

जगदलपुर के महारानी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है, जहां पारंपरिक लैब व्यवस्था को अपग्रेड कर हाईटेक अटल आरोग्य लैब शुरू की जा रही है. इस नई व्यवस्था के तहत अब मरीजों को छोटी-छोटी जांच के लिए निजी अस्पतालों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा और 134 प्रकार की जांच एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी. खास बात यह है कि सभी जांच निशुल्क होंगी और रिपोर्ट सीधे मरीज के मोबाइल पर भेजी जाएगी, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी. इस लैब को हब एंड स्पोक मॉडल पर विकसित किया जा रहा है, जिसमें बड़े अस्पताल केंद्र के रूप में और छोटे स्वास्थ्य केंद्र सैंपल कलेक्शन पॉइंट के रूप में काम करेंगे. योजना के तहत जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों को भी इससे जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बड़ा लाभ मिलेगा. आधुनिक मशीनों और डेटा स्टोरेज सिस्टम के साथ यह लैब स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और सुविधा दोनों को बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

दंतेवाड़ा – धूल से घुटता शहर, टेलिंग्स गाड़ियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग

किरंदूल के वार्ड 18 में धूल और प्रदूषण से परेशान लोगों का गुस्सा आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा, जहां टेलिंग्स ढोने वाली गाड़ियों को घंटों तक रोककर विरोध दर्ज कराया गया. लगातार हो रही आवाजाही से सड़क पर लाल मिट्टी की मोटी परत जम गई है, जो अब घरों के अंदर तक पहुंच रही है और लोगों की दिनचर्या प्रभावित कर रही है. महिलाओं ने बताया कि हालात इतने खराब हैं कि खाना तक धूल से अछूता नहीं रह पा रहा और घरों में फर्नीचर ढंककर रखना पड़ रहा है. कंपनी पर आरोप है कि मशीन खराब होने का बहाना बनाकर नियमित सफाई से बचा जा रहा है, जबकि रोजाना दर्जनों गाड़ियां इस मार्ग से गुजरती हैं. पुलिस की समझाइश के बाद फिलहाल रास्ता खोला गया, लेकिन लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी जाएगी. यह विरोध स्थानीय स्तर पर बढ़ते पर्यावरण संकट की गंभीरता को दिखाता है.

सुकमा – जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड का एसी खराब

सुकमा जिला अस्पताल का प्रसूति वार्ड इन दिनों बदहाल व्यवस्था का उदाहरण बन गया है, जहां भीषण गर्मी के बीच एसी खराब होने से जच्चा-बच्चा दोनों परेशान हैं और स्वास्थ्य सुविधाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं. पिछले दो साल से सेंट्रल एसी बंद पड़ा है और वैकल्पिक रूप से लगाए गए स्प्लिट एसी भी सही तरीके से काम नहीं कर रहे, जिससे वार्ड में उमस और घुटन बनी हुई है. करीब 30 से ज्यादा प्रसूताएं अपने नवजात बच्चों के साथ भर्ती हैं, लेकिन पर्याप्त ठंडक न होने से बच्चे लगातार रो रहे हैं और माताएं भी परेशान हैं. परिजनों का कहना है कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह की लापरवाही बेहद चिंताजनक है, खासकर जब तापमान लगातार बढ़ रहा है. अस्पताल प्रबंधन ने मरम्मत कार्य जारी होने की बात कही है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर इतनी लंबी अवधि तक समस्या का समाधान क्यों नहीं हो पाया.