जगदलपुर। बस्तर जिले के सुदूर आदिवासी क्षेत्र के बच्चों ने इंटर स्कूल खेल प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया.
खेलों में खो-खो, दौड़ और वॉलीबॉल जैसी प्रतिस्पर्धाएं शामिल थीं.
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जगदलपुर में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीण बच्चों ने शहर के स्कूलों को भी मात दी. विजेता खिलाड़ियों को ट्रॉफी और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया. ग्रामीण क्षेत्रों से आए विद्यार्थियों के प्रदर्शन ने सभी का ध्यान खींचा. शिक्षकों और कोचों ने बच्चों की तैयारी की खूब सराहना की. आयोजकों ने अगले वर्ष और बड़े स्तर पर आयोजन की घोषणा की. कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपस्थिति रही. इस अवसर पर छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी दीं. प्रतियोगिता से बच्चों में आत्मविश्वास का संचार हुआ.
जनसंपर्क शिविरों से गांवों में पहुंची योजनाएं
कोण्डागांव। कोण्डागांव के 300 से अधिक गांवों में प्रशासन द्वारा शिविर लगाकर योजनाओं की जानकारी दी गई.
इस विशेष अभियान में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और स्वरोजगार पर फोकस किया गया.
अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर समस्याएं सुनीं. शिविरों में महिलाओं और युवाओं की बड़ी भागीदारी रही. जिले के पांचों ब्लॉकों में समानांतर कार्यक्रम आयोजित किए गए. योजनाओं से जुड़ी शिकायतों का मौके पर समाधान किया गया. महिला स्वसहायता समूहों को प्रोत्साहित करने के प्रयास भी हुए. अभियान के तहत 25 सितंबर तक जनसंवाद जारी रहेगा. इस पहल को ग्रामीणों ने सराहा और नियमित बनाए जाने की मांग की. आर्थिक सशक्तिकरण के लिए स्वरोजगार योजनाओं पर विशेष जोर दिया गया.
सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई से माओवादी नेटवर्क को झटका
नारायणपुर। नारायणपुर में सुरक्षाबलों ने जंगलों में दबिश देकर भारी मात्रा में हथियार बरामद किए. जांच में पता चला कि बरामद हथियार माओवादी गतिविधियों में इस्तेमाल होते थे. ऑपरेशन को स्थानीय ग्रामीणों की मदद से अंजाम दिया गया.
पुलिस को LMG, SLR, बंदूकें और बारूद जैसी सामग्री मिली. यह अभियान कई महीनों की तैयारी और इनपुट्स पर आधारित था. ऑपरेशन के चलते कई माओवादी कैम्प खाली कर भागे. स्थानीय प्रशासन ने गांवों में अतिरिक्त सुरक्षा बढ़ा दी है. अधिकारियों ने बताया कि अब गांवों को माओवादी दबाव से मुक्त किया जा रहा है. ग्राम सभाओं में लोगों ने सुरक्षाबलों का आभार व्यक्त किया. कार्रवाई से क्षेत्र में शांति स्थापना की उम्मीद जगी है.
पशु सेवा व्यवस्था सवालों के घेरे में
बचेली। दंतेवाडा जिले के बचेली में घायल पशुओं के इलाज में हो रही लापरवाही को लेकर लोग नाराज़ हैं. सड़क हादसे में घायल हुए मवेशियों को घंटों इलाज नहीं मिला.
ग्रामीणों ने पशु चिकित्सकों की अनुपलब्धता पर चिंता जताई. पशु की मौत के बाद प्रशासन पर सवाल खड़े हो गए हैं. स्थानीय NGOs ने पशु चिकित्सा शिविर लगाने की मांग की है. पशुपालन विभाग ने लापरवाह कर्मचारियों पर जांच बैठा दी है. यह समस्या केवल बीजापुर ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी सामने आ रही है. गांवों में पशु चिकित्सकों की भारी कमी है. ग्रामीणों ने मांग की है कि हर पंचायत में स्थायी पशु चिकित्सक नियुक्त हो. विधायक ने भी इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने का आश्वासन दिया.
बाढ़ राहत शिविरों की व्यवस्था पर उठे सवाल
सुकमा। सुकमा जिले में बाढ़ राहत शिविरों की बदहाल स्थिति को लेकर लोगों में रोष है. कई शिविरों में पीने का पानी, शौचालय और भोजन की उचित व्यवस्था नहीं है. कुछ राहत केंद्रों में ताले लगे मिले और लोग बाहर खुले में सोने को मजबूर हैं. बच्चों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी हो रही है.
स्थानीय पंचायतों ने प्रशासन की उदासीनता पर नाराजगी जताई है. कुछ जनप्रतिनिधियों ने राहत वितरण में अनियमितता के आरोप भी लगाए हैं. मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने तत्काल सुधार का आश्वासन दिया है. स्थानीय समाजसेवी संस्थाएं भी मदद के लिए आगे आई हैं. लोगों ने राज्य सरकार से स्थायी राहत नीति की मांग की है. सरकारी स्तर पर इस मामले की जांच शुरू हो चुकी है.
मेडिकल छात्र की आत्महत्या से हॉस्टल प्रबंधन पर सवाल
जगदलपुर। जगदलपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज के छात्र ने हॉस्टल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. इस घटना पर छात्र संगठनों ने हॉस्टल की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. वहीं परिजनों ने संस्थान पर लापरवाही का आरोप लगाया है.
मृतक MBBS प्रथम वर्ष का छात्र था, जो मानसिक दबाव में बताया जा रहा है. साथियों को उसने आत्महत्या से पहले एक मैसेज भेजा था. पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है. कॉलेज प्रबंधन ने घटना पर शोक व्यक्त किया है. छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य सलाहकार की नियुक्ति की मांग की है..मामले की जांच के लिए प्रशासन ने विशेष कमेटी बनाई है. कॉलेज परिसर में छात्रों ने मौन रैली निकाली और श्रद्धांजलि दी.
मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा से जुड़ी ग्रामीण आस्था
दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा जिले के एक गांव में गणेश चतुर्थी पर खुद ग्रामीणों ने मिट्टी की प्रतिमा बनाई. इस पहल में युवाओं और बच्चों ने मिलकर चार फीट ऊंची प्रतिमा तैयार की. प्रतिमा पूरी तरह जैविक और पर्यावरण के अनुकूल रही.
स्थानीय पुजारी ने विधि-विधान से पूजा कर स्थापना की. गांव में हर साल यह परंपरा सामूहिक रूप से निभाई जाती है. प्रतिमा निर्माण में किसी बाहरी कारीगर की मदद नहीं ली गई. इससे गांव में स्वाभिमान और एकता की भावना मजबूत हुई है. सांस्कृतिक कार्यक्रमों में महिलाएं और बच्चे बढ़-चढ़कर शामिल हुए. प्रसाद वितरण और भजन कीर्तन से माहौल भक्तिमय हो गया. स्थानीय प्रशासन ने भी इस प्रयास को सराहा और प्रोत्साहन देने की बात कही.
युवाओं ने खुद संभाली सड़कों की मरम्मत की जिम्मेदारी
कांकेर। जिले के युवाओं ने खराब सड़क से परेशान होकर खुद श्रमदान शुरू किया. उन्होंने गांव की मुख्य सड़क में पड़े गड्ढों को मुरुम और मिट्टी से भरना शुरू कर दिया. इस अभियान को सोशल मीडिया पर काफी समर्थन मिला.
युवाओं ने प्रशासन को चेताया था, लेकिन सुनवाई नहीं हुई. अब यह अभियान जन आंदोलन का रूप ले रहा है. गांव के बुजुर्गों ने भी युवाओं की प्रशंसा की है. इससे प्रशासन पर दबाव बना है कि सड़क मरम्मत शीघ्र कराई जाए. स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर निष्क्रियता का आरोप लग रहा है. युवाओं ने हर रविवार श्रमदान जारी रखने का ऐलान किया है.
बच्चों को टीकाकरण अभियान में मिली बड़ी सफलता
नारायणपुर। जिले में बाल टीकाकरण अभियान को लेकर प्रशासन की पहल रंग लाई. जिले के दूरस्थ इलाकों में जाकर स्वास्थ्य टीमों ने बच्चों को नियमित टीके लगाए. इस अभियान में पहली बार मोबाइल टीका वाहन का प्रयोग किया गया.
ग्रामीण महिलाओं ने टीकाकरण में सक्रिय सहयोग दिया. छोटे बच्चों के अभिभावकों को जागरूक किया गया. पोषण ट्रैकिंग कार्ड के जरिए निगरानी की जा रही है. स्वास्थ्य विभाग ने इसे 100% कवरेज की ओर बढ़ता कदम बताया. अभियान के दौरान बच्चों को पौष्टिक आहार भी वितरित किया गया. प्रशासन ने इसे राज्य के लिए मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने की योजना बनाई है. जनजातीय बहुल क्षेत्र में इस सफलता को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
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