Bastar News Update: बस्तर। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रिक्त पड़े पंचायत पदों को भरने की प्रक्रिया तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर ग्राम पंचायतों में खाली पंच पदों के लिए उपचुनाव की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसके तहत जगदलपुर, बस्तर, बकावंड, लोहंडीगुड़ा, तोकापाल और दरभा विकासखंडों में कुल 22 पदों पर मतदान कराया जाएगा। चुनाव प्रक्रिया के लिए 1 अप्रैल 2026 को संदर्भ तिथि मानते हुए नई फोटोयुक्त मतदाता सूची तैयार की जा रही है। प्रशासन द्वारा मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी।

बता दें कि पहले चरण की शुरुआत 23 मार्च से होगी, जिसमें रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की नियुक्ति और आवश्यक कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इसके बाद विधानसभा की मतदाता सूची से वार्डवार आंकड़ों को अलग कर सॉफ्टवेयर की मदद से त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार की जाएगी।

प्रशासन के अनुसार 13 अप्रैल को प्रारंभिक मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद दावा-आपत्ति की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें नागरिक 20 अप्रैल तक नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन के लिए आवेदन कर सकेंगे। प्राप्त दावों और आपत्तियों का निराकरण 27 अप्रैल तक किया जाएगा। इसके बाद 5 मई को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराई जाएगी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रिक्त पदों को जल्द भरा जा सके।

जगदलपुर नगर निगम के वार्ड 16 में पार्षद पद के लिए उपचुनाव, चुनावी प्रक्रिया शुरू

जगदलपुर। नगर निगम के वार्ड क्रमांक 16 इंदिरा गांधी वार्ड में रिक्त पार्षद पद को भरने के लिए उपचुनाव की घोषणा कर दी गई है। इसके साथ ही निर्वाचन शाखा ने फोटोयुक्त मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। मतदाता सूची के लिए 1 अप्रैल 2026 को संदर्भ तिथि निर्धारित की गई है।

प्रशासन ने चुनावी प्रक्रिया को दो चरणों में पूरा करने की कार्ययोजना बनाई है। पहले चरण में 23 मार्च तक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की नियुक्ति और कर्मचारियों का चयन किया जाएगा। इसके बाद मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू होगी। प्रारंभिक मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद नागरिकों को अपने नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन कराने का अवसर दिया जाएगा। निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाने के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

इधर स्थानीय स्तर पर निर्वाचन से जुड़े अधिकारी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। वहीं वार्ड में उपचुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ने लगी है और संभावित प्रत्याशियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

जगदलपुर में पालतू कुत्ते का आतंक: राहगीरों पर झपटा

जगदलपुर। शहर के बृजराज नगर इलाके में सोमवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक पालतू कुत्ता अचानक आक्रामक हो गया और राह चलते लोगों पर झपटने लगा। कुत्ते के हमले से कुछ देर के लिए इलाके में दहशत का माहौल बन गया और लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए।

जानकारी के अनुसार कुत्ते का मालिक रोज की तरह रात के समय उसे घर के बाहर छोड़ देता था। इस बार कुत्ते का व्यवहार अचानक बदल गया और वह सड़क से गुजर रहे लोगों पर हमला करने लगा। अचानक हुए हमले से राहगीरों में घबराहट फैल गई। घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें कुत्ता राहगीरों की ओर तेजी से झपटता हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि समय रहते लोगों ने सतर्कता बरती और स्थिति को संभाल लिया, जिससे कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई।

घरेलू गैस का व्यावसायिक इस्तेमाल पकड़ा गया, होटल-ढाबों से 29 सिलेंडर जब्त

कोंडागांव। जिले में घरेलू गैस सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग के खिलाफ प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। खाद्य एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने होटल और ढाबों में छापेमारी कर कुल 29 घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किए हैं। यह कार्रवाई जिले के विभिन्न क्षेत्रों में की गई, जहां नियमों का उल्लंघन सामने आया।

अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान कोंडागांव शहर के कई होटलों में घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग पाया गया। वहीं फरसगांव क्षेत्र के कुछ होटल और मिठाई दुकानों में भी घरेलू सिलेंडर व्यावसायिक कार्यों में इस्तेमाल किए जा रहे थे। टीम ने कार्रवाई करते हुए 14 प्रतिष्ठानों से कुल 29 सिलेंडर जब्त किए।

प्रशासन का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडर का व्यावसायिक उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है, इसके बावजूद कई स्थानों पर नियमों की अनदेखी की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान संबंधित प्रतिष्ठानों को नोटिस भी जारी किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा और गैस आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए इस तरह की जांच लगातार जारी रहेगी। साथ ही होटल और ढाबा संचालकों को चेतावनी दी गई है कि भविष्य में यदि घरेलू गैस सिलेंडर का व्यावसायिक उपयोग करते पाए गए तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के अनुसार जिले में आगे भी इस तरह के जांच अभियान चलाए जाते रहेंगे।

जगदलपुर में मां दंतेश्वरी मंदिर का 10वां वार्षिकोत्सव, कलश यात्रा से होगी शुरुआत

जगदलपुर। शहर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर में सेवा वाहिनी द्वारा 10वां वार्षिकोत्सव धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। आयोजन की शुरुआत 14 मार्च को मनोकामना कलश यात्रा के साथ होगी।

जानकारी के अनुसार दोपहर 3:30 बजे मंदिर परिसर से कलश यात्रा निकलेगी, जो शहर के प्रमुख चौक-चौराहों से होते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंचेगी। यात्रा के दौरान श्रद्धालु माता के जयकारों के साथ भक्ति भाव में शामिल होंगे। शाम 6:30 बजे मंदिर परिसर में दीपदान का आयोजन किया जाएगा, जबकि रात 7:30 बजे महाआरती की जाएगी। सेवा वाहिनी की ओर से सभी श्रद्धालुओं से इस धार्मिक आयोजन में शामिल होने की अपील की गई है।

आयोजकों के अनुसार वार्षिकोत्सव के तहत 21 मार्च को सर्व कल्याण हवन और कुमकुम पूजन का कार्यक्रम भी रखा गया है। हर वर्ष इस उत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। मंदिर परिसर में आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था भी की गई है।

जगदलपुर में मनोकामना ज्योत के रेट को लेकर भ्रम, असमंजस में श्रद्धालु

जगदलपुर। चैत्र नवरात्रि से पहले मां दंतेश्वरी मंदिर में मनोकामना ज्योत के शुल्क को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। मंदिर समिति द्वारा हाल ही में तेल और घी की ज्योत के शुल्क में बदलाव किया गया है, जिसके बाद श्रद्धालुओं के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है।

नई व्यवस्था के अनुसार अब तेल की मनोकामना ज्योत के लिए 751 रुपए और घी की ज्योत के लिए 1751 रुपए निर्धारित किए गए हैं। अचानक किए गए इस बदलाव को लेकर कई श्रद्धालुओं ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शुल्क तय होने के बाद बार-बार बदलाव करना उचित नहीं है, इससे लोगों में भ्रम की स्थिति बनती है।

मंदिर प्रबंधन का कहना है कि मनोकामना ज्योत का शुल्क मंदिर समिति की बैठक में तय किया जाता है। नवरात्रि से पहले व्यवस्था को बेहतर बनाने और आवश्यक तैयारियों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। मंदिर समिति के अनुसार इस वर्ष अब तक करीब 350 श्रद्धालुओं ने मनोकामना ज्योत जलाने के लिए बुकिंग कराई है। वहीं नवरात्रि के दौरान करीब चार हजार मनोकामना ज्योत जलने की संभावना जताई जा रही है।

बस्तर में माहरा समाज ने मनाया 14वां स्थापना दिवस, वीरों के योगदान को किया याद

बस्तर। बस्तर संभाग के माहरा समाज ने अपना 14वां स्थापना दिवस जगतू माहरा स्मृति दिवस के रूप में मनाया। कुम्हड़ाकोट में आयोजित इस कार्यक्रम में संभाग के विभिन्न क्षेत्रों से समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत पूजा-अर्चना के साथ हुई, जिसके बाद एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने समाज के इतिहास और वीरों के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

सभा में बताया गया कि जगतू माहरा और धरमू माहरा ने जगदलपुर शहर की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। समाज के प्रतिनिधियों ने उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने और समाज की विरासत को सहेजने की बात कही।

कार्यक्रम के दौरान समाज की एकता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। स्थापना दिवस के अवसर पर केशलूर से कुम्हड़ाकोट तक बाइक रैली भी निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं और समाज के लोगों ने भाग लिया। इस आयोजन में सामाजिक कार्यकर्ताओं और कई गणमान्य नागरिकों की भी उपस्थिति रही।

कांकेर में धान उठाव में देरी, 41 हजार क्विंटल धान खुले में पड़ा

कांकेर। जिले के दुर्गुकोंदल क्षेत्र में धान उठाव में हो रही देरी से किसानों और समिति प्रबंधन की चिंता बढ़ गई है। सुरूंगदोह उपार्जन केंद्र में खरीदी के बाद करीब 41 हजार क्विंटल से अधिक धान अब भी खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है, जिससे उसके खराब होने का खतरा बढ़ गया है।

जानकारी के अनुसार इस वर्ष उपार्जन केंद्र में कुल 51 हजार क्विंटल से अधिक धान की खरीदी की गई थी। इसके मुकाबले अब तक केवल करीब 9 हजार क्विंटल धान का ही उठाव हो सका है। तेज धूप और बढ़ती गर्मी के कारण खुले में रखा धान खराब होने की आशंका जताई जा रही है।

समस्या को देखते हुए समिति प्रबंधन ने जिला विपणन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द धान परिवहन की व्यवस्था करने की मांग की है। ज्ञापन की प्रतिलिपि अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजी गई है। समिति का कहना है कि यदि समय रहते धान का उठाव नहीं किया गया तो किसानों और समिति दोनों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

दंतेवाड़ा में जल जीवन मिशन की धीमी प्रगति, कई गांवों में नल लगे लेकिन पानी नहीं

दंतेवाड़ा। जिले में जल जीवन मिशन की प्रगति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। घर-घर शुद्ध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन कई गांवों में अब तक पानी की नियमित आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई है।

आंकड़ों के मुताबिक जिले के 225 गांवों में इस योजना को लागू किया जाना है, लेकिन अब तक केवल 43 गांवों में ही नियमित रूप से पानी पहुंच रहा है। करीब 50 हजार घरों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि अभी तक लगभग 22 हजार घरों में ही जल आपूर्ति शुरू हो पाई है।

कई गांवों में नल और स्टैंड पोस्ट तो लगा दिए गए हैं, लेकिन पाइपलाइन से पानी नहीं आ रहा है। कुछ स्थानों पर स्टैंड पोस्ट टूट चुके हैं या उनका अन्य कामों में उपयोग किया जा रहा है। वहीं कई जल टंकियां बनकर तैयार हैं, लेकिन उनमें से बहुत कम से ही पानी की सप्लाई हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि योजना की रफ्तार नहीं बढ़ाई गई तो आने वाली गर्मी में पानी का संकट और गहरा सकता है।

जगदलपुर में सफाई व्यवस्था पर सवाल, कॉलोनी के बाहर लगा कचरे का ढेर

जगदलपुर। शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ अलग ही नजर आ रही है। एयरपोर्ट के पीछे स्थित देवकी होम्स कॉलोनी के बाहर इन दिनों कचरे का बड़ा ढेर जमा हो गया है, जिससे आसपास के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कॉलोनी के करीब 150 परिवारों का कहना है कि कचरा संग्रहण वाहन यहां नियमित रूप से नहीं पहुंचता। ऐसे में लोगों को मजबूरी में घर का कचरा कॉलोनी के बाहर ही फेंकना पड़ रहा है। धीरे-धीरे यहां कचरे का ढेर लग गया है, जिससे इलाके में गंदगी और बदबू फैलने लगी है।

स्थानीय निवासियों के अनुसार इस समस्या को लेकर कई बार नगर निगम में शिकायत भी की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। कचरे के कारण इलाके में मच्छरों की संख्या भी बढ़ने लगी है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरा पैदा हो रहा है।

कोंडागांव में डीएफओ के खिलाफ वन कर्मचारियों की हड़ताल

कोंडागांव। कोंडागांव वनमंडल में वन कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। डीएफओ की कार्यशैली से नाराज वन कर्मचारियों ने 12 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है, जिससे वन विभाग का कामकाज प्रभावित होने लगा है। हड़ताल में वन रक्षक से लेकर वनपाल और उप वन क्षेत्रपाल तक के कर्मचारी शामिल हैं। सभी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं।

कर्मचारियों का आरोप है कि डीएफओ द्वारा उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है और वेतन रोकने की चेतावनी दी जा रही है। उनका कहना है कि बिना कारण सीआर खराब करने और स्थानांतरण की धमकी देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

वन कर्मचारियों ने अपनी समस्याओं को लेकर कई जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन भी भेजा है। कर्मचारियों का कहना है कि होली से पहले इस मुद्दे पर बैठक भी हुई थी, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। फिलहाल वन कर्मचारी डीएफओ के स्थानांतरण की मांग पर अड़े हुए हैं। हड़ताल के चलते विभाग के नियमित कार्यों पर असर पड़ने लगा है।

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